मोदी कैबिनेट के 3 बड़े फैसले: पुराने वाहन होंगे बाहर, एयरलाइंस को राहत और बनेगा नया तटीय एक्सप्रेसवे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की योजना के तहत पुराने ट्रक और बसों को बीएस-6 तथा इलेक्ट्रिक वाहनों से बदला जाएगा। विमान सेवा कंपनियों को स्थिर दर पर ईंधन उपलब्ध कराने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के मूल्य स्थिरीकरण कोष को स्वीकृति मिली। वहीं ओडिशा में 8,300 करोड़ रुपये की लागत से रामेश्वर-पारादीप तटीय राजमार्ग का निर्माण होगा।
- सरकार दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रक और बसों को बदलेगी
नयी दिल्ली : सरकार ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण दो वर्षीय योजना को मंजूरी दी है जिसमें 9,585 करोड़ रुपये का प्रावधान है।केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण दो वर्षीय योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पुराने ट्रक और बसों को बीएस-6 या उससे अधिक उत्सर्जन मानकों वाले तथा इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस योजना के लिए कुल 9,585 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें 5,041 करोड़ रुपये केंद्र सरकार की ओर से दिए जाएंगे जबकि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारें कर रियायतों के रूप में लगभग 1,601 करोड़ रुपये का योगदान देंगी। योजना का वित्तपोषण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के माध्यम से किया जाएगा तथा इसका क्रियान्वयन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाएगा।
सरकार के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। ऑटोमैटिक रिसर्च एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एआरएआई) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) की रिपोर्ट के मुताबिक क्षेत्र में पीएम 2.5 प्रदूषण का 14 प्रतिशत, कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन का 40 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन का 63 प्रतिशत हिस्सा परिवहन क्षेत्र से आता है। विशेष रूप से ट्रक और बसें कुल वाहन बेड़े का केवल तीन प्रतिशत होने के बावजूद पीएम 2.5 उत्सर्जन में 36 प्रतिशत योगदान देती हैं।
योजना से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लगभग 2.07 लाख वाहन मालिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें करीब 1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें शामिल हैं।योजना की निगरानी कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक सशक्त समिति करेगी, जबकि जिला स्तर पर जिलाधिकारी और जिला कलेक्टर इसके क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेंगे। सरकार का मानना है कि इस पहल से दिल्ली-एनसीआर में वाहनों से होने वाले प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी और क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
भारतीय विमान सेवा कंपनियों को तय दर पर मिलेगा विमान ईंधन, मूल्य स्थिरीकरण कोष को मंत्रिमंडल की मंजूरी
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में विमान ईंधन की कीमतों में भारी उछाल के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय विमान सेवा कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए मूल्य स्थिरीकरण कोष की स्थापना को मंजूरी दी है। इससे उन्हें स्थिर दाम पर ईंधन मिल सकेगा और तेल विपणन कंपनियों को भी इस मद में बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में तेल विपणन कंपनियों को एक बार के लिए अधिकतम 10,000 करोड़ रुपये के बजटीय समर्थन को मंजूरी प्रदान की गयी।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को बताया कि यह व्यवस्था तीन साल के लिए है। इसके तहत घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए विमान ईंधन की कीमतें तय कर दी जायेंगी।उन्होंने बताया कि व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए विमान सेवा कंपनियों को तेल विपणन कंपनियों के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करना होगा। इसके तहत वे तीन साल तक उनसे ही विमान ईंधन खरीदने के लिए बाध्य होंगे। इस समझौते पर नागरिक उड्ड्यन मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारियों के भी हस्ताक्षर होंगे।
इस राशि का इस्तेमाल तेल विपणन कंपनियां भारतीय एयरलाइंस को तय कीमत पर विमान ईंधन की आपूर्ति के लिए कर सकेंगी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के जरिये उन्हें ब्याज मुक्त ऋण के रूप में यह पैसा मिलेगा। जब भी योजना के तहत विमान ईंधन की तय कीमत आयात समतुल्य मूल्य से कम होगी तो नुकसान की भरपाई इस ऋण राशि से होगी। जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में विमान ईंधन सस्ता होगा तो अंतर के बराबर पैसे की वसूली तेल विपणन कंपनियों से की जायेगी। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी राशि की वसूली न हो जाये।
व्यवस्था लागू कराने के लिए इन दोनों मंत्रालयों के अलावा वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के प्रतिनिधियों की एक समिति का गठन किया जायेगा।पश्चिम एशिया संकट के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में विमान ईंधन के दाम करीब ढाई गुणा होने के बाद यह फैसला किया गया है। मई में सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए विमान ईंधन की कीमत में अधिकतम 25 प्रतिशत वृद्धि की सीमा तय कर दी थी। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर अब भी उन्हें काफी ऊंची कीमत चुकानी पड़ रही थी। इसके साथ ही तेल विपणन कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा था।
ओडिशा में रामेश्वर-पारादीप तटीय राजमार्ग परियोजना को मंजूरी
सरकार ने ओडिशा में रामेश्वर से पारादीप तक 160.18 किलोमीटर लंबे नये तटीय राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दी है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने इस आंशिक प्रस्ताव को मंजूरी दी है। परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के तहत दो पैकेजों में विकसित की जाएगी और इसकी कुल पूंजीगत लागत 8,300.79 करोड़ रुपये होगी।
बैठक के बाद सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि यह परियोजना ओडिशा के खुर्दा, पुरी, केंद्रापड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से होकर गुजरेगी तथा क्षेत्र में तेज, सुरक्षित और निर्बाध परिवहन सुविधा उपलब्ध करायेगी। परियोजना से तटीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।उन्होंने बताया कि परियोजना के पहले पैकेज में रामेश्वर से कोणार्क तक 79.40 किमी लंबा चार लेन एक्सेस नियंत्रित राजमार्ग बनाया जाएगा, जबकि दूसरे पैकेज में कोणार्क से पारादीप तक 80.78 किमी लंबी दो लेन सड़क का निर्माण सर्विस लेन के साथ किया जाएगा। दोनों खंडों को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
सरकार के अनुसार यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप है और इससे नौ आर्थिक केंद्र तथा पांच लॉजिस्टिक केंद्र आपस में जुड़ेंगे। परियोजना से देश के लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) में भी सुधार होने की उम्मीद है।परियोजना पूरी होने के बाद रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा समय में लगभग ढाई घंटे की कमी आने का अनुमान है। इसके साथ ही ईंधन की खपत, कार्बन उत्सर्जन और वाहन परिचालन लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
सरकार ने कहा कि परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से 53.61 लाख मानव-दिवस तथा अप्रत्यक्ष रूप से 67.01 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है। यह राजमार्ग भुवनेश्वर और खुर्दा के विशेष आर्थिक क्षेत्रों, मेगा फूड पार्क, मत्स्य क्लस्टरों, फार्मा क्लस्टर तथा पुरी रेलवे स्टेशन, पुरी हवाई अड्डा, अस्तारंग बंदरगाह और पारादीप बंदरगाह जैसे प्रमुख लॉजिस्टिक केंद्रों को बेहतर संपर्क प्रदान करेगा। (वार्ता)
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