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राम केवल उत्तर भारत में नहीं, दक्षिण के हर घर में विराजते हैं : निर्मला सीतारमण

अयोध्या की पवित्र धरती पर बुधवार को इतिहास रचा गया, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दक्षिण भारत के तीन महान संतों - श्री त्यागराज स्वामीगल, श्री पुरंदर दास और श्री अरुणाचल कवि - की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। यह आयोजन उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना, जहां कर्नाटक संगीत, तमिल काव्य और रामभक्ति की स्वर लहरियां सरयू की हवाओं में गूंज उठीं। ”त्यागराज स्वामी के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि “उन्होंने गरीबी में भी केवल श्रीराम के लिए गाया। लोग कहते हैं कि स्वयं हनुमान जी ने उनके रूप में जन्म लिया था।”मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या अब केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की केंद्रस्थली बन रही है।शाम को केंद्रीय वित्त मंत्री ने मां सरयू की भव्य आरती में भी भाग लिया।

  • त्यागराज स्वामी ने गरीबी में भी केवल श्रीराम के लिए गाये गीत : निर्मला सीतारमण
  • लोग कहते है कि हनुमान जी ने ही कवि त्यागराज के रूप में लिया था जन्म : वित्त मंत्री
  • तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम हर भाषा में श्रीराम की महिमा का गान हुआ है : वित्त मंत्री

अयोध्या। अयोध्या के पवित्र बृहस्पति कुंड पर बुधवार को आयोजित ऐतिहासिक समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ दक्षिण भारत के तीन महान संगीत संतों श्री त्यागराज स्वामीगल, श्री पुरंदरदास और श्री अरुणाचल कवि की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। इस अवसर पर निर्मला सीतारमण का उद्बोधन भावनाओं और भक्ति से ओतप्रोत रहा। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में श्रीराम भक्ति केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा है।

पहले दक्षिण भारत में भाषाई भेदभाव नहीं था

निर्मला सीतारमण ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दक्षिण भारत के संतों के बारे में जिस विस्तार से बताया, वह अद्भुत है। उन्होंने कहा कि पहले दक्षिण भारत में भाषाई भेदभाव नहीं था, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और संस्कृत, सभी भाषाओं में कर्नाटक संगीत गाया जाता था, जो एकता का प्रतीक है।

त्यागराज जी के हर गीत में श्रीराम की ऊर्जा प्रवाहित होती थी

वित्त मंत्री ने कहा कि त्यागराज स्वामी ने जीवनभर गरीबी में रहते हुए भी श्रीराम भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया। उन्होंने राजा के श्रेय में गीत गाने से इनकार कर केवल श्रीराम के लिए गीत गाये। उनकी भक्ति ऐसी थी कि हर गीत में श्रीराम की ऊर्जा प्रवाहित होती थी। लोग कहते हैं कि शायद हनुमान जी ने ही त्यागराज के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने बताया कि त्यागराज स्वामी का गीत ‘सीता कल्याण’ दक्षिण भारत में हर विवाह समारोह में गाये जाते हैं। उन्होंने कहा कि मेरी बेटी की शादी में भी वही गीत गाये गये थे।

केरल में पूरे अषाढ़ मास में होता है वाल्मीकि रामायण का पाठ

निर्मला सीतारमण ने कहा कि “रामभक्ति केवल हिन्दी भाषी क्षेत्रों की नहीं है। केरल में आज भी पूरे सिंह मास (अषाढ़) में हर घर में शाम के समय दीप जलाकर भगवान श्रीराम की आराधना की जाती है। पूरे महीने वाल्मीकि रामायण पढ़ी जाती है। यह मूर्त रूप नहीं, बल्कि अमूर्त भक्ति की परंपरा है। यह हमारे देश की सच्ची आत्मा है। उन्होंने तमिल कवि अरुणाचल कवि का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने प्रसिद्ध तमिल काव्य रामनाटकम् में माता सीता के प्रति गहरा सम्मान प्रकट किया। उन्होंने कहा था, एक लाख आंखों से सीता माता को देखो, उनसे सुंदर कोई नहीं।

तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम हर भाषा में श्रीराम की महिमा का गान हुआ है

निर्मला सीतारमण ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी राम जन्मभूमि के लोकार्पण से पहले दक्षिण भारत के श्रीराम से जुड़े मंदिरों की यात्रा की थी। वे श्रीरंगम मंदिर में गए, जहां कंबरामायणम् की रचना हुई थी। यही नहीं, अरुणाचल कवि को भी श्रीराम ने सपने में आदेश दिया था कि वे श्रीरंगम में रामनाटकम् प्रस्तुत करें। वित्त मंत्री ने कहा कि दक्षिण भारत में न केवल पुरुष संत ही नहीं बल्कि एक कुम्हार समुदाय की महिला ने भी तेलुगु में मोल्लरामायणम् लिखकर भक्ति की मिसाल कायम की। ‘तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम हर भाषा में श्रीराम की महिमा का गान हुआ है। यही भारत की आत्मा है।

हमें लगा ही नहीं कि हम उत्तर भारत में हैं, ऐसा लगा जैसे अपने घर में समारोह कर रहे हों

