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विदेशों में शोध कर रहे अप्रवासी भारतीयों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने उठाए कई कदम

अब तक हम प्रतिभा के पलायन को रोकने की बात करते थे, लेकिन अब बात होगी ऐसी प्रतिभाओं को वापस भारत लाने की, जो इस वक्त विदेश में हैं। जी हां दुनिया के अलग-अलग देशों में शोध व तकनीकी की क्षेत्र में कार्यरत लोगों को भारत में ही शोध के लिए सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। केंद्र सरकार ने गत तीन वर्षों के दौरान अप्रवासी भारतीय (एन.आर.आई.) अनुसंधान अध्येताओं को भारतीय संस्थाओं में अपनी शोध और अनुसंधान शिक्षा को पूरा करने हेतु आकृषित करने के लिए कई प्रयास किए हैं। इस बाबत मंगलवार को लोकसभा में पूछे गए लिखित सवाल के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जानकारी दी कि सरकार न केवल देश में प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से पास होने वाले छात्रों को रोकने के लिए बल्कि अप्रवासी भारतीयों को भी देश में वापस आकर्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार द्वारा देश के विभिन्न संस्थानों में कार्य किए जा रहे हैं।

प्रधान मंत्री अनुसंधान फैलोशिप योजना के तहत पीएचडी करने के लिए दी जा रही फेलोशिप

उन्होंने जानकारी दी कि प्रधान मंत्री अनुसंधान फैलोशिप योजना के तहत, भारतीय संस्थानों में पीएचडी करने के लिए चयनित छात्रों को आकर्षक फेलोशिप प्रदान की जाती है।

आई.आई.टी में ये कार्य जारी

सरकार ने आई.आई.टी.- मद्रास, बॉम्बे, खड़गपुर, कानपुर, दिल्ली, गुवाहाटी, हैदराबाद, गांधीनगर और आईआईएससी बैंगलोर में अनुसंधान पार्कों की स्थापना को मंजूरी दे दी है ताकि देश में अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र संवर्धन किया जाए। इससे छात्रों को भारत में अपने अनुसंधान और विकास हितों को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाया जा सकेगा।

आईआईटी – ऊष्मायन केंद्र (आईसी) कर रहा यह काम

आईआईटी – ऊष्मायन केंद्र (आईसी) का उद्देश्य अपने शुरुआती चरण के माध्यम से प्रौद्योगिकी और ज्ञान आधारित उपक्रमों का पोषण करना है, जिससे उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी बाजार में बने रहने में मदद मिल सके और वे ऐसे स्तर तक पहुंच सकें, जहां वे अपने उपक्रमों को आगे उन्नत कर सकते हैं।

आईआईएम अपने छात्रों को देश में शोध करने के लिए कर रहा प्रोत्साहित

वहीं आईआईएम अपने छात्रों को स्टार्ट-अप स्थापित करने, शिक्षण या उद्योग में काम करने और देश में शोध करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इस मंत्रालय ने एकेडमिक नेटवर्क के लिए ग्लोबल इनिशिएटिव (जीआईएएन) भी शुरू किया था, जिसका उद्देश्य देश के मौजूदा शैक्षणिक संसाधनों को बढ़ाने के लिए भारतीय मूल के लोगों सहित विदेशों के वैज्ञानिकों और उद्यमियों की प्रतिभा का लाभ उठाना है। सभी आईआईएम में प्रबंधन के क्षेत्र में शोध करने के लिए एनआरआई छात्रों सहित छात्रों को सक्षम करने के लिए पीएचडी कार्यक्रम या प्रबंधन में अध्येता (एफपीएम) कार्यक्रम हैं।

गौरतलब है कि सिंतबर 2020 में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा था कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य 21वीं सदी में भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नई शिक्षा नीति में भारत में शीर्ष अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के परिसर खोलने के लिए अनुमति दी गई है जिससे प्रतिभा पलायन की समस्या से निपटा जा सकेगा।

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