कुशीनगर में मध्यदेशीय समाज ने कुलगुरु के दर्शन-पूजन से नववर्ष शुभारंभ का किया आह्वान
नववर्ष की पहली सुबह मध्यदेशीय (कान्दू) वैश्य समाज ने अपने कुलगुरु बाबा गणिनाथ जी महाराज के दर्शन–पूजन से आरंभ करने का आह्वान किया। कुशीनगर के मठिया नरईपुर स्थित मंदिर में सामूहिक उपस्थिति से सेवा, एकता और संस्कार के संकल्प को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।
कुशीनगर। नववर्ष की पहली भोर-जब धूप की पहली किरण के साथ श्रद्धा मन में उतरती है-मध्यदेशीय (कान्दू) वैश्य समाज के लिए आस्था, एकता और संस्कार का संदेश लेकर आई। इसी पावन अवसर पर समाज ने अपने कुलगुरु संत शिरोमणि बाबा गणिनाथ जी महाराज के चरणों में शीश नवाकर नववर्ष का शुभारंभ करने का भावपूर्ण और व्यापक आह्वान किया है।
समाज की ओर से स्वजातीय बंधुओं से अपील की गई है कि वे 1 जनवरी को प्रातःकाल कुशीनगर जनपद के पड़रौना ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा मठिया नरईपुर में स्थित मद्धेशिया (कान्दू) समाज के कुलगुरु बाबा गणिनाथ जी महाराज के मंदिर प्रांगण में पहुँचकर दर्शन–पूजन करें और बाबा के पावन आशीर्वाद से वर्ष के समस्त कार्यों का शुभारंभ करें।
समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि बाबा की कृपा से ही जीवन की हर दिशा आलोकित होती है। सेवा, संस्कार और समाज-कार्य-तीनों को सिद्धि बाबा के आशीर्वाद से ही प्राप्त होती है। उनका अनुभव-सिद्ध मत है कि जब हर आरंभ बाबा के चरणों से होता है, तो प्रयास स्वतः ही सफलता की ओर अग्रसर हो जाते हैं। यही कारण है कि नववर्ष का प्रथम दिवस विशेष महत्व रखता है-यह दिन श्रद्धा को संकल्प में बदलने और संकल्प को कर्म में ढालने का अवसर देता है।
आह्वान में यह भी कहा गया है कि परिवार सहित, समाज सहित बाबा के दरबार में उपस्थित होकर शीश झुकाया जाए और एकजुटता, सेवा-भाव तथा संस्कारों के पथ पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया जाए। मंदिर प्रांगण में सामूहिक दर्शन-पूजन के माध्यम से समाज को नई ऊर्जा, नई दिशा और नववर्ष के लिए सकारात्मक प्रेरणा प्राप्त होगी।
समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का उत्सव है-जहाँ पीढ़ियाँ अपने मूल्यों से जुड़ती हैं, युवाओं को मार्गदर्शन मिलता है और संगठन की शक्ति का प्रत्यक्ष अनुभव होता है। उन्होंने स्वजातीय बंधुओं से अनुरोध किया कि वे इस पावन अवसर पर अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर बाबा गणिनाथ जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करें और नववर्ष को सेवा, एकता और संस्कार के संकल्प के साथ आरंभ करें।
एक दिन, एक मंच, एक संदेश-बाबा गणिनाथ पूजनोत्सव ने जोड़ा हर पीढ़ी को
1 जनवरी को देश-विदेश में बसे मध्यदेशीय वैश्य समाज से दर्शन-पूजन और सेवा-संकल्प की अपील



