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गांवों में रोजगार व पैसा नहीं होंगे, तब तक कृषि आगे नहीं बढ़ेगी-केंद्रीय मंत्री

कृषि मंत्री ने कहा-कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र की मजबूती व प्रगति पर भारत सरकार का पूरा ध्यान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने गुरुवार को कहा कि कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र की मजबूती व प्रगति पर भारत सरकार का पूरा ध्यान है। इसके लिए अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं व कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जो छोटे किसानों के लिए बहुत लाभकारी हैं। दरअसल कृषि मंत्री ने गुरुवार को एशिया पैसिफिक रूरल एंड एग्रीकल्चर क्रेडिट एसोसिएशन (अप्राका) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण बैंक (नाबार्ड) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘क्षेत्रीय नीति फोरम’ की बैठक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि व गांव आधारित है, जिसकी तरक्की के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार कोशिश कर रहे हैं।

नए सिस्टम में पारदर्शिता से बिचौलिए हुए खत्म

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भली-भांति जानती है कि जब तक गांवों में रोजगार व पैसा नहीं होंगे, तब तक कृषि आगे नहीं बढ़ेगी। पीएम मोदी ने इसी कड़ी में जन-धन खातों की योजना प्रारंभ की, उनके प्रयास स्वरूप करोड़ों लोगों को बैंकिंग संपर्क में लाया गया। इस नए सिस्टम में पारदर्शिता है और बिचौलिए खत्म हुए है। वहीं लीकेज बचत में बदल गई है।

6,865 करोड़ रुपये खर्च कर 10 हजार नए एफपीओ

इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों द्वारा महामारी से निपटने के लिए की गई पहलों, विशेष रूप से ग्रामीण गरीबों पर महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए उठाए गए उपायों की सराहना की। उन्होंने फोरम को सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान की जानकारी दी, जिसमें विशेष रूप से किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) पर ध्यान केंद्रित किया गया है। 6,865 करोड़ रुपये खर्च कर 10 हजार नए एफपीओ बनाए जा रहे हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम- किसान) योजना में लगभग पौने 11 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 1.15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जमा कराई गई हैं।

तोमर ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न पैकेजों के क्रियान्वयन का काम चल रहा है, जिससे कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के विकास को बल मिलेगा। इसमें कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक के पैकेज दिए गए हैं। कानूनी सुधार के माध्यम से भी कृषि क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद है और इस दिशा में सरकार पूरे मनोयोग से काम कर रही है।

क्या है अप्राका

बता दें कि एशिया पैसिफिक रूरल एंड एग्रीकल्चर क्रेडिट एसोसिएशन (अप्राका) 24 देशों का संघ है। भारत, अप्राका के 16 संस्थापक सदस्य देशों में एक है। तत्कालीन कृषि सचिव जीवी के राव अप्राका के पहले अध्यक्ष थे व नाबार्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वाई.सी. नंदा 1999 से 2001 तक अप्राका अध्यक्ष रहे। नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. जी.आर. चिंतला जल्द ही अप्राका के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे। अप्राका में 24 देशों के केंद्रीय बैंक, नियामक प्राधिकरण, एआरडीबी, सहकारी बैंक महासंघ, वाणिज्यिक बैंक, कृषि वित्त से जुड़ी सरकारी एजेंसियां आदि 87 संस्थाएं सदस्य है। अप्राका का उद्देश्य विभिन्न विकासात्मक बैंकों, केंद्रीय बैंकों, कृषि व ग्रामीण विकास से जुड़ी अन्य एजेंसियों में कृषि को बढ़ावा देने के लिए बेहतर समझ, क्रॉस लर्निंग व सहयोग विकसित करना हैं।

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