कपास मिशन, सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट, ECLGS 5.0, गन्ना मूल्य और रेलवे-शिपिंग योजनाओं से विकास को रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं, जिनमें कपास उत्पादकता मिशन, सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स, ECLGS 5.0, गन्ना मूल्य वृद्धि, रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग और वडीनार शिप रिपेयर हब शामिल हैं। इन योजनाओं से किसानों, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी, रोजगार बढ़ेगा और भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के कपास क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक बड़े फैसले के तहत “कपास उत्पादकता मिशन” (2026-27 से 2030-31) को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी मिशन के लिए 5659.22 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। सरकार का उद्देश्य कपास उत्पादन में आ रही चुनौतियों-जैसे घटती उत्पादकता, गुणवत्ता संबंधी समस्याएं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा-को दूर करना है।
यह मिशन केंद्र सरकार के 5-एफ विजन- फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्टरी, फैक्टरी टू फैशन और फैशन टू फॉरेन-के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसका लक्ष्य खेती से लेकर निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है।
उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर
सरकार इस मिशन के तहत उच्च उपज देने वाली, जलवायु और कीट प्रतिरोधी बीजों के विकास पर विशेष ध्यान देगी। साथ ही उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (HDPS), कम अंतराल पर रोपण और एकीकृत कपास प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा। अतिरिक्त लंबे रेशे (ELS) वाली कपास को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
किसानों और उद्योग दोनों को लाभ
इस योजना के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों की जानकारी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बाजार तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी। मंडियों के डिजिटलीकरण से पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ने की संभावना है।
उद्योग के लिए कम संदूषण वाली उच्च गुणवत्ता की कपास उपलब्ध कराने के लिए जिनिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स का आधुनिकीकरण किया जाएगा। देशभर में आधुनिक कपास परीक्षण लैब स्थापित कर गुणवत्ता मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की योजना है।
“कस्तूरी कॉटन भारत” को मिलेगा बढ़ावा
मिशन के तहत “कस्तूरी कॉटन भारत” ब्रांड को मजबूत किया जाएगा, जिससे भारतीय कपास को एक प्रीमियम और विश्वसनीय उत्पाद के रूप में वैश्विक पहचान मिलेगी। ट्रेसिबिलिटी सिस्टम के जरिए कपास की गुणवत्ता और स्रोत का प्रमाणन भी सुनिश्चित किया जाएगा।
पर्यावरण और नवाचार पर भी फोकस
कपास अपशिष्ट की रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देकर सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत किया जाएगा। साथ ही अलसी, रेमी, सिसल, मिल्कवीड, बांस और केले जैसे प्राकृतिक रेशों को प्रोत्साहित कर भारत के फाइबर बेस को विविध बनाया जाएगा, जिससे पर्यावरण के अनुकूल वस्त्र उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
व्यापक कार्यान्वयन योजना
यह मिशन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय के संयुक्त सहयोग से लागू किया जाएगा। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 10 संस्थान, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद का एक संस्थान और विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालय शामिल होंगे।
प्रारंभिक चरण में 14 राज्यों के 140 जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और करीब 2000 जिनिंग एवं प्रोसेसिंग इकाइयों को विकसित करने की योजना है।
2031 तक बड़े लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य 2031 तक कपास की उत्पादकता को 440 किलोग्राम/हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम/हेक्टेयर करना है। इसके साथ ही कुल उत्पादन को 498 लाख गांठ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन से लगभग 32 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि यह मिशन न केवल कपास क्षेत्र को नई दिशा देगा, बल्कि भारत को वैश्विक वस्त्र बाजार में और अधिक मजबूत स्थिति में स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन को बड़ी मजबूती: गुजरात में दो नई चिप परियोजनाओं को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत दो महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में देश की पहली गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक पर आधारित मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले सुविधा और एक आधुनिक सेमीकंडक्टर पैकेजिंग (OSAT) यूनिट शामिल है।
