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“राम और अर्जुन दोनों ने किया था इस पेड़ की पूजा -जानिए दशहरा पर शमी वृक्ष का रहस्य”

शमी वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि वह परंपरा है जिसने युगों से धर्म, विजय और आस्था का संतुलन बनाए रखा है। दशहरा पर शमी पूजा का शास्त्रीय और पौराणिक आधार इतना गहरा है कि इसे भारत की “विजय परंपरा” कहा जा सकता है।

  • “दशहरा का गुप्त रहस्य : शमी वृक्ष की पूजा से क्यों मिलती है विजय और शांति?”

भारत की भूमि पर हजारों वर्षों से वृक्ष केवल प्रकृति के प्रतीक नहीं, बल्कि आस्था के केंद्र रहे हैं। इनमें से एक है -शमी वृक्ष (Prosopis Cineraria)- जो हर युग में विजय, शांति और समृद्धि का प्रतीक माना गया।शमी वृक्ष का उल्लेख ऋग्वेद, महाभारत, रामायण और स्कंद पुराण -सभी में मिलता है। इसकी पूजा दशहरा, शनिवार और अमावस्या को विशेष रूप से की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अर्जुन, भगवान श्रीराम, और शनि देव – तीनों का इस वृक्ष से गहरा संबंध है।

शमी वृक्ष का वेदों में उल्लेख

वेदों में कहा गया है – “शमी शमयते पापं” – अर्थात शमी पाप को शांत करती है।“शमी अग्निरजननी” -शमी वृक्ष अग्नि को जन्म देने वाली है। यह श्लोक इस तथ्य पर आधारित है कि प्राचीन काल में यज्ञ की अग्नि उत्पन्न करने के लिए शमी और अरनी की लकड़ी का प्रयोग किया जाता था। शमी इसलिए “अग्नि जननी” कही गई — जो शुद्धता, प्रकाश और ऊर्जा की प्रतीक है। वेदों में यह भी लिखा है कि जो व्यक्ति शमी वृक्ष की पूजा करता है, वह पाप, भय और संकट से मुक्त होता है।

अर्जुन और शमी वृक्ष की विजय कथा

महाभारत में शमी वृक्ष से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा आती है। पांडव जब वनवास के बाद अज्ञातवास में गए, तब अर्जुन ने अपने दिव्य धनुष गांडीव और अन्य अस्त्र-शस्त्र छिपाने के लिए एक स्थान चुना। वह स्थान था -शमी वृक्ष के नीचे।

अर्जुन ने उस वृक्ष से कहा – “हे शमी, मेरी रक्षा करना। मेरे अस्त्रों की रक्षा करना।” अज्ञातवास पूरा होने पर, जब युद्ध का समय आया, अर्जुन उसी वृक्ष के नीचे पहुँचे। उन्होंने वृक्ष को नमन किया, शमी पूजा की और भगवान शिव व शनि देव का ध्यान कर अपने अस्त्र उठाए। उसके बाद उन्होंने विजय की प्राप्ति की। तभी से परंपरा चली कि युद्ध या किसी महत्वपूर्ण कार्य से पहले शमी की पूजा की जाए। इसी से जुड़ा है दशहरा का महत्व- “विजयादशमी”, यानी विजय का दिन।

भगवान श्रीराम और शमी पूजा

रामायण में भी शमी वृक्ष की महिमा का उल्लेख है।जब भगवान श्रीराम रावण से युद्ध करने की तैयारी कर रहे थे,तो उन्होंने शमी वृक्ष के नीचे बैठकर विजय का संकल्प लिया और पूजा की।उस दिन दशहरा था।राम ने शमी वृक्ष को साक्षी मानकर रावण वध का प्रण किया।इसलिए दशहरा को “विजयादशमी” कहा गया —यानी वह दिन जब धर्म ने अधर्म पर विजय पाई।यही कारण है कि आज भी दशहरा पर शमी वृक्ष की पूजा की जाती है।

