
महिलाओं के गर्भाशय के मुंख के कैंसर में 15 मिनट की “क्रायोथेरेपी” कारगर साबित हो रही है। क्रायोथेरेपी” (ठंडी सिकाई) से सर्वाइकल कैंसर के खतरे से मुक्ति मिलती है। सम्पूर्णा क्लीनिक की प्रभारी डा. जाह्नवी सिंह बताती हैं कि गर्भाशय के मुंख का कैंसर ह्यूमन पैपीलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। शारीरिक सम्पर्क के दौरान यह वायरस गर्भाशय के मुख तक पहुंच जाता है और उसे धीरे-धीरे संक्रमित करना शुरू कर देता है।
डॉ जाह्नवी बताती हैं कि गर्भाशय के मुख में एचपीवी से हुए संक्रमण को कैंसर में तब्दील होने में सामान्यतः दस से बीस वर्ष या इससे अधिक का समय लग जाता है। ऐसे में अगर समय रहते जांच कराकर संक्रमण का उपचार करा लिया जाए तो बच्चेदानी के मुंख के कैंसर से पूरी तरह बचा जा सकता है। लिहाजा 30 से 60 वर्ष तक की महिलाओं को समय-समय पर जांच अवश्य करानी चाहिए । उन्होंने बताया कि गर्भाशय के मुख की ठंडी सिकाई को “क्रायोथेरेपी” कहा जाता है।
इससे गर्भाशय के मुख में हुए संक्रमण के साथ ही सर्वाइकल कैंसर का खतरा खत्म हो जाता है। इस उपचार के लिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत भी नहीं होती। गर्भाशय का मुख एचपीवी वायरस से संक्रमित है या नहीं। इसका पता लगाने के लिए वीआईए विधि से जांच की जाती है। इस जांच में भी मात्र दो मिनट लगता है। संक्रमण का पता चलते ही उसी समय गर्भाशय के मुख की “क्रायोथेरेपी” की जाती है जिससे संक्रमण के साथ ही सर्वाइकल कैंसर का खतरा खत्म हो जाता है।
क्या है लक्षण
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण में मैनोपोज के बाद भी ब्लीडिंग,पीरियड खत्म होने के बाद भी रक्तस्राव,यौन सम्बन्ध के बाद रक्तस्राव हैं । इस रोग का पं. दीनदयाल उपाध्याय जिला चिकित्सालय के सम्पूर्णा क्लीनिक में नि:शुल्क होता है।
पीड़िता ठीक होने के बाद क्या कहती है
चेतगंज की रहने वाली 48 वर्षीया सुधा (परिवर्तित नाम) की जांच करने के बाद पं. दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय के सम्पूर्णा क्लीनिक में चिकित्सक ने जब बताया कि गर्भाशय के मुख में हुआ संक्रमण कैंसर में तब्दील हो सकता है । तो वह एक बारगी घबरा गयी। सुधा बताती हैं कि डाक्टर ने उसे समझाने के साथ ही उसे फौरन क्रायोथेरेपी” (ठंडी सिकाई) कराने की सलाह दी। महज 15 मिनट की हुई “क्रायोथेरेपी” के बाद डाक्टर ने पुनः जब उसे बताया कि अब वह सर्वाइकल कैंसर के खतरे से फ़िलहाल मुक्त हो चुकी है तब उसे लगा कि उसने एक नया जीवन पाया है।
जांच व उपचार में उसका एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ। डा. जाह्नवी सिंह बताती है कि सम्पूर्णा क्लीनिक की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई। मकसद महिलाओं को बेहतर चिकित्सकीय सुविधाएं देना है। खास तौर पर सर्वाइकल कैंसर व ब्रेस्ट कैंसर से सम्बन्धित जांच व उचित उपचार शामिल है।(हि.स.)।



