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लाल किले पर तिरंगा रैली में देशवासियों के उत्साह की दिखी झलक

नयी दिल्ली : देश के 77वें स्वतंत्रता दिवस पर मंगलवार को लाल किले के पथ पर निकाली गई तिरंगा रैली में देशवासियों के उत्साह की झलक दिखी वहीं उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण से उपस्थित जनसमूह को मोहित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

प्रधानमंत्री अपने दमदार भाषण के साथ-साथ अपनी वेशभूषा और पगड़ी से भी देशवासियों का दिल जीतते रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजस्थान की विशेष बांधनी शैली की पगड़ी कॉलर और कफ वाला सफेद रंग का लंबा कुर्ता, चूड़ीदार पायजामा और काले रंग की वी गले वाली जैकेट पहन कर ध्वजारोहण किया।

श्री मोदी ने करीब 93 मिनट के अपने भाषण में देश की 140 करोड़ जनता को परिवार कहकर बार-बार सम्बोधित किया। उन्होंने देश की जनता पर विश्वास जताते हुए अगले वर्ष फिर से लाल किले की प्राचीर से अपने सम्बोधन की बात कही। उन्होंने कहा, “मैं आज आपसे मदद और आशीर्वाद मांगने आया हूं। अभी जिन योजनाओं के शिलान्यास कर रहा हूं उसका उद्घाटन भी मै ही करूंगा। अगले साल 15 अगस्त पर फिर आउंगा।”

इस बार स्वतंत्रता दिवस पर विभिन्न प्रदेशों से आये आंगतुक अपनी पारंपरिक वेशभूषा में देखे गये। समारोह के दौरान वायुसेना के दो हेलीकाप्टरों ने दर्शकों पर पुष्प वर्षा की जिसे देखकर दर्शकों के पूरे हुजूम ने जोश के साथ भारत माता की जय का नारा लगाया।

लाल किले पर आयोजित समारोह का हिस्सा बनने के लिए देश भर से विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लगभग 1,800 लोगों को उनके जीवनसाथी के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। यह पहल सरकार के ‘जनभागीदारी’ दृष्टिकोण के अनुरूप की गई है। इन विशिष्ट अतिथियों में 660 से अधिक जीवंत गांवों के 400 से अधिक सरपंच, किसान उत्पादक संगठन योजना से जुड़े 250 लोग, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के 50-50 प्रतिभागी, नये संसद भवन सहित सेंट्रल विस्टा परियोजना से जुड़े 50 श्रम योगी (निर्माण श्रमिक), 50-50 खादी कार्यकर्ता, सीमा पर स्थित सड़कों के निर्माण, अमृत सरोवर और हर घर जल योजना से जुड़े लोगों के साथ-साथ 50-50 प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक, नर्स और मछुआरे शामिल हैं। इनमें से कुछ विशिष्ट अतिथियों का दिल्ली में अपने प्रवास के दौरान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का दौरा करने और रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट से मुलाकात करने का कार्यक्रम है। प्रत्येक राज्य और केन्द्र-शासित प्रदेश से पचहत्तर दंपत्तियों को भी उनकी पारंपरिक पोशाक में लाल किले में आयोजित समारोह को देखने के लिए आमंत्रित किया गया है।

इस बार लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने कई योजनाओं की घोषणा की। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि अगले महीने विश्वकर्मा जयंती पर 15 हजार करोड़ की विश्वकर्मा योजना की होगी शुरुआत की जायेगी। इसी के साथ उन्होंने शहरों में रिण लेकर घर बनाने वाले लोगों को ब्याज में छूट की योजना देने घोषणा की।प्रधानमंत्री अपना सम्बोधन समाप्त करने के बाद अपनी पुरानी परंपरा के अनुसार बच्चे से मिलने भी गये।

स्वतंत्रता दिवस पर आज आसमान में छाए बादलों ने दर्शकों और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को अपनी छाया से सूरज की तेज धूप से बचाए रखा, हालांकि प्रधानमंत्री के सम्बोधन के कुछ देर सूर्य देवता के उदय होने से हुई गर्मी के बावजूद वहां मौजूद लोगों के उत्साह कमी नहीं आयी और लोग तौलिये से पसीना पोंछते और पानी पीते हुए उनकी आकर्षक घोषणाओं पर ताली बजाते रहे।

यह श्री मोदी के दूसरे कार्यकाल का लाल किले से आखिरी सम्बोधन था। इस बार के भाषणा में श्री मोदी ने कहा “ मेरे परिवारजनों ,मैं आपके बीच से आया हूं। मैं आपके लिए जीता हूं और पसीना भी आप के लिए बहाता हूं।”इस बार दर्शकदीर्घा में पीछे की ओर स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों में उनके वीरता और अंग्रेजों द्वारा उनके दमन को दर्शया गया हुआ था। इसमें देश भर में आजादी के लिए हुए संघर्षो और उसके प्राचीन गौरव की गाथा को आकर्षक तरीके से व्यक्त किया गया था।

प्रधानमंत्री ने युवाओं पर भरोसा जताते हुए कहा, “वर्ष 2047 में जब देश आजादी के 100वीं वर्षगांठ मनाएगा तब दुनिया में हमारा झंडा विकसित भारत का झंडा होना चाहिए। इसके लिए हमें भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ लड़ना होगा।”उन्होंने विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि ये नया भारत है,आत्मविश्वास से भरा हुआ भारत है, ये संकल्पों को चरितार्थ करने के लिए जी-जान से जुटा हुआ भारत है। इसलिए ये भारत न रुकता है, न थकता है, न हांफता है और न ही ये भारत हारता है।

लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन समाप्त होने के बाद छोड़े गये तिरंगे गुब्बारों को दर्शक देर तक निहारते देखे गये।

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