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कनहर में बहते बुजुर्ग को टेढ़ा गांव के ग्रामीणों ने बचाया

 "जाको राखे सईयां मार सके न कोए" वाली कहावत हुई चरितार्थ

दुद्धी,सोनभद्र – जाको राखे सईयां मार सके न कोए, वाली कहावत मंगलवार को दूधमनिया गांव के एक बुजुर्ग के साथ चरितार्थ हो गई। मंगलवार को टेढ़ा गांव के छठ घाट के पास कनहर नदी पार कर रहा एक बुजुर्ग पानी में डूबने लगा और वह गहरे पानी होने के कारण बहते हुए करीब 200 मीटर नीचे चला गया। जैसे ही कुछ देर बाद नदी के किनारे मौजूद ग्रामीणों की नजर बहते हुए बुजुर्ग पड़ी तो ग्रामीणों ने तत्काल हौसला दिखाते हुए बहते नदी में कूद गए और बुजुर्ग की जान बचाई। बहते पानी से निकालने के बाद शुरू में बुजुर्ग थोड़ी देर के लिए कुछ भी बता नही पा रहे थे।

ग्रामीणों ने उनके ठंडे शरीर के पैर के तलवे में रगड़ की तो शरीर को कुछ गर्मी मिली, फिर उन्होंने अपना नाम और घर का पता बताया। इतने में ग्रामीणों ने फोटो खींचकर कर सोशल मीडिया वटशॉप पर भेज दिया और उसकी पहचान हुई ।दर असल दूधमनिया( सुन्दरी ) गांव के बुजुर्ग टेढ़ा गांव में छठ घाट के पास कनहर नदी पार करके अपने गांव से दूसरे गांव कही मेहमानी करने जा रहे थे कि गहरे पानी का अंदाजा न मिलने के कारण वह बहने लगे।

नदी में बहते बुजुर्ग पर चरवाहों की नजर पड़ी तो लोगों ने उन्हें बहते पानी से बचाया ।नदी में बहते समय नदी की पत्थर से बुजुर्ग को एक पैर के घुटने में कुछ चोटें भी आई है। सूचना पर बुजुर्ग शेषमन उम्र करीब 78 पुत्र दुखी साव निवासी दूधमनिया ( सुंदरी )चौकी अमवार तथा कोतवाली क्षेत्र दुद्धी को उसके परिजन घटना स्थल पहुचकर वृद्ध को घर ले गये।नदी में बहते वृद्ध को बचाने वालों में नन्दलाल यादव व अन्य ग्रामीण शामिल रहे।ग्रामीणों की अपनी जान की परवाह किये बिना बुजुर्ग की प्राण रक्षा की चर्चा चारो ओर की जा रही है। हर कोई वृद्ध को देखकर कह रहा है कि जाको राखे सईयां तो मार सके न कोए।

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