कैबिनेट की मंजूरी, वाराणसी में बनेंगे दो एलिवेटेड कॉरिडोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वाराणसी के लिए दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। लगभग ₹25,446 करोड़ की लागत से गंगा और वरुणा नदी तट पर बनने वाले ये कॉरिडोर शहर में ट्रैफिक जाम कम करेंगे, यात्रा समय घटाएंगे और काशी विश्वनाथ मंदिर, बीएचयू, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों तथा रामनगर पोर्ट तक निर्बाध कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएंगे। परियोजनाएं पूर्वांचल के पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और आर्थिक विकास को नई गति देंगी।
नई दिल्ली/वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में वाराणसी के लिए दो महत्वाकांक्षी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई। इन परियोजनाओं पर कुल 25,445.96 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी।
इनमें गंगा नदी तट पर राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाला 46.039 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर तथा वरुणा नदी तट पर एनएच-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ने वाला 43.218 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर** शामिल है। दोनों परियोजनाएं वाराणसी में ट्रैफिक जाम की समस्या को दूर करने, यात्रा समय घटाने और शहर की मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
गंगा तट पर बनने वाला 46.039 किमी लंबा कॉरिडोर हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (एचएएम) के तहत 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा। इसमें छह लेन का एलिवेटेड मेन कैरिजवे, गंगा पर 910 मीटर लंबा प्रतिष्ठित केबल-स्टे ब्रिज, 1.32 किमी लंबा ट्रैवलेटर युक्त फुट ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड शामिल होंगे। यह कॉरिडोर एनएच-19, वाराणसी रिंग रोड, बीएचयू, रामनगर, काशी विश्वनाथ मंदिर, नमो घाट, वाराणसी के घाटों और रामनगर किले तक तेज एवं निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराएगा।

परियोजना के पूरा होने पर एनएच-19 से शहर के भीतर यात्रा का समय लगभग 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा, जबकि एनएच-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक का सफर 50 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट हो जाएगा। इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा तथा पर्यटन और तीर्थयात्रा को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
इसी तरह, मंत्रिमंडल ने 10,998.32 करोड़ रुपये की लागत से 43.218 किलोमीटर लंबे वरुणा नदी तट एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी दी है। यह कॉरिडोर एनएच-31 और वाराणसी रिंग रोड को जोड़ेगा तथा वाराणसी डीकंजेशन प्लान का प्रमुख हिस्सा होगा। इसमें 6/4 लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर, फ्लाईओवर, रैंप, लूप और सर्विस रोड विकसित किए जाएंगे।
यह परियोजना एनएच-31, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, वाराणसी सिटी स्टेशन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, रामनगर पोर्ट और चंदौली क्षेत्र तक कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। इसके पूरा होने पर एनएच-31 से काशी रेलवे स्टेशन तक यात्रा समय 40 मिनट से घटकर लगभग 20 मिनट रह जाएगा।

दोनों परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप विकसित की जाएंगी। इनके माध्यम से सड़क, रेल, जलमार्ग और हवाई परिवहन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। साथ ही चंदौली एसईजेड, रामनगर इनलैंड वाटरवे पोर्ट, प्रमुख रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट तक पहुंच आसान होगी।
इन परियोजनाओं से वाराणसी में सड़क सुरक्षा बढ़ेगी, वाहनों की परिचालन लागत और प्रदूषण में कमी आएगी, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा तथा पूर्वांचल के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही काशी विश्वनाथ धाम, बीएचयू, नमो घाट, रामनगर किला और गंगा घाटों तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम हो जाएगी।
केंद्र सरकार का मानना है कि गंगा और वरुणा नदी तट पर बनने वाले ये दोनों हाईस्पीड एलिवेटेड कॉरिडोर वाराणसी की यातायात व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाएंगे और शहर को आधुनिक, स्मार्ट एवं विश्वस्तरीय शहरी परिवहन अवसंरचना उपलब्ध कराएंगे।
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