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बिहार चुनाव पर सियासी संग्राम तेज: AIMIM और कांग्रेस के नेताओं ने महागठबंधन व चुनाव आयोग पर साधा निशाना

बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर सियासत तेज हो गई है। AIMIM नेता वारिस पठान ने महागठबंधन पर अल्पसंख्यक वोटों के बिखराव का आरोप लगाते हुए कहा कि छह सीटों की मांग ठुकराने से विपक्षी वोटों में नुकसान हुआ। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए धांधली के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि रुझानों में दिख रही भाजपा की बढ़त पर मतगणना से जुड़ी प्रक्रियाओं ने संदेह पैदा किया है। इन बयानों से राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।

  • वारिस पठान ने महागठबंधन पर अल्पसंख्यक वोट बांटने का आरोप लगाया; भूपेश बघेल ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर धांधली का संकेत दिया

बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों पर बढ़ती राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के वरिष्ठ नेता वारिस पठान ने महागठबंधन के नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत अल्पसंख्यक समुदायों और पिछड़ी जातियों के राजनीतिक हितों को नुकसान पहुंचाकर हासिल की गई है।

श्री पठान ने स्पष्ट आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के नेतृत्व वाला महागठबंधन अल्पसंख्यक वोटों के बिखराव के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार है। उनके अनुसार, एआईएमआईएम ने चुनाव से पहले महागठबंधन से हाथ मिलाने का प्रयास किया था और केवल छह सीटों की मांग रखी थी, ताकि विपक्षी वोटों का एकजुट लाभ मिल सके। लेकिन महागठबंधन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने कहा, “हमने उन्हें महागठबंधन से जुड़ने का मौका दिया था। मात्र छह सीटों की मांग थी, जिसे मानकर वे एक मजबूत विपक्ष तैयार कर सकते थे। लेकिन उन्होंने हमारे प्रस्ताव को ठुकरा दिया और आज नतीजा सबके सामने है। अल्पसंख्यक और पिछड़े समाज के वोट बंट गए, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिला।”

वारिस पठान ने आरोप लगाया कि महागठबंधन की चुनावी रणनीति न तो जमीन पर मजबूत थी और न ही उसने सामाजिक समीकरणों को समझने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम की बढ़ती स्वीकार्यता और अल्पसंख्यक क्षेत्रों में मजबूत पकड़ देखकर महागठबंधन ने सहयोग से दूरी बनाई, जिससे विपक्षी मतदाताओं में भ्रम की स्थिति बनी।

उन्होंने आरोप लगाया कि “महागठबंधन ने अगर समय रहते सभी विपक्षी दलों को साथ जोड़ा होता, तो आज बिहार की तस्वीर अलग होती। उन्होंने सामूहिक लड़ाई के बजाय अहंकार को तरजीह दी, जिसका खामियाजा पूरे अल्पसंख्यक समुदाय को भुगतना पड़ा है।”

एआईएमआईएम नेताओं का कहना है कि अब समय आ गया है जब विपक्ष को विभाजनकारी राजनीति छोड़कर एक समन्वित रणनीति बनानी चाहिए, ताकि सामाजिक वंचित वर्गों की राजनीतिक आवाज़ मजबूत हो सके।

रायपुर । बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की बढ़त के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए हैं।

श्री बघेल ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट जारी कर ज्ञानेश कुमार को बधाई दी, लेकिन उसी के साथ चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर कटाक्ष भी किया। उन्होंने लिखा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने बिहार चुनाव में जिस तरह “मेहनत” की है, उसका परिणाम आज रुझानों और नतीजों में साफ दिखाई दे रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका और उसके निर्णयों ने मतदान प्रक्रिया पर गंभीर संदेह खड़ा किया है। बघेल ने कहा कि चुनाव में कई चरणों पर ऐसी स्थितियाँ देखने को मिलीं, जो मतगणना की पारदर्शिता और ईवीएम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। उनके अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हों, लेकिन इस बार स्थिति और भी स्पष्ट रूप से सामने आई है।

बघेल ने यह भी कहा कि बिहार की जनता ने बदलाव की उम्मीद के साथ मतदान किया था, लेकिन चुनाव परिणामों में जिस तरह के रुझान दिख रहे हैं, उससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मतदाताओं की वास्तविक इच्छा का प्रतिबिंब परिणामों में दिख रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक हार-जीत का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता का है, जिस पर किसी भी प्रकार का संदेह लोकतंत्र के लिए चुनौती साबित हो सकता है।

कांग्रेस नेता के इन आरोपों पर भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन बघेल के बयान के बाद राजनीतिक माहौल में गर्माहट बढ़ गई है और उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तेज़ी से उभर सकता है।

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