
एसटीआईपी के लिए भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से संयुक्त रूप से विकेंद्रीकृत, व्यापक और समावेशी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारत सरकार की ओर से पांचवी विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति एक ऐसे महत्वपूर्ण समय में बनाई जा रही है जब पूरी दुनिया कोविड माहामारी के संकट से जूझ रही है। यह पिछले एक दशक में हुए कई ऐसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों के बीच नवीनतम है, जिसमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवप्रवर्तन के लिए एक नए दृष्टिकोण और रणनीति की आवश्यकता महसूस की गई। जिस तरह के नए संकटो का दुनिया को सामना करना पड़ रहा है वैसे हालात में यह नई नीति अपने विकेन्द्रीकृत तरीकों से प्राथमिकताओं वाले क्षेत्र तय करेगी। यह निर्धारित करेगी की किन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जाना है। अनुसंधान के तरीके कैसे होने चाहिए तथा सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी का किस पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
नई नीति बनाने की प्रक्रिया में चार महत्वपूर्ण चरण शामिल किए गए हैं। पहले चरण के तहत विज्ञान नीति फोरम के माध्यम से एक व्यापक सार्वजनिक और विशेषज्ञ परामर्श प्रक्रिया निर्धारित की गई है। विज्ञान नीति फोरम नीति प्रारूपण प्रक्रिया के दौरान और बाद में बड़े सार्वजनिक और विशेषज्ञ पूल से इनपुट प्राप्त करने के लिए एक समर्पित मंच है। नई नीति बनाने की प्रक्रिया में चार महत्वपूर्ण चरण शामिल किए गए हैं। पहले चरण के तहत विज्ञान नीति फोरम के माध्यम से एक व्यापक सार्वजनिक और विशेषज्ञ परामर्श प्रक्रिया निर्धारित की गई है। विज्ञान नीति फोरम नीति प्रारूपण प्रक्रिया के दौरान और बाद में बड़े सार्वजनिक और विशेषज्ञ पूल से इनपुट प्राप्त करने के लिए एक समर्पित मंच है। नीति-निर्माण प्रक्रिया के दूसरे चरण में साक्ष्य-आधारित सिफारिशों को फीड करने के लिए विशेषज्ञों के विषयगत परामर्श शामिल हैं। इसके लिए इक्कीस (21) केंद्रित विषयगत समूहों का गठन किया गया है। नई नीति बनाने की प्रक्रिया में चार महत्वपूर्ण चरण शामिल किए गए हैं। पहले चरण के तहत विज्ञान नीति फोरम के माध्यम से एक व्यापक सार्वजनिक और विशेषज्ञ परामर्श प्रक्रिया निर्धारित की गई है। विज्ञान नीति फोरम नीति प्रारूपण प्रक्रिया के दौरान और बाद में बड़े सार्वजनिक और विशेषज्ञ पूल से इनपुट प्राप्त करने के लिए एक समर्पित मंच है। नीति-निर्माण प्रक्रिया के दूसरे चरण में साक्ष्य-आधारित सिफारिशों को फीड करने के लिए विशेषज्ञों के विषयगत परामर्श शामिल हैं। इसके लिए इक्कीस केंद्रित विषयगत समूहों का गठन किया गया है। तीसरे चरण में मंत्रालयों और राज्यों के साथ परामर्श प्रक्रिया शामिल की गई है जबकि चौथे चरण में शीर्ष स्तर पर विभिन्न-हितधारकों के साथ परामर्श की व्यवस्था की गई है। तीसरे चरण में विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों के बीच व्यापक स्तर पर विचार विमर्श के लिए राज्यों, मंत्रालयों और एजेंसियों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं।
विभिन्न चरणों में परामर्श प्रक्रियाएं शुरू हो चुकी हैं और समानांतर रूप से चल रही हैं। दूसरे चरण का विषयगत समूह परामर्श पिछले सप्ताह सूचना सत्रों की एक श्रृंखला के साथ शुरू हुआ। सूचना सत्र के दौरान, डीएसटी के नीति समन्वय और कार्यक्रम निगरानी प्रभाग के प्रमुख डॉ अखिलेश गुप्ता ने प्रस्तुतियां दीं और चर्चाओं को आगे बढ़ाया। सत्रों में 21 नीतिगत समूहों के लगभग 130 सदस्यों के साथ 25 नीति अनुसंधान अध्येताओं और डीएसटी और पीएसए के कार्यालय के वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
“विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने कहा “न्यू इंडिया के लिए बनाई जा रही नई विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति में कोविड महामारी से मिले सबक को भी शामिल किया जाएगा। इसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा नवाचार के माध्यम से अनुसंधान और विकास तथा विशाल बाजारों और जनसांख्यिकीय लाभांश की हमारी ताकत का लाभ उठाते हुए एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का लक्ष्य शामिल किया गया है।” नीति निमार्ण की छह महीने की प्रक्रिया में देश के वैज्ञानिक पारिस्थितिक तंत्र के बाहर और भीतर सभी हितधारकों के अलावा शिक्षा, उद्योग, सरकार, वैश्विक साझेदार, युवा वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीविद्, नागरिक निकाय और आम जनता के साथ व्यापक परामर्श किया जाना शामिल है। डीएसटी-एसटीआई नीति फेलोशिप प्राप्तकर्ताओं के कैडर को शामिल करते हुए इन-हाउस पॉलिसी नॉलेज और डेटा सपोर्ट यूनिट के साथ एक सचिवालय (प्रौद्योगिकी भवन) में स्थापित किया गया है ताकि चार चरणों की परामर्श प्रक्रिया के बीच परस्पर समन्वय बनाया जा सके।



