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कांग्रेस के नेता अधीर रंजन लोकसभा से निलंबित

मामला विशेषाधिकार समिति के पास भेजा गया

नयी दिल्ली : लोकसभा ने सरकार के विरुद्ध विपक्षी दलों के अविश्वास प्रस्ताव को तीन दिन की बहस के बाद विपक्ष के बहिर्गमन के बीच गुरुवार को ध्वनिमत से अस्वीकृत कर दिया गया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर मंगलवार को शुरू हुई बहस का विस्तार से जवाब देते हुए विपक्षी गठबंधन को ‘घमंडिया’ नाम देते हुए कहा कि भारत एवं भारतीयों के प्रति अविश्वास और घमंड कांग्रेस की नसों में रच बस गया है तथा उसे भारत को बदनाम करने में बहुत मज़ा आता है। उसे राजनीति के अलावा देश एवं देश के लोगों के हितों की कोई चिंता नहीं रही है। इसीलिए देश के लोगों के मन में कांग्रेस के प्रति अविश्वास का भाव बहुत गहरा हो गया है।

प्रधानमंत्री के जवाब के बाद अध्यक्ष ओम बिरला के बाद अविश्वास प्रस्ताव को सदन के समक्ष ध्वनिमत से निर्णय के लिए रखा। उससे कुछ समय पहले विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर गया था। विपक्ष की अनुपस्थिति में सदन ने अविश्वास प्रस्ताव काे ध्वनिमत से खारिज कर दिया।

प्रस्ताव को खारिज करने के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने प्रधानमंत्री के जवाब के दौरान कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी के आचरण को अमर्यादित और सदन की गरिमा के विरुद्ध बताते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव रखा और उन्होंने कहा कि श्री चौधरी के खिलाफ मामला सदन की विशेषाधिकार समिति के विचारार्थ ले जाया जाये और उसकी रिपोर्ट आने तक उन्हें निलंबित रखा जाए। सदन ने इस प्रस्ताव पर ध्वनिमत से मंजूरी दे दी और अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। (वार्ता)

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