सरकार के इस निर्णय से न केवल देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी, बल्कि “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों को भी नई गति मिलेगी।
गुजरात बनेगा सेमीकंडक्टर हब
दोनों परियोजनाएं गुजरात में स्थापित की जाएंगी, जिनमें कुल 3,936 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इससे करीब 2,230 कुशल पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
धोलेरा में बनेगा अत्याधुनिक डिस्प्ले प्लांट
पहली परियोजना के तहत क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड (CML) गुजरात के धोलेरा में कंपाउंड सेमीकंडक्टर और ATMP के लिए एकीकृत सुविधा केंद्र स्थापित करेगी।
यह देश की पहली व्यावसायिक मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले निर्माण इकाई होगी, जो GaN तकनीक पर आधारित होगी। इस संयंत्र में 6-इंच वेफर्स पर एपिटेक्सी सहित GaN फाउंड्री सेवाएं भी उपलब्ध होंगी।
- वार्षिक उत्पादन क्षमता: 72,000 वर्ग मीटर डिस्प्ले पैनल
- 24,000 RGB वेफर्स सेट (मिनी/माइक्रो-एलईडी के लिए)
इन डिस्प्ले का उपयोग टीवी, कमर्शियल साइनेज, स्मार्टफोन, टैबलेट, कार डिस्प्ले, एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) डिवाइस और स्मार्टवॉच जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
सूरत में स्थापित होगी पैकेजिंग यूनिट
दूसरी परियोजना के तहत सूचि सेमिकॉन प्राइवेट लिमिटेड (SSPL) गुजरात के सूरत में एक आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) सुविधा स्थापित करेगी।
इस यूनिट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 1033.20 मिलियन चिप्स होगी। यहां तैयार चिप्स का उपयोग पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एनालॉग आईसी, औद्योगिक ऑटोमेशन, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाएगा।
ISM के तहत 12 परियोजनाएं मंजूर
इन दो नई परियोजनाओं के साथ, भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत कुल स्वीकृत परियोजनाओं की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इनका कुल निवेश लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
डिजाइन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी बढ़ावा
सरकार द्वारा 315 शैक्षणिक संस्थानों और 104 स्टार्टअप्स को डिजाइन अवसंरचना समर्थन दिया गया है, जिससे भारत में चिप डिजाइन क्षमताओं में तेजी से वृद्धि हो रही है।
तेजी पकड़ रहा है सेमीकंडक्टर सेक्टर
देश में पहले से स्वीकृत 10 परियोजनाएं विभिन्न चरणों में कार्यान्वयन के दौर में हैं। इनमें से दो परियोजनाएं व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं, जबकि दो अन्य जल्द ही उत्पादन शुरू करने वाली हैं।
सरकार का मानना है कि ये नई परियोजनाएं भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक सप्लाई चेन में एक मजबूत और विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करेंगी।
ईसीएलजीएस 5.0 को कैबिनेट की मंजूरी: एमएसएमई और एयरलाइन सेक्टर को मिलेगा बड़ा सहारा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे व्यवसायों, विशेषकर एमएसएमई और एयरलाइन क्षेत्र को तात्कालिक वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
सरकार का मानना है कि यह योजना अल्पकालिक नकदी संकट को दूर कर उद्योगों को स्थिर बनाए रखने और रोजगार बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
क्या है योजना का मुख्य उद्देश्य
राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से सदस्य ऋण संस्थानों (MLIs) को अतिरिक्त ऋण पर गारंटी कवरेज प्रदान किया जाएगा। इसका मकसद बैंकों को बिना जोखिम के अधिक ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि जरूरतमंद उद्योगों तक तुरंत पूंजी पहुंच सके।
किन्हें मिलेगा लाभ
योजना के तहत वे एमएसएमई और गैर-एमएसएमई इकाइयां पात्र होंगी, जिनकी 31 मार्च 2026 तक कार्यशील पूंजी सीमा और ऋण खाते सक्रिय एवं मानक (स्टैंडर्ड) स्थिति में हैं। इसके अलावा शेड्यूल्ड यात्री एयरलाइंस भी इस योजना के दायरे में आएंगी।
गारंटी और ऋण की प्रमुख शर्तें
गारंटी कवरेज:
- एमएसएमई के लिए 100%
- गैर-एमएसएमई और एयरलाइन क्षेत्र के लिए 90%
- गारंटी शुल्क: पूरी तरह शून्य
- अतिरिक्त ऋण सीमा:
- एमएसएमई/गैर-एमएसएमई के लिए: FY 2026 की चौथी तिमाही में उपयोग की गई कार्यशील पूंजी का 20% (अधिकतम 100 करोड़ रुपये)
- एयरलाइन कंपनियों के लिए: अधिकतम 1,500 करोड़ रुपये तक
- ऋण अवधि:
- सामान्य उद्योगों के लिए: 5 वर्ष (1 वर्ष का मोरेटोरियम)
- एयरलाइन क्षेत्र के लिए: 7 वर्ष (2 वर्ष का मोरेटोरियम)
