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भगवान जगन्नाथ प्रभु की निकली डोली यात्रा, मनफेर के लिए पहुंचे ससुराल

रथयात्रा मेले का आगाज.प्रभु के डोली पर पूरे राह पुष्पवर्षा, द्वारकाधीश मंदिर के पास उतारी गई आरती

वाराणसी । ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भक्तों के प्रेम में अत्यधिक स्नान के बाद एक पखवाड़े तक बीमार हुए भगवान जगन्नाथ स्वस्थ होते ही दूसरे दिन गुरूवार की शाम मनफेर के लिए बड़े भाई बलराम,बहन सुभद्रा के साथ प्रतीक रूप से ससुराल की सैर पर डोली से निकल पड़े। इसी के साथ काशी के लक्खा मेले में शुमार लगभग 220 साल पुराने रथयात्रा मेले का आगाज हो गया।

परम्परानुसार अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ के मंदिर का पट सुबह पांच बजे खुल गया। सुबह 5.30 बजे मंदिर के पुजारी पं राधेश्याम पाण्डेय के अगुवाई में मंगला आरती हुई। सुबह आठ बजे दूध का नैवेद्य, फिर महानैवेद्य का भोग लगाया गया। इसके बाद दोपहर 12 से अपराह्न तीन बजे तक मंदिर के पट बंद रहे। अपरान्ह तीन बजे पट खुलते ही प्रभु की कपूर आरती हुई, जिसमें ट्रस्ट श्री जगन्नाथ के सचिव शापुरी परिवार ने भी हिस्सेदारी की। फिर 3.30 पर प्रभु और उनके भाई बहन के विग्रह का डोली श्रृंगार हुआ।

ठीक शाम चार बजे तीनों विग्रह को गाजे बाजे मंगल ध्वनि के बीच डोली पर विराजमान कराया गया। डोली को आगे पीछे कर चार-चार कहारों ने उठाया। इसी के साथ भगवान की डोली यात्रा निकल पड़ी। भगवान की डोली को कांधा देने के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। वृन्दावन विहारी लाल की जय हर हर महादेव के उद्घोष से फिजा गुजांयमान हो गया।

डोली यात्रा जगन्नाथ मंदिर से परम्परागत मार्ग दुर्गाकुण्ड, नबाबगंज खोजवां, शंकुलधारा स्थित द्वारकाधीश मंदिर पर पहुंची। यहां भगवान के विग्रह की आरती उतारी गई। यहां से डोली यात्रा कमच्छा, बैजनत्था होते हुए रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग शापुरी भवन पंहुची। यहां पुजारियों और शापुरी परिवार के वरिष्ठ सदस्य दीपक शापुरी आलोक शापुरी ने डोली यात्रा और उसमें शामिल साधु सन्तों स्वयं सेवकों, पुजारियों, नागरिकों का स्वागत कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। यहां प्रभु अपने परिवार के साथ कुछ समय के लिए विश्राम करेंगे । फिर रात में ही भगवान को रथारूढ़ कर रथयात्रा स्थित मेला क्षेत्र में पहुंचाया जायेगा।

शुक्रवार भोर में श्रृंगार व मंगला आरती होने के बाद रथारूढ़ प्रभु जगन्नाथ मंदिर के पट भक्तजनों के लिए खुल जाएगा। गौरतलब हो कि ज्येष्ठ माह की भीषण गर्मी से रात दिलाने के लिए श्रद्धालुओं ने ज्येष्ठ पूर्णिमा पर प्रभु का जमकर जलाभिषेक किया। इससे भगवान अस्वस्थ हो गए और 15 दिन तक आराम किया। आयुर्वेदिक काढ़े की तासीर से स्वस्थ होने पर बुधवार को प्रतीक रूप से उन्हें पथ्य के रूप में परवल का जूस दिया गया। मंदिर से डोली यात्रा निकलने के पहले क्षेत्रीय महिलाओं ने सोहर और गीत भी गाया।

अष्टकोणीय रथ की उतारी गई आरती

भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा स्थित बेनीराम बाग पहुंचने के साथ ही चौराहे के पास भोर में ही लाये गये अष्टकोणीय रथ की आरती उतारी गई। शुक्रवार से शुरू तीन दिनी उत्सव के दौरान प्रभु, भइया बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ इस रथ पर ही विराजेंगे।(हि.स.)

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