
सपा संरक्षक के निधन पर सभी पार्टियों ने जताया शोक
प्रधानमंत्री गुजरात की जनसभा में बोले- मुलायम सिंह का 'जाना' देश के लिए बड़ी क्षति
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन पर दुख व्यक्त किया और कहा कि उनका जाना देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। गुजरात दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री आज भरूच के आमोद में 8200 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, सांसद सीआर पाटिल, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देने के साथ की। उन्होंने कहा कि आज सुबह मैं यहां आ रहा था तब एक दुखद खबर भी मिली। आज मुलायम सिंह यादव जी का निधन हो गया है। मुलायम सिंह यादव जी का जाना देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।
उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह के साथ उनका विशेष संबंध रहा। जब हम दोनों मुख्यमंत्री के तौर पर मिला करते थे तो अपनत्व का भाव महसूस करते थे। मोदी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव जी का निधन देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। मेरा उनसे खास रिश्ता था। मोदी ने 2014 में मुलायम सिंह से वार्तालाप का स्मरण करते हुए कहा कि 2014 में जब भाजपा ने मुझे प्रधानमंत्री उम्मीदवार घोषित किया, तो मैंने सभी विपक्षी नेताओं से बात की। इसी कड़ी में मुलायम सिंह ने मुझे अपनी सलाह के रूप में अपना आशीर्वाद दिया। वो आज भी भी मेरी अमानत है।मोदी ने कहा कि मुलायम सिंह की विशेषता थी वह घोर राजनीति विरोधी बातों के बीच भी सत्य कहने से हिचकते नहीं थे। उन्होंने 2019 में अंतिम सत्र में संसद में खड़े होकर कहा था- “मोदी जी सबको साथ लेकर चलते हैं इसलिए मुझे पक्का विश्वास है कि वो फिर से चुनकर देश के प्रधानमंत्री बनेंगे।”
मुलायम सिंह ने भारतीय राजनीति का एक स्तंभ बनकर समाज व राष्ट्र की सेवा की: नड्डा
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोमवार को सपा संरक्षक व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय राजनीति का एक स्तंभ बनकर समाज व राष्ट्र की सेवा की।नड्डा ने ट्वीट कर एक शोक संदेश में कहा, “मुलायम सिंह यादव जी का राजनीतिक कौशल अद्भुत था। दशकों तक उन्होंने भारतीय राजनीति का एक स्तंभ बनकर समाज व राष्ट्र की सेवा की। जमीन से जुड़े परिवर्तनकारी,सामाजिक सद्भाव के नेता,आपातकाल में लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्षधर के रूप में वे सदैव याद किए जाएंगे। उनका जाना अपूरणीय क्षति है।”भाजपा अध्यक्ष ने कहा, इस दुःख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और समर्थकों के साथ है। प्रभु उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें, परिजनों व समर्थकों को दुःख सहन करने का सामर्थ्य प्रदान करें।
मुलायम सिंह यादव के निधन पर सोनिया गांधी ने जताया दुख
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन पर दुख प्रकट किया है।सोनिया गांधी ने सोमवार को एक बयान जारी कर कहा कि मुलायम सिंह यादव के निधन की खबर सुनकर वह दुखी हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारों की एक मुखर आवाज आज मौन हो गई है। देश के रक्षा मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में मुलायम सिंह का योगदान सदा अविस्मरणीय रहेगा। उससे कहीं अधिक, शोषितों और वंचितों के लिए उनका संघर्ष सदैव याद किया जाएगा।सोनिया गांधी ने कहा कि देश के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए जब भी जरूरत पड़ी, उनका साथ हमेशा कांग्रेस को मिला है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें। उनके परिवार और समर्थकों के लिए यह अत्यंत दुःख की घड़ी है। सोनिया गांधी ने कहा कि उनकी संवेदनाएं अखिलेश यादव और उनके परिजनों के साथ है।
राहुल गांधी ने भी जताया दुख
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर मुलायम सिंह यादव के निधन पर दुख प्रकट किया है। राहुल ने कहा कि मुलायम सिंह यादव का निधन एक बेहद दुःखद समाचार है। वो जमीनी राजनीति से जुड़े एक सच्चे योद्धा थे। राहुल ने कहा कि वह अखिलेश यादव समेत सभी शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।
गृहमंत्री शाह ने मुलायम सिंह को अस्पताल पहुंच दी श्रद्धांजलि, राजनाथ कल जायेंगे सैफई
केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव के निधन पर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि मुलायम सिंह यादव जी के निधन से उत्तर प्रदेश व राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ी रिक्तता आयी है। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके पुत्र अखिलेश यादव जी व परिजनों से भेंट कर संवेदना व्यक्त की।वहीं रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कल सैफई जाकर नेताजी को श्रद्धांजलि देंगे। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कल 11 अक्टूबर को वे पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव जी को श्रद्धांजलि देने और अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए उत्तर प्रदेश के सैफई में रहेंगे।