अपने उद्बोधन के अंत में निर्मला सीतारमण ने कहा कि आज का दिन अत्यंत पवित्र है। जिन संतों की हर श्वास में ‘राम’ था, उनकी प्रतिमाओं को अयोध्या में स्थान मिलना केवल योग से नहीं, श्रीराम की इच्छा से संभव हुआ है। उत्तर और दक्षिण भारत के बीच यह भक्ति से जुड़ी एकता का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताया और कहा कि हमें लगा ही नहीं कि हम उत्तर भारत में हैं, ऐसा लगा जैसे अपने घर में समारोह कर रहे हों।

मां सरयू की भव्य आरती में शामिल हुईं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

अयोध्या । अयोध्या के पावन सरयू तट पर भव्य आरती का दृश्य देखते ही बन रहा था, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने श्रद्धा भाव से इसमें भाग लिया। सूर्यास्त के समय घाट पर जब दीपों की कतारों में प्रकाश झिलमिलाया और जल पर मंद झिलमिलाती रौशनी में मां सरयू की आरती आरंभ हुई, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। निर्मला सीतारमण ने हाथ जोड़कर आरती में भाग लिया और दीपों की रोशनी में तट पर बजते शंख और घुंघरू की ध्वनि के बीच भक्ति और शांति का अनुभव किया।

उन्होंने हाथ में थाली उठाकर दीपों का संचालन किया और गंगा-जैसे पावन सरयू के जल में दीपों को प्रवाहित करते हुए मन की शुद्धि और आशीर्वाद की कामना की। आरती के दौरान घाट पर उपस्थित श्रद्धालु भी मंत्रोच्चारण और भजन-कीर्तन में सम्मिलित हुए, जिससे सरयू तट पर एक दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण बन गया। इस दौरान सीतारमण के माता-पिता भी मौजूद रहे, जिससे यह पल और भी भावनात्मक हो गया।

निर्मला सीतारमण ने इस अवसर पर कहा कि अयोध्या न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी सम्पूर्ण भारत के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनकी उपस्थिति ने आरती के इस पावन आयोजन को और भी गौरवपूर्ण बना दिया। हर श्रद्धालु की नजरें निर्मला सीतारमण पर थीं, जब उन्होंने पूर्ण श्रद्धा भाव से मां सरयू की आरती की और घाट पर उपस्थित लोगों के बीच सादगी और भक्ति का संदेश दिया।

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया दक्षिण के तीन संतों की मूर्तियों का अनावरण
  • त्यागराज, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों से अयोध्या में बसा कर्नाटक का संगीत भाव

अयोध्या : उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम बुधवार को अयोध्या की पावन भूमि पर देखने को मिला। दो दिवसीय दौरे पर पहुंचीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर दक्षिण भारत के तीन महान संगीत संतों त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों का बृहस्पति कुंड में भव्य अनावरण किया।

भक्ति और संगीत की मधुर लहरों में डूबा बृहस्पति कुंड

टेढ़ी बाजार स्थित बृहस्पति कुंड का वातावरण उस समय भक्तिरस और संगीत की पवित्र भावना से सरोबार हो उठा जब केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर अनावरण समारोह की शुरुआत की। इस दौरान सीतारमण के माता-पिता भी मौजूद रहे, जिससे यह पल और भी भावनात्मक हो गया।

अयोध्या की परंपरा में हुआ भव्य स्वागत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय वित्त मंत्री का पुष्पगुच्छ भेंट कर पारंपरिक अयोध्या शैली में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बृहस्पति कुंड केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है, जहां उत्तर भारत की श्रद्धा और दक्षिण भारत की भक्ति का संगम होता है।

तीनों संतों के योगदान को किया नमन

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अयोध्या केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है। उन्होंने तीनों संतों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और भक्ति परंपरा को विश्व पटल पर स्थापित किया। उनके काव्य और रचनाओं ने समाज को प्रेम, भक्ति और एकता के सूत्र में पिरोया।

कर्नाटक और अयोध्या के सांस्कृतिक रिश्ते को मिला नया आयाम

सीतारमण ने बृहस्पति कुंड की भव्यता और शांति देखकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अयोध्या और कर्नाटक के सांस्कृतिक संबंध सदियों पुराने हैं। आज इन संतों की मूर्तियों के अनावरण के माध्यम से भारत की उत्तर-दक्षिण परंपरा एक सूत्र में बंधी है।

सीएम योगी ने बोल अयोध्या बन रही सांस्कृतिक पुनर्जागरण की धुरी

इस अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीराम की नगरी अयोध्या अब केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण की केंद्रस्थली बन रही है। उन्होंने कहा कि निर्मला सीतारमण का यह दौरा भारत की सांस्कृतिक एकता और समरसता का सशक्त प्रतीक है।

बृहस्पति कुंड की शांति में खोए सीएम योगी, मंत्रियों संग पत्थर की बेंच पर लिया सौंदर्य का आनंद

बृहस्पति कुंड परिसर में स्थापित सुंदर पत्थर की बेंचों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह कुछ देर के लिए विराम लेते हुए बैठे। शांत सरोवर, मधुर वातावरण और सुव्यवस्थित परिसर को निहारते हुए तीनों जनप्रतिनिधियों ने उस पल में अयोध्या की सौंदर्य व सांस्कृतिक गरिमा का आनंद अनुभव किया। मुख्यमंत्री ने बेंचों की कलात्मक बनावट और परिसर के सौंदर्यीकरण की सराहना करते हुए कहा कि बृहस्पति कुंड अब श्रद्धा और सौंदर्य का आदर्श संगम बन चुका है।

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