- योजना अवधि:
यह योजना लागू दिशानिर्देश जारी होने की तिथि से 31 मार्च 2027 तक स्वीकृत ऋणों पर लागू होगी।
कारोबार और रोजगार को मिलेगी मजबूती
सरकार के अनुसार, यह योजना पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित आपूर्ति श्रृंखलाओं और बाजारों के बीच व्यवसायों को टिके रहने में मदद करेगी। अतिरिक्त कार्यशील पूंजी मिलने से उद्योग अपने संचालन को जारी रख सकेंगे, जिससे नौकरियों की सुरक्षा और उत्पादन की निरंतरता बनी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए राहत लेकर आएगा, जो वैश्विक परिस्थितियों के कारण नकदी संकट का सामना कर रहे हैं।
अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
ECLGS 5.0 के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह उद्योगों और रोजगार को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह योजना न केवल तत्काल आर्थिक दबाव को कम करेगी, बल्कि देश की औद्योगिक और आर्थिक मजबूती को भी बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी।
गन्ना किसानों को बड़ी राहत: 2026-27 सीजन के लिए 365 रुपये प्रति क्विंटल तय
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने गन्ना किसानों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए चीनी उत्पादन सीजन 2026-27 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
सरकार के इस फैसले को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पुनर्प्राप्ति दर के आधार पर तय होगा मूल्य
निर्धारित FRP 10.25 प्रतिशत की चीनी पुनर्प्राप्ति दर पर आधारित है। इसके तहत:
- पुनर्प्राप्ति दर में 0.1% वृद्धि पर 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भुगतान मिलेगा
- 0.1% कमी पर समान राशि की कटौती होगी
हालांकि सरकार ने किसानों को सुरक्षा प्रदान करते हुए यह स्पष्ट किया है कि जिन चीनी मिलों की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम होगी, वहां भी किसानों के भुगतान में कोई कटौती नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में किसानों को न्यूनतम 338.3 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा।
लागत से दोगुना लाभ
सरकार के अनुसार, गन्ने की उत्पादन लागत (नकद खर्च + पारिवारिक श्रम) 182 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है। इसके मुकाबले 365 रुपये का FRP लागत से 100.5 प्रतिशत अधिक है। यह पिछले सीजन 2025-26 की तुलना में 2.81 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
करोड़ों किसानों और श्रमिकों को फायदा
गन्ना उद्योग देश के सबसे बड़े कृषि आधारित उद्योगों में से एक है, जिससे लगभग 5 करोड़ किसान और उनके परिवार जुड़े हुए हैं। इसके अलावा करीब 5 लाख श्रमिक सीधे चीनी मिलों में कार्यरत हैं, जबकि परिवहन और कृषि श्रम जैसे सहायक क्षेत्रों में भी लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।
भुगतान की स्थिति में सुधार
सरकार ने गन्ना भुगतान के आंकड़े भी साझा किए हैं, जो इस क्षेत्र में बेहतर वित्तीय अनुशासन को दर्शाते हैं:
- सीजन 2024-25: कुल देय 1,02,687 करोड़ रुपये में से 1,02,209 करोड़ रुपये (लगभग 99.5%) का भुगतान किया जा चुका है
- सीजन 2025-26: 1,12,740 करोड़ रुपये में से 99,961 करोड़ रुपये (लगभग 88.6%) का भुगतान हो चुका है
सिफारिशों के आधार पर लिया गया निर्णय
यह मूल्य निर्धारण कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों और राज्य सरकारों व अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद किया गया है।
कब से लागू होगा नया मूल्य
365 रुपये प्रति क्विंटल का FRP 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले चीनी उत्पादन सीजन 2026-27 में किसानों से गन्ना खरीद पर लागू होगा।
किसानों के लिए मजबूत संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम गन्ना किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा। यह निर्णय न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा, बल्कि चीनी उद्योग की स्थिरता और विकास को भी सुनिश्चित करेगा।
रेलवे को मिली बड़ी सौगात: 23,437 करोड़ की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति (CCEA) ने देश में रेल अवसंरचना को मजबूत करने के लिए लगभग 23,437 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना, भीड़भाड़ कम करना और यात्रियों व माल परिवहन को अधिक सुगम बनाना है।
किन परियोजनाओं को मिली मंजूरी
मंजूर की गई परियोजनाओं में शामिल हैं:
- नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन
- गुंतकल-वाडी तीसरी और चौथी लाइन
- बुरहवाल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन
इन परियोजनाओं के तहत मौजूदा रेल मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैक बिछाए जाएंगे, जिससे ट्रेनों की आवाजाही तेज और अधिक कुशल होगी।
