Varanasi

नारद जी के गुणों को प्रचारित करने की आवश्यकता : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी

वाराणसी में देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर आयोजित ‘पंच परिवर्तन : समाज एवं मीडिया’ संगोष्ठी में पत्रकारों को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि सच्ची पत्रकारिता संवाद और सत्यनिष्ठा पर आधारित होती है तथा नारद जी की तरह आत्मचिंतन आवश्यक है। अध्यक्षता करते हुए प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने नारद के गुणों को आधुनिक पत्रकारिता का आधार बताया। कार्यक्रम में समाज, मीडिया और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

वाराणसी। देवर्षि नारद जयंती के अवसर पर काशी में पत्रकारिता के मूल स्वरूप, उसकी दिशा और समाज में उसकी भूमिका पर गंभीर मंथन हुआ। विश्व संवाद केन्द्र काशी, समाजशास्त्र विभाग एवं मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में महात्मा गांधी अध्ययनपीठ सभागार में आयोजित ‘पंच परिवर्तन : समाज एवं मीडिया’ विषयक संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में पत्रकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में विभिन्न पत्रकारों को सम्मानित किया गया, जिसमें वक्ताओं ने पत्रकारिता के मूल्यों, चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि जितेन्द्र तिवारी, संपादक, हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी, नई दिल्ली ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के दौरान पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं थी, बल्कि वह एक सशक्त हथियार बन गई थी। पत्रकारिता ने ब्रिटिश हुकूमत की नीतियों के खिलाफ जनमत तैयार किया और लोगों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि मीडिया का मूल उद्देश्य संवाद स्थापित करना है। “संवाद तर्क है, विवाद नहीं,” इस बात पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि खुला और निष्पक्ष संवाद ही सच्ची पत्रकारिता की पहचान है। मीडिया का दायित्व जिज्ञासा उत्पन्न करना है और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता ही समाज और सरकार के बीच संतुलन कायम कर सकती है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि जब से पत्रकारिता मिशन से कमीशन की ओर बढ़ी है, तब से उसके अस्तित्व पर संकट गहराया है। “अपने को खोजना ही नारद जी की पत्रकारिता है,” कहते हुए उन्होंने पत्रकारों से जनसरोकारों से जुड़ने का आह्वान किया।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. आनन्द कुमार त्यागी, कुलपति, काशी विद्यापीठ ने कहा कि आधुनिक पत्रकारिता को नारद जी के आदर्शों से सीख लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नारद केवल देवदूत ही नहीं, बल्कि समरसता के प्रतीक और संकट प्रबंधन के कुशल उदाहरण भी थे। “नारद के गुणों का प्रचार ही भविष्य की पत्रकारिता का मार्ग है,” उन्होंने कहा।

प्रो. त्यागी ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए पत्रकारिता को समयानुकूल ढालना होगा। पंच परिवर्तन को सनातन परंपरा का आधार बताते हुए उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ संकल्पित होना होगा और विकास का मार्ग केवल ज्ञान से ही प्रशस्त होता है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने ‘एक पृथ्वी, एक परिवार’ की अवधारणा को भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र बताते हुए मीडिया की भूमिका को वैश्विक समन्वय में महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम का स्वागत प्रदीप कुमार ने किया, जबकि विषय प्रवर्तन डॉ. अत्रि भारद्वाज ने प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. अम्बरीष राय ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हेमन्त गुप्ता ने दिया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांतरंजन जी, क्षेत्र कार्यवाह डॉ. वीरेन्द्र जायसवाल, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी, प्रांत प्रचारक रमेश जी, समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. अमिता सिंह, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, प्रो. राकेश तिवारी, तथा डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान सम्मानित पत्रकारों ने इसे अपने लिए गर्व नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और स्वाभिमान का प्रतीक बताया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आने वाले 25 वर्ष पत्रकारिता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे, जिसमें सत्य, संवाद और समाज के प्रति प्रतिबद्धता ही उसकी दिशा तय करेगी।

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