
नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भगवान श्री रामलला 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अपनी जन्मभूमि पर भव्य मंदिर में लौट रहे हैं और इसके बाद श्री राम जन जन के मन मंदिर में भी लौटेंगे। श्री होसबाले ने अयोध्या में जन्मभूमि पर हो रहे श्रीराम मंदिर के निर्माण की ऐतिहासिक व गौरवपूर्ण यात्रा को रेखांकित करती पुस्तक ‘राम फिर लौटे’ का लोकार्पण के समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वामी ज्ञानानंद महाराज, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता, विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार भी मौजूद थे। पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा हैं तथा प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने किया है। मंच का संचालन प्रभात प्रकाशन के श्री प्रभात कुमार ने किया।श्री होसबाले ने कहा कि राम शुभ हैं, राम मंगल हैं, राम प्रेरणा हैं, विश्वास हैं। वे धर्म की मूर्ति नहीं विग्रह हैं, स्वयं धर्म हैं। जीवन का मर्म हैं, आदि और अंत हैं। प्रभु श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के पश्चात पहले राजमहल में और अब 500 वर्षों के संघर्ष के पश्चात 22 जनवरी को जन्म स्थान पर बने भव्य मंदिर में लौट रहे हैं। इसके बाद श्रीराम जन-मन के हृदय मंदिर में लौटेंगे।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकात्मता के लिए श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का आंदोलन था। राम मंदिर एक और मंदिर या पर्यटन का केंद्र नहीं है अपितु, यह तो तीर्थाटन का स्तंभ है। श्रीराम की अयोध्या यानी त्याग, लोकतंत्र, मर्यादा है।
उन्होंने कहा कि धर्म की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष सदैव से होता आया है, और यह कभी-कभी सृजन के लिए आवश्यक भी होता है। श्रीराम जन्मभूमि के लिए 72 बार संघर्ष हुआ, हर पीढ़ी ने लड़ाई लड़ी, किंतु कभी हार नहीं मानी। इस संघर्ष में हर भाषा, वर्ग, समुदाय व संप्रदाय के लोगों ने सहभागिता की। श्रीराम जन्मभूमि के इतिहास और संघर्ष की गाथा को अनेक लेखकों ने लिखा है। किंतु आंदोलन के विस्तृत इतिहास को तथ्यों व दस्तावेजों के साथ विस्तार से और लिखे जाने की आवश्यकता है। ऐसी पुस्तकें आने वाली पीढ़ी और वर्तमान पीढ़ी के लिए भी प्रेरणास्पद हैं। (वीएनएस)



