केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण शिक्षा के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जा सकता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री सोमवार को महिला कुलपतियों, प्रोफेसरों एवं शिक्षिकाओं को संबोधित कर रहे थे।
समाज के उत्थान में महिलाओं की भूमिका असीमित
उन्होंने कहा कि महिलाएं राष्ट्र की पुरोधा होती हैं और वे सतत विकास और जीवन की गुणवत्ता की कुंजी हैं। किसी भी समाज के उत्थान में महिलाओं की भूमिका असीमित होती है। सभी क्षेत्रों में उनका अमूल्य योगदान होता है। उन्होंने रानी लक्ष्मी बाई, उदा देवी, सरोजिनी नायडू, लक्ष्मी सहगल जैसी महिलाओं का उदहारण देते हुए कहा कि हमारे देश में महिलाओं ने सभी सामाजिक बन्धनों को तोड़ते हुए खुद को राष्ट्र के लिए समर्पित किया जो हमारे लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा, “शिक्षा मंत्रालय प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में महिलाओं को उच्च शिक्षा तक व्यापक पहुंच प्रदान करने के लिए अथक प्रयास कर रहा है। रूसा के तहत, हम राज्य सरकारों को मौजूदा स्वायत्त कॉलेजों के उन्नयन के माध्यम से या कॉलेजों के क्लस्टरिंग के माध्यम से, विश्वविद्यालयों के निर्माण में सहायता प्रदान कर, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समानता, पहुंच एवं गुणवत्ता को प्रोत्साहित कर रहे हैं।”
159 महिला अध्ययन केंद्रों की स्थापना
पोखरियाल ने यह भी बताया कि भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भारतीय अध्ययन के विकास के तहत यूजीसी ने शिक्षण, अनुसंधान और फील्ड एक्शन के माध्यम से महिला अध्ययन के विस्तार के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 159 महिला अध्ययन केंद्रों की स्थापना की है। इसके अलावा उन्होनें महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में भी बताया।
महिला सकल नामांकन अनुपात वर्ष 2013-14 में 22.0 से बढ़कर 2018-19 में 26.4 हो गया
उन्होंने महिला नामांकन अनुपात के बारे में बात करते हुए कहा कि महिला सकल नामांकन अनुपात वर्ष 2013-14 में 22.0 से बढ़कर 2018-19 में 26.4 हो गया है। इन सबके अलावा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में भी बात की जिसमें उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए एवं उन्हें गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करने के लिए की गई सिफारिशों के बारे में विस्तार से बताया।
इस कार्यक्रम में शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल, उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे, यूजीसी अध्यक्ष प्रो डी पी सिंह, यूजीसी सचिव प्रो रजनीश जैन, संयुक्त सचिव डॉ अर्चना ठाकुर, जामिया मिलिया इस्लामिया की वाईस चांसलर प्रो नजमा अख्तर, बी पी एस महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुषमा यादव, एमिटी यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो बलविंदर शुक्ला, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेस की निदेशक प्रो शालिनी भरत एवं कई छात्राओं ने हिस्सा लिया।



