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कोरोना के खिलाफ जंग में चिकित्सा क्षेत्र ने झोंकी पूरी ताकत

कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहे देश में पिछले साल से लेकर अब तक चिकित्सा के क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं में बड़ा उछाल देखने को मिला है, फिर चाहे अस्पताल या डॉक्टर हो या फिर चिकित्सीय उपकरण हो। खास तौर पर सरकार ने, इतने कम समय में बुनियादी सुविधाओं के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी है। महामारी से इस जंग में कई त्वरित महत्वपूर्ण फैसले लिए, जिसकी वजह हम इस जंग में लड़ पा रहे हैं। आइसोलेशन बेड, ICU बेड या लैब सरकार ने सभी की संख्या को तीव्र गति से बढ़ाया है।

स्वास्थ्य सुविधाओं का हुआ तेजी से विकास:

कोविड टेस्टिंग लैब

कोविड जांच और स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर पर गौर करें तो कोरोना से जांच के लिए सबसे जरूरी लैब है, जो पिछले साल जब देश में कोरोना वायरस अपनी रफ्तार पकड़ रहा था, तब देश में सिर्फ एक लैब थी, जो पुणे में थी। लेकिन आज कोविड जांच करने वाली प्रयोगशालाओं की संख्या 2,449, जिसमें से 1,230 सरकारी प्रयोगशालाएं और 1,219 निजी प्रयोगशालाएं हैं।

कोविड समर्पित अस्पताल

देश ने कोविड महामारी के प्रबंधन के लिए अस्पतालों के बुनियादी ढांचों में काफी सुधार किया गया। अप्रैल में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिए आंकड़ों के मुताबिक देश में 2084 कोविड समर्पित अस्पताल (केंद्र: 89 और राज्य: 1995) कुल 4,68,974 कोविड बिस्तरों के साथ स्थापित किए गए। इन बिस्तरों में से 2,63,573 विशेष रूप से अलग बिस्तर, 50,408 आईसीयू बिस्तर और 1,54,993 ऑक्सीजन सुविधा वाले बिस्तर शामिल हैं।

कोविड के इलाज के लिए विशेष रूप से 4043 (केंद्र: 85 और राज्यों: 3,958) स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए। इनमें कुल 3,57,096 बिस्तर हैं, जिनमें से 2,31,462 आइसोलेशन बिस्तर, 25,459 आईसीयू बिस्तर और 1,00,175 ऑक्सीजन सुविधा वाले बिस्तर लगाए गए। कुल 12,673 क्वारंटाइन केंद्र और 9313 कोविड देखभाल केंद्र स्थापित किए गए, जिनमें 9,421 बिल्कुल अलग रखे जाने वाले बिस्तर हैं।

12 नए एम्स में बढ़ाए गए आईसीयू बेड

देश के अलग-अलग हिस्सों में 12 नए एम्स में 1,300 से अधिक ऑक्सीजन बेड, 530 आईसीयू बेड की व्यवस्था की गई है, जिसकी वजह से लोगों के लिए उपलब्ध ऑक्सीजन और आईसीयू बेड की वर्तमान उपलब्धता क्रमशः 1,925 और 908 हो गई है।

राज्य भी अपने स्तर पर कर रहे तैयारी

>राज्य भी अपने स्तर पर हर हर मरीज को समुचित इलाज देने के की कोशिश में लगे हैं। इसी क्रम में अब कोविड मरीजों के इलाज के लिए यूपी सरकार एमबीबीएस फाइनल ईयर के छात्रों की भी सेवा ले रही है। ऐसे छात्र न सिर्फ कोविड केयर सेंटरों में मरीजों की देख-रेख कर रहे हैं बल्कि टेली-परामर्श जैसी सेवाएं भी प्रदान कर रहे हैं। संकट की इस घड़ी में सारथी बने मेडिकल के ये छात्र भी खुशी से अपनी सेवा दे रहे हैं। बता दें कि कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने निर्देश जारी किया कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें एमबीबीएस के फाइनल ईयर के छात्रों को कोविड मामलों की निगरानी और उनकी सेवाओं देने के लिए प्रोत्साहित करें, ताकि कोरोना वॉरियर्स की ये नई फोर्स कोरोना से जंग जीतने में मदद कर सकें।

>वहीं तेलंगाना सरकार ने राज्य में ‘फीवर सर्वे’ अभियान शुरू किया है। फीवर सर्वे अभियान देश में अपनी तरह का पहला सर्वेक्षण अभियान है, इसका उद्देश्य संक्रमित मरीजों का घर पर ही बुखार या कोविड-19 के लक्षण वाले लोगों की पहचान करना है। डोर टू डोर सर्वेक्षण में एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और स्वच्छता कर्मचारी शामिल हैं। अगर परिवार के किसी सदस्य को बुखार या कोविड के लक्षण हैं तो टीम उन्हें मौके पर ही दवाओं की एक किट प्रदान करती हैं और घर में आइसोलेट होने की सलाह देती है।

>बिहार सरकार ने भी हाल ही में होम आइसोलेटेड मरीजों की देखरेख के लिए ‘हिट-कोविड’ ऐप तैयार किया है। इसके जरिए, घर में रह कर इलाज करा रहे मरीजों को चिकित्सा सुविधा मिलेगी। इससे एक डेटाबेस भी तैयार हो जाएगा, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों को होम आइसोलेशन में गए, रोगियों के स्वास्थ्य की स्थिति पर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।

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