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भारत को ताइक्वांडो में ओलंपिक पदक जीतते हुए देखना चाहूंगा : अहन

नयी दिल्ली : कोरिया राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय के चांसलर योंग-ग्यू अहन ने शुक्रवार को कहा कि वह निकट भविष्य में किसी भारतीय ताइक्वांडो एथलीट को ओलंपिक में पदक जीतते हुए देखना चाहेंगे।श्री अहन ने भारतीय इंटर साई ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2023 के आज उद्घाटन के मौके पर कहा, “ यह आयोजन भारत में ताइक्वांडो के विकास के साथ-साथ कोरिया और भारत के सांस्कृतिक आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एक भारतीय ताइक्वांडो एथलीट को निकट भविष्य में ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक प्राप्त करते हुए देखना बहुत अच्छा होगा। मुझे आशा है कि इस आयोजन के जरिये ताइक्वांडो एक मार्शल आर्ट खेल के रूप में भारत के लोगों दिलों में उतर सकेगा।”

केंद्रीय खेल मंत्रालय और कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र के तत्वावधान में आयोजित अखिल भारतीय इंटर साई ताइक्वांडो चैंपियनशिप 2023 की शुरुआत भव्य कार्यक्रम के साथ यहां इंदिरा गांधी स्टेडियम में हुई। इस आयोजन में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के 21 केंद्रों से कुल 265 महिला एवं पुरुष एथलीट भाग ले रहे हैं। इस तीन-दिवसीय टूर्नामेंट का आयोजन भारत-कोरिया राजनयिक संबंधों के 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।उद्घाटन समारोह में श्री अहन के अलावा खेल सचिव सुजाता चतुर्वेदी, साई के महानिदेशक संदीप प्रधान, भारत में कोरियाई राजदूत चांग जे बोक और कोरियाई विदेश मंत्रालय के सार्वजनिक कूटनीति के राजदूत सांग-ह्वा ली उपस्थित रहे।अब तक कुल 126 ओलंपिक पदक हासिल करने वाले कोरिया राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस अवसर पर अपनी कला का प्रदर्शन करके यहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। साथ ही मल्लखंब और पारंपरिक नृत्य सहित कई भारतीय विधाओं का भी मनमोहक प्रदर्शन किया गया।

उद्घाटन समारोह के बाद कोरिया राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसके तहत पहली परियोजना के रूप में कोरिया से भेजे गये प्रोफेसर इस वर्ष की पहली छमाही से मिरांडा हाउस में ताइक्वांडो की कक्षाएं आयोजित करेंगे।कोरियाई सांस्कृतिक केंद्र, भारत के निदेशक ह्वांग इल योंग ने कहा, “युवा और नारी शक्ति, विकास और गौरव की ओर अग्रसर हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय का मिरांडा हाउस इन दोनों बातों को अपने मूल में समेटे हुए है। मुझे उम्मीद है कि आज का पहला महत्वपूर्ण कदम भारत और कोरिया में कॉलेजों और संस्थानों के विस्तार और भारत एवं कोरिया के बेहतर विकास के साथ-साथ हमारी दोस्ती की सीढ़ी बनेगा।”इस चैंपियनशिप में कैडेट (अंडर-14), जूनियर (अंडर-17) और सीनियर आयु वर्ग में मुकाबला होगा। प्रतियोगिता को पूमसे और क्योरुगी सहित दो भागों में बांटा गया है।

विश्व क्योरुगी श्रेणी को को तायक्वोंडो महासंघ के प्रतियोगिता नियमों (खिलाड़ियों की उम्र और वजन) के अनुसार विभाजित किया गया है, जबकि पूमसे डिवीजन को केवल पुरुषों और महिलाओं के आधार पर विभाजित किया गया है।प्रत्येक श्रेणी में स्वर्ण पदक जीतने वाले प्रतियोगियों को कोरियाई सरकार के समर्थन से कोरिया राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय में सर्वश्रेष्ठ प्रोफेसरों से लगभग तीन सप्ताह के लिये प्रशिक्षण हासिल करने का मौका मिलेगा।(वार्ता)

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