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अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए हम सभी को कर्म करने की जरूरत है: सरसंघचालक

पटना/बक्सर । बिहार के बक्सर में सनातन संस्कृति समागम के दूसरे दिन मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा कि किसी न किसी रूप में भगवन हर युग में अवतार लेकर हम सभी की इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए आते हैं। इच्छाएं अनंत हैं लेकिन संतों ने बताया है, होइहि सोइ जो राम रचि राखा। अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए हम सभी को कर्म करने की जरूरत है।

भागवत ने कहा कि भारत का पुराना गौरवशाली इतिहास रहा है और ये संतों की धरती रही है। हमारा काम पुरुषार्थ करना है, न कि नारेबाजी करना। नारेबाजी और जोश में होश नहीं खोना है। मनोकामना पूर्ण होने के लिए कर्म और पुरुषार्थ करना आवश्यक है। भावगत के सामने संतों ने साफ-साफ कहा कि अब याचना नहीं रण होगा। सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार करना है। उन्होंने कहा कि धर्म समाज को जोड़ कर रखता है। किसी से डर के कर्म नहीं करो। धर्म का पालन मन से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जप करने में मैं का आभास नहीं रहना चाहिए, सर्वत्र का आभास होना चाहिए है। जप के लिए हिमालय पर नहीं जाना है, मन को अयोध्या बनाओ।

इस मौके पर स्वामी रामभद्रा जी महाराज ने कहा कि इसी बक्सर में श्रीराम ने संतों को कहा था कि आप निर्भय होकर यज्ञ कीजिए। बक्सर की यह यात्रा श्रीराम की विजय स्मृति यात्रा है। 370 हटाया, 35ए हटाया। हंसते हंसते श्रीराम जन्मभूमि ली। अब ज्ञानव्यापी मंदिर और श्रीकृष्ण जन्मभूमि लेना है।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में जो कश्मीर का हिस्सा है, वह वापस लेना है। लद्दाख का हिस्सा जो चीन में है, उसे भी वापस लेना होगा। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह सब संभव है और पूरा होगा। संतों को अब केवल राष्ट्रीय हित की बात करनी चाहिए, घर वापसी को अभियान बनाना है। हिंदुओं की संख्या घट रही है, यह चिंता का विषय है। उदारता पूर्वक हिंदू धर्म अपनाने के लिए प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि अब याचना नहीं रण होगा।

इस मौके पर चिदानंद स्वामी ने कहा कि भारत केवल अपने लिए सांस नहीं लेता, पूरे विश्व के लिए सांस लेता है। स्मार्ट फोन के जमाने में ऐसा न हो कि मां-बाप भी हमारे कवरेज से बाहर हो जाएं, बच्चों को संस्कार दीजिए। हमें धरती के लिए संकल्प लेना है। सभी लोग पेड़ लगाएं, सिंगल यूज प्लास्टिक से बचें और जल के संचयन का संकल्प लें।(हि.स.)

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