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पूर्व मंत्री ने निकाली बसपा विधायक के ब्राह्मण कार्ड के दांव की हवा

अरबों रुपये के बैंक लोन घोटाले में सीबीआई ने सोमवार को की थी विधायक विनय शंकर तिवारी की कम्पनी के कार्यलयों पर छापेमारी .

बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी

लखनऊ । पूर्वांचल के बुजुर्ग बाहुबली, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे, बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी की कंपनी गंगोत्री इंटरप्राइजेज के नोएडा व लखनऊ कार्यालय पर सोमवार को सीबीआई की छापेमारी पर सरकार के खिलाफ ब्राह्मण कार्ड खेले जाने पर पूर्व मंत्री व चिल्लूपार के पूर्व विधायक राजेश त्रिपाठी ने करारा तंज कसा है। राजेश चिल्लूपार में अजेय समझे जाने वाले हरिशंकर तिवारी को 2007 व 2012 के विधानसभा चुनाव में शिकस्त दे चुके हैं।

अरबों रुपये के बैंक लोन घोटाले के मामले में सीबीआई की छापेमारी को लेकर अपने फ़ेसबुक पोस्ट में पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी ने लिखा है कि फर्जी दस्तावेजों, फर्जी हस्ताक्षरों, फर्जी कम्पनियों के जरिये देश का अरबों रुपये हड़प कर बैठने वाले लोग पहले तो अपने रसूख का इस्तेमाल कर फाइलें दबवाते रहे, लेकिन अब जब सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने उत्तर प्रदेश के इस सबसे बड़े बैंक घोटाले पर से अभी पर्दा हटाना आरम्भ ही किया है तो जाति का रोना लेकर बैठ गये। राजेश त्रिपाठी की फेसबुक पोस्ट के मुताबिक चिल्लूपार के वर्तमान विधायक विनय शंकर तिवारी स्वयं‌ स्वीकार ही कर चुके हैं कि उन पर बैंक का इतना सौ करोड़ कर्ज है।

उन्हें आगे इससे मुकरना नहीं चाहिए। क्योंकि 2017 के विधान सभा चुनाव की रजिस्टर्ड बयानहलफी में उन्होंने कहा है कि उन पर या उनकी कम्पनियों पर कोई कर्ज है ही नहीं। उन्हें यह तो पता ही है कि चुनाव आयोग को दिये गये हलफनामे में तथ्य छिपाना गम्भीर अपराध माना जाता है। अब कहीं कोर्ट ने उनसे इस झूठी बयानहलफी पर जबाब तलब कर लिया तो कहीं वह और उनके लोग फिर ब्राम्हण-ब्राम्हण न चिल्लाने लगें । बसपा विधायक विनय शंकर पर पूर्व मंत्री की यह टिप्पणी ब्राह्मण कार्ड की हवा निकालने वाली मानी जा रही है जब उन्होंने अपनी पोस्ट को यह कहते हुए विस्तार दिया है, ” ब्राम्हण कार्ड को बार-बार खेल कर ही तो ये लोग सत्ता की चाशनी में अपनी जिलेबी डुबोते चले आ रहे हैं आखिर कब तक वही पुराना राग अलापते रहेगें।”

बता दें कि लूट के एक मामले में एक आरोपी की लोकेशन हरिशंकर तिवारी के गोरखपुर धर्मशाला स्थित आवास के पास मिलने की सूचना पर अप्रैल 2017 में पुलिस ने जब तिवारी हाता में छापेमारी की थी तब इसकी काफी प्रतिक्रिया हुई थी। तिवारी व उनके समर्थकों ने इसे सरकार की तरफ से ब्राह्मण उत्पीड़न का मामला बताकर धरना भी दिया था। चूंकि इस बार की कार्रवाई सीबीआई की तरफ से अरबों के बैंक लोन मामले में है, बसपा विधायक के जाति आधारित बयान के बाद भी उनके मुताबिक समर्थन नहीं मिल रहा है।

यह है मामला

पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी के पुत्र चिल्लूपार के विधायक विनय शंकर तिवारी की फर्म गंगोत्री इंटरप्राइजेज के नोएडा व लखनऊ कार्यालय पर सीबीआई ने सोमवार को छापेमारी की थी। फर्म पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया आईडीबीआई, केनरा बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक, कारपोरेशन बैंक से 1200 करोड़ रुपये लोन लेकर न चुकाने का मामला है। सीबीआई ने छापेमारी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से दर्ज शिकायत पर की। शिकायत में कहा गया है कि विनय की फर्म ने 700 करोड़ से अधिक का लोन फर्जी दस्तावेजों पर लिया और दूसरी कम्पनियों में रुपए डाइवर्ट कर फर्जीवाड़ा किया। इस फर्म में विनय, उनकी पत्नी और सहयोगी अजीत पांडेय का नाम है।

आईडीबीआई ने जारी किया था समन

आईडीबीआई ने अपने 200 करोड़ के लोन की वसूली को लेकर बाहुबली हरिशंकर तिवारी, उनके बेटों विनय शंकर तिवारी, पूर्व सांसद भीष्म शंकर तिवारी, भांजे गणेश शंकर पांडेय समेत 33 लोगों के खिलाफ सार्वजनिक समन जारी किया था।

कृषि भूमि पर बिना सत्यापन लोन लेने का आरोप

जो लोन लिए गए हैं उनके सापेक्ष कृषि भूमि की गारंटी दी गई है जो शहर से बहुत दूर हैं।आरोप है कि सियासी रसूख और बाहुबल के बूते इसका सत्यापन भी नहीं कराया गया है।

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