
मुंबई । बहुचर्चित वसूली घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को हाईकोर्ट में शपथपत्र पत्र पेश कर पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को मुख्य आरोपित बताया है। ईडी ने हाईकोर्ट को बताया कि वसूली घोटाले की जांच अंतिम चरण में हैं, इसलिए अगर उन्हें जमानत दी गई तो इसकी जांच पर असर पड़ेगा। हाईकोर्ट में शुक्रवार को अनिल देशमुख की जमानत याचिका पर सुनवाई होने वाली है। इस संबंध में ईडी ने गुरुवार को हाईकोर्ट को पत्र लिखकर अपना विरोध व्यक्त किया है।
जानकारी के अनुसार पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के वकील अनिकेत निकम और इंद्रपाल सिंह ने आवेदक की जमानत याचिका हाईकोर्ट में पेश की है। इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को जज अनुजा प्रभुदेसाई की सिंगल खंडपीठ के समक्ष होने वाली हैं। हाईकोर्ट ने ईडी को इस संदर्भ में अपना पक्ष रखने का आदेश जारी किया था। इसके बाद ईडी ने हाईकोर्ट ने बताया कि इस मामले में अनिल देशमुख के दो सहायकों सहित अन्य लोगों से पूछताछ की गई है। उससे पता चला है कि पुलिस विभाग में होने वाले वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला अनिल देशमुख के इशारे पर ही किया जाता था। इसके लिए अनिल देशमुख भारी भरकम रकम वसूलते थे। इस मामले की जांच अंतिम चरण में है, इसलिए अगर अनिल देशमुख को जमानत दी गई तो पूरी जांच प्रभावित हो जाएगी। इसी वजह से ईडी ने अनिल देशमुख की जमानत का तीव्र विरोध किया है।
उल्लेखनीय है कि मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के विरुद्ध 100 करोड़ रुपये रंगदारी वसूली का आदेश देने का आरोप लगाया था। इसी मामले की जांच सीबीआई के निर्देश पर ईडी कर रही है। ईडी ने मनी लॉड्रिंग के तहत अनिल देशमुख को नवंबर महीने में गिरफ्तार किया था। इस समय अनिल देशमुख सीबीआई की हिरासत में है और सीबीआई उनसे गहन पूछताछ कर रही है।(हि.स.)



