विधान परिषद की संसदीय समितियों के भ्रमण कार्यक्रम स्थगित
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने सरकारी खर्च और ईंधन बचत को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सरकारी काफिलों को कम करने के निर्देश के बाद अब विधान परिषद की संसदीय समितियों के भ्रमण कार्यक्रम भी अगले आदेश तक स्थगित कर दिए गए हैं। जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकों में शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य ईंधन की बचत, डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना है।
लखनऊ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन बचत, संसाधनों के सीमित उपयोग और सरकारी खर्चों में कटौती संबंधी आह्वान का असर अब उत्तर प्रदेश में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी, किफायती और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश विधान परिषद ने भी बड़ा निर्णय लेते हुए संसदीय समितियों के सभी पूर्व निर्धारित भ्रमण कार्यक्रमों को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होंगी बैठकें
विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है। इस संबंध में जानकारी देते हुए विधान परिषद के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि परिषद की संसदीय समितियों के भ्रमण कार्यक्रम फिलहाल स्थगित रहेंगे और जिला स्तरीय अधिकारी अब अग्रिम आदेशों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठकों में प्रतिभाग करेंगे।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य अनावश्यक यात्रा, ईंधन की खपत और सरकारी संसाधनों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करना है। साथ ही आधुनिक तकनीक के उपयोग से प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुगम और तेज बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने पहले ही दिए थे फ्लीट कम करने के निर्देश
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के वाहनों के काफिले को 50 प्रतिशत तक कम करने का निर्णय लिया था। सरकार का मानना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि सरकारी खर्चों में भी कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रदेश सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सुधार और डिजिटल कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों से समय की बचत होगी, अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और सरकारी कार्यों की निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
तकनीक आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा
सरकार लगातार ई-गवर्नेंस और डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता दे रही है। कोरोना काल के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित कार्य प्रणाली को जो बढ़ावा मिला था, अब उसे स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे जिलों और राजधानी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो रहा है और निर्णय प्रक्रिया भी तेज हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को व्यापक स्तर पर लागू किया गया, तो सरकारी खर्चों में उल्लेखनीय कमी आने के साथ-साथ प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम भविष्य की डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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