
दुद्धी-मकर संक्रान्ति पर्व पर क्षेत्र के कनहर एवं ठेमा नदी के संगम तट पर लगने वाले पारम्परिक मेले में इस कोरोना संक्रमण केे बावजूद भारी भीड़ रही।इस बार ।इस वर्ष नियत तिथि 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया गया।बतादें कि सैकड़ो वर्ष से कनहर-ठेमा संगम पर स्नान करने की परम्परा आज भी लोगों की आस्था का प्रतिविम्ब बना हुआ है।प्रातः से ही दुद्धी, विंढमगंज, महुली, पतारिहा, पोलवा, जोरूखांड़,मल्देवा, बीड़र,रजखड़,जाबर, खजुरी समेत पड़ोसी प्रान्त झारखण्ड के नगर ऊंटारी आदि स्थानों से आने वाले श्रद्धालुओं से नदी का संगम तट पट चुका था।
कनहर में आस्था की डुबकी लगाकर,सूर्य नारायण को अर्ध्य देने की होंड़ श्रद्धालुओं में लगी रही।वहीं मेले में लाई, तिलवा समेत खीचड़ी बनाकर पारिवारिक समूह में खाने की परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्र की संस्कृति एवं परम्परा का जीता जागता उदाहरण माना जा सकता है।इस ऐतिहासिक मेले में उमड़ने वाली हजारों की भीड़ को देखते हुए झारखण्ड एवं यूपी के सैकड़ो छोटे-बड़े व्यवसायी भी मेले में अपने व्यवसाय के लिए खिंचे चले आते हैं और तरह तरह के व्यंजन,झूले व आकर्षक स्टाल से मेले में चार चांद लगती है।मेले की बढ़ती लोकप्रियता के कारण बढ़ रहे भीड़ से रीवां-रांची हाइवे का मुख्य कनहर पुल से दोनों तरफ जाम की स्थिति उतपन्न हो जाती है।जिसको लेकर मेला क्षेत्र के इलाकाई विंढमगंज पुलिस एवं दुद्धी पुलिस को काफी मेहनत व सतर्कता बरतनी होती है। हाईवे पर मेले की उमड़ी भीड़ को कंट्रोल कर,यातायात बहाल रखने में पुलिस उपाधीक्षक राम आशीष यादव के नेतृत्व में दुद्धी व विंढमगंज की पुलिस डटी रही।





