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4 महीने में 50 ‘भव्य’ इंडस्ट्रियल पार्क मंजूर करेगी सरकार, राज्यों में शुरू होगी निवेश की नई दौड़

केंद्र सरकार की ‘भव्य’ योजना के तहत देशभर में 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि अगले चार महीनों में 50 पार्कों को मंजूरी देने की तैयारी है। योजना के लिए 33,660 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन पार्कों में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, श्रमिक आवास, डिजिटल सिंगल विंडो और नवीकरणीय ऊर्जा जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाने में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली : वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने देशभर में निवेश-तैयार एवं विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए मार्च में मंजूर ‘भव्य’ योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए कर दिये हैं और चार महीने में 50 औद्योगिक पार्कों के प्रस्ताव को मंजूरी देने का लक्ष्य है।इस योजना के तहत पूरे देश में 100 औद्योगिक पार्कों की स्थापना का लक्ष्य है जो 100 एकड़ से 1000 एकड़ तक के हो सकते हैं।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उत्तराखंड जैसे राज्यों में हम 25 एकड़ के पार्क को भी मंजूरी दे सकते हैं। दिशानिर्देशों के तहत केंद्र सरकार भव्य के तहत राज्यों को प्रति पार्क प्रति एकड़ जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए एक करोड़ रुपये या जमीन की प्रति एकड़ बाजार दर में से जो भी कम होगा, उसके बाराबर सहायता देगी।मंत्रिमंडल की मंजूरी के अनुसार इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक छह वर्षों की अवधि में 100 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे, जिनके लिए लगभग 33,660 करोड़ रुपये का कुल वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।

पहले चरण में राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा के आधार पर चयन प्रक्रिया के माध्यम से 50 तक औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक पार्क के लिए राज्यों को विशेष प्रयोजन इकाई का गठन करना होगा जो इन औद्योगिक पट्टियों में बुनियादी सुविधाओं का प्रबंधन करेगी।श्री गोयल ने कहा, ‘ सरकार इस योजना को लेकर कितनी सक्रियता से काम कर रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी गत 18 मार्च को मिली थी और इसे अप्रैल में अधिसूचित कर दिया गया था। अब इसके दिशा निर्देश जारी कर दिये गये हैं तथा चार महीने में 50 औद्योगिक पार्क मंजूर करने की तैयारी है।

‘श्री गोयल ने कहा कि इस चार महीने को भी दो भागों में बांट दिया गया है और पहले दो महीनों में 20 पार्क मंजूर कर दिये जाएंगे। उन्होंने संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सरकारें इस योजना के लिए प्रस्ताव जल्द प्रस्तुत कर सकती है।उन्होंने बताया कि भव्य योजना का उद्देश्य “मेक इन इंडिया”, “पीएम गति शक्ति” तथा भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र बनाने की सरकार की व्यापक दृष्टि के अनुरूप एकीकृत औद्योगिक अवसंरचना का विकास कर भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।

भव्य के लिए जारी दिशा-निर्देशों में पार्कों की पात्रता के मानदंड, परियोजना की चयन प्रक्रिया, वित्तपोषण संरचना, प्रशासनिक ढांचा, निगरानी प्रणाली तथा कार्यान्वयन व्यवस्था सहित विस्तृत रूपरेखा प्रदान की गई है।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य “निवेश-तैयार” औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जिसमें प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, विश्वसनीय उपयोगिता सेवाएं, श्रमिक सहायता अवसंरचना, डिजिटल शासन प्रणाली तथा सतत विकास संबंधी सुविधाएं शामिल होंगी।

दिशा-निर्देशों के अनुसार ग्रीनफील्ड तथा पात्र ब्राउनफील्ड औद्योगिक पार्कों दोनों का विकास किया जा सकेगा। गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए न्यूनतम 100 एकड़ भूमि तथा पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है। योजना के अंतर्गत 1000 एकड़ तक के बड़े औद्योगिक पार्कों पर भी विचार किया जा सकेगा।चुनौती-आधारित चयन प्रक्रिया के तहत प्रस्तावों का मूल्यांकन मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, स्थल की उपयुक्तता, अवसंरचना की गुणवत्ता, औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती, नीतिगत सुविधा, डिजिटल शासन की तैयारी तथा दीर्घकालिक स्थिरता जैसे वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर किया जाएगा।

दिशा-निर्देशों में भूमिगत उपयोगिता प्रणाली, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट सिस्टम, नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना, श्रमिक आवास, परीक्षण प्रयोगशालाएं, डिजिटल सिंगल-विंडो प्रणाली, कौशल विकास सुविधाएं तथा एकीकृत साझा अवसंरचना जैसे घटकों की गुणवत्ता के मूल्यांकन का भी प्रावधान किया गया है।योजना के अंतर्गत परियोजनाओं का कार्यान्वयन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत गठित एसपीवी के माध्यम से किया जाएगा। ये एसपीवी परियोजना की योजना, विकास, संचालन, प्रबंधन, निवेशक सुविधा तथा दीर्घकालिक रखरखाव के लिए जिम्मेदार होंगी।

राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम (एनआईसीडीसी) को योजना के कार्यान्वयन एवं निगरानी के लिए परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) नियुक्त किया गया है। दिशा-निर्देशों में निजी डेवलपर्स की भागीदारी हेतु परियोजना-विशिष्ट एसपीवी के माध्यम से औद्योगिक पार्क विकास का भी प्रावधान किया गया है, जिसमें स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा, पारदर्शिता सुरक्षा उपाय और जवाबदेही तंत्र निर्धारित किए गए हैं।

योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देशों में जीआईएस-आधारित निगरानी प्रणाली, समय-समय पर प्रगति रिपोर्टिंग, ऑडिट व्यवस्था तथा डीपीआईआईटी सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय स्तरीय संचालन समिति द्वारा निगरानी का प्रावधान शामिल किया गया है। योजना के दिशा-निर्देशों में लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, उपयोगिता अवसंरचना तथा औद्योगिक विकास से संबंधित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के साथ समन्वय का भी प्रावधान किया गया है। (वार्ता)

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