गंगा के 60 घाटों के स्वरूप में जीवंत हो रहा है 2.51 लाख पौधों का महावन
वाराणसी के डोमरी (सुजाबाद) में 350 बीघा क्षेत्र में विकसित ‘ग्रीन काशी’ मियावाकी वन तेजी से आकार ले रहा है। 2.51 लाख पौधों की बेहतर जीवन दर और वृद्धि से महापौर संतुष्ट दिखे। गर्मी को देखते हुए ग्रीन नेट, रेनगन सिंचाई और नियमित देखभाल के निर्देश दिए गए। यह परियोजना 60 गंगा घाटों के नाम पर विभाजित है और देशी व औषधीय पौधों से समृद्ध है। यह वन पर्यावरण संतुलन, ऑक्सीजन उत्पादन और भविष्य में आय का बड़ा स्रोत बनेगा।
वाराणसी : डोमरी (सुजाबाद) में नगर निगम की संकल्पना अब धरातल पर जीवंत होने लगी है। 350 बीघा में फैले इस विशाल मियावाकी वन, जिसे अब ‘ग्रीन काशी’ के रूप में नई पहचान मिल रही है । इसकी प्रगति परखने बुधवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल मौके पर पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना प्राप्त कर चुके इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत रोपे गए 2.51 लाख पौधों की जीवन दर और उनकी स्वस्थ वृद्धि देख महापौर ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि पौधों के समुचित विकास में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।
तापमान बढ़ने के साथ ही महापौर ने पौधों के संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती तपिश से कोमल पौधों को बचाने के लिए पूरे क्षेत्र में आवश्यकतानुसार ग्रीन नेट का सुरक्षा कवच तैयार किया जाए ताकि सीधी धूप से उनका बचाव हो सके। सिंचाई व्यवस्था को और आधुनिक व प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने रेनगन सिस्टम के निरंतर उपयोग पर बल दिया। इसके अतिरिक्त पौधों को पोषण देने के लिए समय-समय पर खाद उपलब्ध कराने और उनकी नियमित निराई-गुड़ाई सुनिश्चित करने को कहा ताकि उनकी जड़ों तक हवा और नमी का संचार सुचारू रूप से होता रहे।
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। पूरे वन क्षेत्र को काशी के 60 ऐतिहासिक गंगा घाटों के नाम पर अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है, जिसमें दशाश्वमेध, मणिकर्णिका और अस्सी जैसे पौराणिक घाटों के नाम पर सेक्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक सेक्टर में शीशम, सागौन और अर्जुन जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ अश्वगंधा और गिलोय जैसे औषधीय पौधे लगाए गए हैं। यह ग्रीन काशी भविष्य में न केवल ऑक्सीजन का बड़ा भंडार बनेगी, बल्कि गंगा किनारे एक हरित विरासत के रूप में काशी की शोभा बढ़ाएगी।
नगर निगम ने एक मार्च को एक घंटे में 2,51,446 पौधे रोपकर जो विश्व कीर्तिमान स्थापित किया था, उसकी सुरक्षा के लिए भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पूरे वन क्षेत्र की निगरानी के लिए 25 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। रात्रि में प्रकाश के लिए 20 हाईमास्क लाइटें और पौधों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई है। निगम का यह प्रयास पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ आने वाले समय में आय सृजन का भी एक बड़ा माध्यम सिद्ध होगा।
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