
नई दिल्ली । भाजपा से नाता तोड़कर अभी तक के अपने धुर विरोधी राजद के साथ मिलकर बिहार की सत्ता संभालने वाले नीतीश कुमार के लिए दिल्ली अभी दूर है। यह दावा एस्ट्रोकोच मृत्युंजय शर्मा ने किया है। एस्ट्रोकोच मृत्युंजय शर्मा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुंडली का अध्ययन करने के बाद रविवार को बताया कि नीतीश का जन्म मिथुन लग्न में हुआ है। इसके प्रभाव से उनके मन में असमंजस की स्थिति बनी रहेगी।
नीतीश की कुंडली में साल 2011 से राहु की महादशा शुरू हुई है। इसके बाद से उनकी लोकप्रियता में कमी आना शुरू हो गया। उनकी कुंडली में नवम भाव में राहु गुरु के साथ युति करके गुरु-चांडाल योग बना रहा है, जो इस समय प्रभावी है। परिणामस्वरूप इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। कुंडली के अनुसार नीतीश के लिए अभी दिल्ली बहुत दूर है। उन्होंने बताया कि जून 2023 में नीतीश की कुंडली में राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा शुरू होगी।
यदि राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो कुंडली में शुक्र के प्रभाव से मालव्य राजयोग बनेगा, लेकिन जब तक मई 2024 में लोकसभा चुनाव का समय होगा, उस समय गोचर में शुक्र अस्त रहेगा, इसलिए मालव्य राजयोग का परिणाम उन्हें नहीं मिल सकेगा। उस समय गुरु भी अस्त रहेंगे। ऐसे में नीतीश के ग्रहों के चलते उनके प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद कम ही है।
उन्होंने बताया कि नीतीश की कुंडली में राहु की महादशा में जून 2023 तक केतु की अंतर्दशा बनी हुई है। केतु की दशा के चलते उन्हें मानसिक उलझन, असहजता बनी रहेगी और इस महादशा के समाप्त होते ही उनका मन फिर बदल सकता है। एस्ट्रोकोच शर्मा ने बताया कि नीतीश की कुंडली में राहु और सूर्य की युति भी है। उन्होंने दावा किया कि राहु और सूर्य की युति में व्यक्ति ऊंचे ख्वाब देखता है और सपना एक दिन टूट जाता है।
ग्रहों के अनुसार उनका सबसे भरोसेमंद करीबी धोखा दे सकता है। वर्ष 2011 से पहले तक उनकी कुंडली में मंगल दशम भाव में पावरफुल था और उसको शनि चौथे घर से देख रहा था। इससे उन्हें जनता के प्यार के साथ नाम और ख्याति मिली।(हि.स.)



