नगर निगम परिवहन विभाग में बड़ा घोटाला, 3 कर्मचारी निलंबित
वाराणसी नगर निगम के परिवहन विभाग में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। दस वर्ष की मियाद पूरी होने से पहले ही कई वाहनों को ‘डेड’ घोषित कर नीलामी सूची में डाल दिया गया। जांच में ई-गार्बेज, स्वीपर और अन्य महंगे वाहनों के पार्ट्स गायब मिले। नगर आयुक्त ने तीन कर्मचारियों को निलंबित कर 15 दिनों में जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
- दस साल से पहले वाहन ‘डेड’ घोषित, 15 दिन में जांच रिपोर्ट के निर्देश
वाराणसी : नगर निगम के परिवहन विभाग में वाहनों के रखरखाव और नीलामी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। दस वर्ष की निर्धारित मियाद पूरी होने से पहले ही बड़ी संख्या में वाहनों को ‘डेड’ घोषित कर नीलामी सूची में शामिल कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने तत्काल प्रभाव से तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। नगर आयुक्त ने मामले की विस्तृत जांच के लिए अपर नगर आयुक्त अमित कुमार को जांच अधिकारी नामित किया है और 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। निलंबन अवधि के दौरान तीनों कर्मचारी जांच अधिकारी से संबद्ध रहेंगे।
स्थलीय निरीक्षण में सामने आईं चौंकाने वाली अनियमितताएं
नीलामी समिति में शामिल उपसभापति नरसिंह दास, पार्षद हनुमान प्रसाद तथा मदन मोहन दुबे ने डंपिंग यार्ड का स्थलीय निरीक्षण किया था। निरीक्षण और रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2022 में खरीदी गई विभिन्न प्रकार की 25 ई-गार्बेज मशीनों को मात्र डेढ़ वर्ष के भीतर ही कबाड़ घोषित कर दिया गया। इसके अलावा एक गोल्फ कोर्ट वाहन का केवल चेसिस ही शेष मिला, जबकि उसके पहिए, इंजन और बैटरी पूरी तरह गायब पाए गए।
बिना विशेषज्ञ रिपोर्ट के महंगी मशीनें कबाड़ में
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि लगभग 10-10 लाख रुपये कीमत की जटायु मशीनें और करीब 75 लाख रुपये मूल्य की स्वीपर मशीनों को बिना किसी विशेषज्ञ (एक्सपर्ट) रिपोर्ट के सीधे डंपिंग यार्ड में डाल दिया गया। वर्कशॉप में खड़ी कई गाड़ियों के इंजन, बैटरी और पहिए तक गायब मिले। नई जेसीबी और महिंद्रा वाहनों का कोई सर्विस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं पाया गया। वहीं, टाटा एस की दो गाड़ियों पर 1.5 लाख रुपये से अधिक की मरम्मत लागत खर्च होने के बावजूद उन्हें भी ‘स्क्रैप’ सूची में डाल दिया गया।
महापौर और नगर आयुक्त ने भी किया निरीक्षण
नीलामी समिति की रिपोर्ट के आधार पर महापौर और नगर आयुक्त ने स्वयं यार्ड का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद नगर आयुक्त ने पूरे मामले को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।
तीन कर्मचारी निलंबित
प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर कनिष्ठ लिपिक वैभव शरण मिश्र, सौरभ सान्याल और नपेंद्र शंकर सिंह को वाहनों के रखरखाव में घोर लापरवाही और नगर निगम को वित्तीय क्षति पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित कर्मचारियों का कृत्य कर्मचारी आचरण नियमावली के विरुद्ध है और यह गंभीर दंड की श्रेणी में आता है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
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