पीएम गति शक्ति के तहत विकास
ये सभी परियोजनाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिसका उद्देश्य मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना और लॉजिस्टिक्स दक्षता को सुधारना है।
6 राज्यों के 19 जिलों को लाभ
इन परियोजनाओं से मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। कुल मिलाकर भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
करीब 4,161 गांवों और लगभग 83 लाख लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने से कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी, जिनमें शामिल हैं:
- महाकालेश्वर मंदिर
- रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान
- कुनो राष्ट्रीय उद्यान
- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान
- मथुरा और वृंदावन
- मंत्रालयम (श्री राघवेंद्र स्वामी मठ)
- नेटिकंती अंजनेय स्वामी मंदिर
- नैमिषारण्य
- माल ढुलाई में बड़ा इजाफा
इन परियोजनाओं से कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा-इस्पात, उर्वरक और कंटेनर जैसे महत्वपूर्ण सामानों के परिवहन में तेजी आएगी। क्षमता बढ़ने से रेलवे हर साल करीब 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई करने में सक्षम होगा।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को फायदा
रेल परिवहन को ऊर्जा कुशल और पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। इन परियोजनाओं से:
- लगभग 37 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी
- 185 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी
- यह प्रभाव लगभग 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगा
- क्षेत्रीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि ये परियोजनाएं “नए भारत” के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से न केवल लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि रोजगार, व्यापार और उद्योग को भी नई गति मिलेगी।
गुजरात के वडीनार में बनेगा अत्याधुनिक शिप रिपेयर हब, 1,570 करोड़ की परियोजना को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति (CCEA) ने गुजरात के वडीनार में अत्याधुनिक जहाज मरम्मत केंद्र (Ship Repair Facility) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना भारत की राष्ट्रीय जहाज मरम्मत क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
इस परियोजना को दीनदयाल पत्तन प्राधिकरण (DPA) और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) के संयुक्त सहयोग से लगभग 1,570 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किया जाएगा।
क्या होगा इस परियोजना में खास
यह परियोजना एक ब्राउनफील्ड सुविधा के रूप में विकसित की जाएगी, जिसमें शामिल होंगे:
- 650 मीटर लंबा जेटी
- दो बड़े फ्लोटिंग ड्राई डॉक
- अत्याधुनिक कार्यशालाएं
- उन्नत समुद्री अवसंरचना
वडीनार की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना के लिए बेहद अनुकूल मानी जा रही है। यहां गहरे जल की उपलब्धता, प्रमुख समुद्री मार्गों से सीधा संपर्क और मुंद्रा पोर्ट व कांडला पोर्ट जैसे बड़े बंदरगाहों की निकटता इसे बड़े वाणिज्यिक जहाजों और विदेशी ध्वज वाले पोतों की मरम्मत के लिए आदर्श बनाती है।
बड़े जहाजों की मरम्मत अब देश में
वर्तमान में भारत में 230 मीटर से अधिक लंबाई वाले जहाजों की मरम्मत के लिए पर्याप्त सुविधा नहीं है। यह नया केंद्र 300 मीटर तक के बड़े जहाजों की मरम्मत करने में सक्षम होगा।
इससे भारतीय जहाजों को विदेशों में मरम्मत के लिए भेजने की जरूरत कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
रोजगार और स्थानीय उद्योग को बढ़ावा
इस परियोजना से:
- लगभग 290 प्रत्यक्ष रोजगार
- करीब 1,100 अप्रत्यक्ष रोजगार
सृजित होने की संभावना है। इसके अलावा, आसपास के क्षेत्रों में समुद्री सहायक सेवाओं और लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
बंदरगाहों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
पश्चिमी तट पर जहाज मरम्मत क्षमता बढ़ने से जहाजों के टर्नअराउंड समय में कमी आएगी, जिससे भारतीय बंदरगाहों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा।
दीर्घकालिक समुद्री विजन को मिलेगा बल
यह परियोजना सरकार के मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य भारत को वैश्विक समुद्री हब के रूप में विकसित करना है।
आर्थिक विकास को नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि वडीनार शिप रिपेयर हब न केवल भारत की समुद्री क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार को भी नई गति देगा। यह परियोजना देश को वैश्विक शिप रिपेयर बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी, अब 37 होंगे न्यायाधीश



