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यूपी की ई-बस फैक्टरी से देश की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई उड़ान: कुमारस्वामी

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने लखनऊ में अशोक लेलैंड की इलेक्ट्रिक बस निर्माण इकाई का उद्घाटन करते हुए उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत नेट ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है। फेम-2, पीएम ई-ड्राइव और पीएलआई योजनाएँ ई-वाहनों, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी निर्माण को मजबूती दे रही हैं।

  • पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देश में 70,000 से अधिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना होगी

लखनऊ: केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे में हुए व्यापक सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि आज यह राज्य देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे और रेलवे नेटवर्क का केंद्र बन चुका है। लखनऊ में अशोक लेलैंड की इलेक्ट्रिक बस निर्माण इकाई की शुरुआत न केवल कंपनी के लिए, बल्कि पूरे देश की सतत और आत्मनिर्भर मोबिलिटी की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। कुमारस्वामी सरोजिनीनगर स्थित अशोक लेलैंड की इलेक्ट्रिक बस निर्माण इकाई के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

इस्पात मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर स्पष्ट और महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। इसके साथ ही मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियानों को विशेष रूप से उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में मजबूती दी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में भारत के औद्योगिक भविष्य को आकार देंगे।

उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से भारत सरकार ने भारी उद्योग मंत्रालय के माध्यम से कई अहम पहल की हैं। 11,500 करोड़ के परिव्यय वाली फेम-2 योजना ने देशभर में इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की प्रक्रिया को गति दी है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 16.71 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर आए और 9,000 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों को स्वीकृति दी गई। इसी क्रम में 10,900 करोड़ के परिव्यय वाली पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 20 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हो चुकी है।

कुमारस्वामी ने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र को मजबूती देने के लिए ₹25,938 करोड़ के परिव्यय वाली पीएलआई ऑटो योजना लागू की गई है, जिसमें घरेलू मूल्य संवर्धन को अनिवार्य किया गया है। इसके अतिरिक्त, 18,100 करोड़ के परिव्यय वाली पीएलआई उन्नत रसायन सेल (एसीसी) योजना के तहत देश में 50 गीगावाट-घंटे बैटरी निर्माण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जो दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने हाल ही में स्वीकृत आरईपीएम योजना का भी उल्लेख किया, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ₹70,280 करोड़ के बजटीय प्रावधान के साथ मंजूरी दी है। इस योजना के तहत सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा, जो इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवश्यक हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वाणिज्यिक वाहन खंड पर विशेष ध्यान देना बेहद आवश्यक है, क्योंकि परिवहन से होने वाले कुल प्रदूषण में इसका योगदान 40 प्रतिशत से अधिक है। इसी को ध्यान में रखते हुए पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देशभर में 70,000 से अधिक चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। अशोक लेलैंड की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी ने महज 18 महीनों की रिकॉर्ड अवधि में यह अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई स्थापित कर एक मिसाल कायम की है।

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