इससे पहले अपने शोक संदेश में शाह ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे भारतीय राजनीति के एक युग का अंत बताया था।शाह ने ट्वीट कर शोक संदेश में कहा, “मुलायम सिंह यादव जी अपने अद्वितीय राजनीतिक कौशल से दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहे। आपातकाल में उन्होंने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए बुलंद आवाज उठाई। वह सदैव एक जमीन से जुड़े जननेता के रूप में याद किए जाएँगे। उनका निधन भारतीय राजनीति के एक युग का अंत है। दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनों व समर्थकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। ॐ शांति शांति शांति।”
बंगाल से था मुलायम सिंह यादव का गहरा नाता, ज्योति बसु के थे बेहद खास: किरणमय नंदा
समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा, जिनका संबंध मूलरूप से पश्चिम बंगाल और कोलकाता से रहा है, ने भी मुलायम सिंह और बंगाल के बीच यादों को साझा किया है।
सोमवार को किरणमय नंदा ने कहा है कि नेताजी का संबंध पश्चिम बंगाल से बेहद प्रगाढ़ था। खास तौर पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के दिग्गज नेता ज्योति बसु के साथ उनके संबंधों को याद करते हुए नंदा ने कहा कि दो दशक तक ज्योति बसु और मुलायम सिंह यादव का दोस्ताना संबंध बेहद गहरा रहा। पश्चिम बंगाल में वाम दलों के शासन के दौरान समाजवादी पार्टी वाम मोर्चा गठबंधन की हिस्सा थी। स्वर्गीय ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य दोनों के नेतृत्व में 1991 से 2011 तक 20 वर्ष तक राज्य के मत्स्य मंत्री रहे नंदा ने कहा, ज्योति बसु के साथ मुलायम सिंह यादव का व्यक्तिगत समीकरण बेहद सौहार्दपूर्ण था। उन दोनों की एक दूसरे के प्रति परस्पर प्रशंसा थी, जो कई मौकों पर परिलक्षित होती थी।
नंदा रविवार दोपहर को ही नई दिल्ली से कोलकाता पहुंचे थे और सोमवार को मुलायम सिंह यादव के निधन की खबर मिलते ही वे वापस दिल्ली जाने के लिए स्थानीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे थे। यहीं हवाई अड्डे पर मीडिया से उन्होंने बातचीत की। उन्होंने कहा कि बताया कि मुलायम सिंह यादव के कहने पर समाजवादी पार्टी ने कई मौकों पर कोलकाता में अपना राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया था। 1996 में जब ज्योति बसु को भारत के प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव आया था और माकपा पोलित ब्यूरो ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था तब मुलायम सिंह यादव ने माकपा की तीखी आलोचना की थी।
उल्लेखनीय है कि समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव का सोमवार को गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में सुबह साढ़े आठ बजे के करीब हो गया है। उनके निधन पर दिग्गज राजनेताओं के अलावा उनके समर्थकों का उन्हें श्रद्धांजलि देने का तांता लगा है। इसके साथ ही नेताजी से जुड़ी यादें सोशल मीडिया पर लोग साझा कर रहे हैं।
अकाली नेता रामूवालिया को जेल मंत्री बनाने के ‘मुलायम’ फैसले से सब रह गए थे भौचक्के
नेता जी के नाम से जाने जाने वाले मुलायम सिंह का निधन होने के बाद उनके सियासी सफर से जुड़ीं कई महत्वपूर्ण घटनाएं भी याद की जा रही हैं। ऐसी ही एक अहम घटना की कड़ी पंजाब से भी जुड़ी हुई है।बात साल 2015 की है। उस समय उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार थी। उस समय अचानक मुलायम सिंह ने पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (बादल) के दिग्गज नेता बलवंत सिंह रामूवालिया को बुलाकर रातों-रात उत्तर प्रदेश का जेल मंत्री घोषित कर दिया था। उनके इस फैसले से हर कोई हैरान था और इस फैसले ने उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पंजाब की सियासत में भी भूचाल ला दिया था।
जेल मंत्री बनते वक्त रामूवालिया ने इसके पीछे की वजह समाजवादी पार्टी से लंबा जुड़ाव होना बताया था। उन्होंने कहा था कि सपा ने उनका 1996 में राज्यसभा सदस्य के रूप में भरपूर समर्थन किया था। इसलिए नेता जी का फोन आने के बाद वे उनके इस प्रस्ताव को नकार नहीं सके लेकिन जेल मंत्री बनने के बाद रामूवालिया ने धीरे-धीरे अपनी ही सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया। उनके आरोप थे कि उनके विभाग में कैदियों को पैरोल देने के लिए 50-50 हज़ार रुपये घूस ली जाती है।
उन्होंने जेल में भ्रष्टाचार और जेल अधिकारियों पर कामचोरी का आरोप लगाया था। इसी बात से परेशान होकर रामूवालिया ने वापस पंजाब की सियासत में जाने का भी निर्णय ले लिया था। इसी साल हुए विधानसभा चुनाव से पहले रामूवालिया पंजाब आ गए। वह 1996 में शिरोमणि अकाली दल (बादल) में विलय हुई अपनी लोक भलाई पार्टी को रिलान्च करने की तैयारी में जुट गए।
दरअसल, नेता जी के इस फैसले के पीछे बहुत बड़ी वजह थी। यूपी के तराई वाले इलाके में सिख वोटर चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। उस समय शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने उत्तर प्रदेश में 35 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया था। इसके लिए पार्टी ने यूपी के लिए अपने सात इंचार्ज भी नियुक्त किए थे। अकाली दल के इसी फैसले को पलटने के लिए नेता जी ने रामूवालिया को उत्तर प्रदेश की सियासत में कैबिनेट मंत्री बनाया था।
उधर यूं अचानक पंजाब से उठकर उत्तर प्रदेश चले जाने के बाद अकाली दल ने रामूवालिया को अपनी कोर कमेटी की सदस्यता से निकाल दिया था। उनकी बेटी अमनजोत कौर को भी मोहाली प्लानिंग बोर्ड की चेयरपर्सन से हटा दिया गया था। इसके बाद 2021 में अमनजोत कौर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं।(हि.स.)।



