
बीजिंग । चीन सरकार अपनी बिगड़ती आर्थिक हालात के कारण कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा में बढ़ोतरी कर रही है। एक ररिपोर्ट के अनुसार, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) ने एक मार्च से सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने की नीति को लागू करना शुरू कर दिया है।सरकार को यह नीति सामाजिक सुरक्षा पेंशन फंड की समुचित उपलब्धता नहीं होने के कारण लागू करनी पड़ रही है। सीपीसी ने 30 दिसंबर को 14वीं पंचवर्षीय योजना में नेशनल एजिंग डेवलपमेंट एंड एल्डरली केयर सर्विस सिस्टम का प्रवधान किया था।यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी सिडनी के प्रोफेसर और चीनी मामलों के विशेषज्ञ फेंग चोंगई ने कहा कि इसका एकमात्र कारण है कि अब पैसा नहीं बचा है। स्थानीय सरकारों की आय सीमित है, जबकि व्यय बढ़ रहा है।
चीनी डिजिटल प्लेटफार्म टेंसेंट डाट काम के अनुसार, वर्ष 2013 से ही इस नीति पर काम चल रहा था, लेकिन श्रमिक बलों की भारी नाराजगी के कारण इसके क्रियान्वयन में देरी हुई। फेंग कहते हैं कि सीपीसी की कठोर परिवार नियोजन योजना ने प्राकृतिक जनसंख्या कानून को नष्ट कर दिया। इसने न सिर्फ पुरुषों व महिलाओं की आबादी में गहरी खाई पैदा कर दी, बल्कि देश के सामने श्रम शक्ति का बड़ा संकट भी खड़ा कर दिया। कर्मचारियों को देरी से सेवानिवृत्त करने की नई नीति बेरोजगारी का नया संकट पैदा कर देगी, क्योंकि हर साल लाखों युवा उच्च शिक्षा पाने के बाद भी रोजगार नहीं हासिल कर पाएंगे।चीन की स्टेट काउंसिल ने 21 फरवरी को एलान किया था कि वह सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र धीरे-धीरे बढ़ाने जा रही है। साथ ही उसने यह भी स्वीकार किया था कि देश में बुजुर्गो की आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है। चीन में फिलहाल सेवानिवृत्ति की उम्र पुरुषों के लिए 60 साल, व्हाइट कालर (प्रशासनिक) महिलाओं के लिए 55 वर्ष व सामान्य कामकाजी महिलाओं के लिए 50 साल है।(हि.स.)
बुद्ध की प्रतिमाओं को तोड़ने वाले तालिबानी अब संरक्षण में जुटे, चीनी निवेश का लालच
अफगानिस्तान के बामियान में भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमाओं को तोप से उड़ाने वाले तालिबानी अब बौद्ध प्रतिमाओं का संरक्षण करने में जुटे हैं। तालिबान के पिछले शासन में बुद्ध की प्रतिमाओं को तोड़ा था, इस शासन काल में चीनी निवेश के लालच में अब संरक्षण का दिखावा कर रहे हैं।तालिबान शासन ने मेस अयनाक में जहां बुद्ध की प्रतिमाएं हैं, वहां सैकड़ों मीटर नीचे दुनिया के सबसे बड़े खनिज तांबे के भंडार का अनुमान है। अध्ययन के मुताबिक, यहां एक करोड़ 20 लाख टन खनिज है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बीच नकदी संकट से जूझ रहे देश को उबारने के लिए तालिबान शासक क्षेत्र को राजस्व उगाही का माध्यम बनाना चाहते हैं।
करीब दो दशक पहले जब यही कट्टरपंथी तालिबान सत्ता में थे तब देश में एक विशाल बौद्ध प्रतिमा को ध्वस्त कर दुनिया में कोहराम मचाया था। तालिबान ने प्रतिमाओं को मूर्ति पूजा कहते हुए इन्हें ध्वस्त करना अनिवार्य बताया था। 2008 में हामिद करजई प्रशासन ने मेस अयनाक से तांबा निकालने के लिए चीन के संयुक्त उपक्रम के साथ 30 साल के करार पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन हिंसा के कारण 2014 में चीन पीछे हट गया। अब तालिबान के खान एवं पेट्रोलियम कार्यवाहक मंत्री शाहबुद्दीन दिलावर ने अपने कर्मचारियों से चीन की सरकारी कंपनियों को फिर से बुलाने का आग्रह किया है।(हि.स.)।



