नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के आरोप में गिरफ्तार केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की जमानत याचिका पर सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया।मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार को नोटिस जारी लिखित जवाब दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा कि वह मामले को निपटाने के लिए09 सितंबर को अंतिम सुनवाई करेगी।
उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 वर्षीया एक दलित लड़की के साथ दुष्कर्म और हत्या के बाद पत्रकार कप्पन एवं अन्य हाथरस आ रहे थे, इसी दौरान 05 अक्टूबर 2020 को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।जमानत याचिका पर बहस के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा, “मैं (कप्पन) एक पत्रकार हूं, मैंने एक ऐसे संगठन के लिए काम किया, जिसका पीएफआई से संबंध था। मैं अब वहां काम नहीं कर रहा हूं। उन्होंने मुझे यह कहते हुए गिरफ्तार कर लिया कि मैं हाथरस क्यों गया।”वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार सरकार के वकील ने कहा कि इस मामले में कुल आठ आरोपी थे। आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति दिल्ली दंगों और दूसरा बुलंदशहर दंगों का भी आरोपी है। अदालत ने कहा कि सरकार को जो भी कहना है, लिखित रूप में दाखिल करें।इस पर श्री सिब्बल ने कहा कि 5000 पन्नों की आरोप पत्र दाखिल की गई है, लेकिन उन्हें केवल 165 पन्नों की ही आरोप पत्र तामील की गई।आरोपी पत्रकार कप्पन ने वकील हारिस बीरन के माध्यम से दायर अपनी याचिका में कहा है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने इस महीने 02 अगस्त को जमानत की याचिका खारिज कर दी थी।
याचिका खारिज होने के कारण वह, “एक महत्वपूर्ण अधिकार से वंचित हो गया।”याचिका में दावा किया गया है कि याचिकाकर्ता को झूठे आरोपों के आधार पर लगभग दो सालों से जेल में बंद रखा गया हैं। याचिकाकर्ता हाथरस दुष्कर्म और हत्या के मामले में रिपोर्टिंग के अपने पेशेवर कर्तव्य का निर्वहन करने की मांग की थी।(वार्ता)



