साइबर ठगों से रहें सावधान, डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं
वाराणसी में एनएसई द्वारा आयोजित 'निवेशक जागरूकता एवं वित्तीय साइबर सुरक्षा' कार्यशाला में विशेषज्ञ वीके गुप्ता ने साइबर ठगी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक, कॉल या फर्जी निवेश ऑफर पर भरोसा न करें तथा ओटीपी, यूपीआई पिन और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। कार्यक्रम में सुरक्षित निवेश, एसआईपी, म्यूचुअल फंड और पीपीएफ की उपयोगिता पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।
वाराणसी : वर्तमान दौर में डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन निवेश जितना सुविधाजनक हुआ है, साइबर ठगों का जाल भी उतना ही गहराता जा रहा है। ऐसे में सही जानकारी और थोड़ी सी सतर्कता ही इन अपराधों से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। यह निष्कर्ष शुक्रवार को आयुक्त सभागार में आयोजित ‘निवेशक जागरूकता एवं वित्तीय साइबर सुरक्षा’ विषयक कार्यशाला में निकलकर आया।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसई), लखनऊ की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में सेबी के विषय विशेषज्ञ वीके गुप्ता ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि किसी भी अनजान लिंक, लुभावने ऑफर या अज्ञात कॉल पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ पूरी तरह से गैर-कानूनी है और कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए इससे डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।

उन्होंने बताया कि बैंक, सेबी या कोई भी सरकारी संस्था कभी भी फोन पर आपसे ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड नहीं मांगती। किसी भी फर्जी एप के चक्कर में न पड़ें और केवल सेबी द्वारा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही निवेश करें। उन्होंने जानकारी दी कि यदि किसी के साथ वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो बिना समय गंवाए तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते राशि को होल्ड कराया जा सके। इसके अलावा नागरिक केंद्र सरकार के ‘चक्षु’ पोर्टल -एप के माध्यम से भी संदिग्ध कॉल और फ्रॉड की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कार्यशाला में भविष्य के लिए बचत और सुरक्षित निवेश के तरीकों पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि वित्तीय सुरक्षा के लिए बेहतर प्लानिंग जरूरी है। पीपीएफ को सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, वहीं म्यूचुअल फंड भी एक बेहतर विकल्प है। शेयर बाजार में सुरक्षित निवेश के लिए सेबी द्वारा पंजीकृत म्यूचुअल फंड्स और एसआईपी के जरिए छोटी-छोटी बचत से बड़ा फंड बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्र ने कहा कि बदलते दौर में सेविंग के तरीकों के साथ-साथ साइबर फ्रॉड के तरीके भी बदले हैं। ऐसे में कर्मचारियों को सतर्क रहकर अपनी छोटी-छोटी बचत का सही और सुरक्षित निवेश करना चाहिए। कार्यशाला में मुख्य नगर लेखा परीक्षक संजय प्रताप सिंह, संस्कृति शर्मा सहित नगर निगम के बड़ी संख्या में अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, लिपिक, मोहर्रिर, नायब मोहर्रिर और सुपरवाइजर उपस्थित रहे। संचालन भैया लाल ने किया।
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