शमी और शनि देव का गहरा संबंध

शास्त्रों के अनुसार, शमी वृक्ष में शनि देव का निवास माना गया है।पद्म पुराण और स्कंद पुराण में लिखा है -“शनैश्चरस्य वासोऽस्ति शम्यां तस्मात् शनैश्चरः प्रियः।”-अर्थात *शमी वृक्ष में शनि देव का वास होता है, इसलिए यह उन्हें अत्यंत प्रिय है।शमी वृक्ष शनि ग्रह की अशुभता को कम करता है।जो व्यक्ति शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित हो,वह शमी वृक्ष की पूजा, जल अर्पण और दीपदान करे -तो उसके जीवन में शांति और स्थिरता आती है।

शमी पूजा की विधि

शमी पूजा दो विशेष अवसरों पर की जाती है – 1.दशहरा (विजयादशमी) और 2. शनिवार।

दशहरा के दिन:

पूजा का शुभ मुहूर्त होता है -विजय मुहूर्त (दोपहर 2:09 PM – 2:56 PM)| शमी वृक्ष के नीचे जल, पुष्प, सिंदूर, चावल, दीपक और गुड़ से पूजा की जाती है। इस मंत्र का जाप किया जाता है: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” या “ॐ नमः शम्याय नमः” | इसके बाद वृक्ष के चारों ओर सात परिक्रमा की जाती हैं और शमी के पत्तों को घर में शुभ प्रतीक के रूप में रखा जाता है।

शमी पत्र (सोना) की परंपरा

दशहरा के दिन शमी के पत्तों को सोना (स्वर्ण) माना जाता है। लोग एक-दूसरे को यह कहकर शमी पत्र देते हैं -“सोना लीजिए, सोना दीजिए।” यह परंपरा इस विश्वास से जुड़ी है कि शमी पत्र देने से धन, सौभाग्य और सफलता बढ़ती है। राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में इसे “सोने की अदला-बदली” कहा जाता है।

शमी : अग्नि और शक्ति का प्रतीक

वेदों में शमी को “अग्नि जननी” कहा गया क्योंकि यज्ञ की अग्नि शमी की लकड़ी से उत्पन्न होती थी। इससे यह वृक्ष ऊर्जा, बल और शक्ति का प्रतीक बन गया। कहा गया -“अग्निर्जन्यं शमी जातं, शमी अग्निरिति स्मृतः।” अर्थात -शमी से उत्पन्न अग्नि ही दिव्यता और तेज का स्रोत है। इस कारण यह वृक्ष केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत माना गया।

शमी वृक्ष का वैज्ञानिक पक्ष

आधुनिक विज्ञान ने भी शमी वृक्ष के महत्व को स्वीकार किया है। यह रेगिस्तानी क्षेत्रों में जीवन का सहारा है (खासकर राजस्थान और गुजरात में)। इसकी जड़ें मिट्टी को बांधकर मरुस्थलीकरण रोकती हैं।इसकी पत्तियाँ वायु को शुद्ध करती हैं और पशुओं के लिए उत्तम चारा हैं।आयुर्वेद में शमी को पित्तशामक, सूजननाशी और रक्तशोधक बताया गया है। इसलिए यह वृक्ष न केवल धार्मिक, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक है।

शमी : शांति और संतुलन का संदेश

“शमी” शब्द का अर्थ ही है – शमन करना या शांति देना। यह वृक्ष उसी संदेश का प्रतीक है- कि जीवन में जितनी तपस्या, उतनी ही शांति आवश्यक है। जब मन में क्रोध, चिंता या द्वंद्व बढ़े -तो शमी वृक्ष के नीचे ध्यान करना शुभ माना जाता है। यह न केवल ग्रहों का दोष कम करता है, बल्कि मन को स्थिर करता है।

शमी पूजा के लाभ

शास्त्रों और ज्योतिष ग्रंथों में शमी पूजा के अनेक लाभ बताए गए हैं —

1. शनि दोष से मुक्ति
2. धन और व्यवसाय में उन्नति
3. युद्ध या प्रतियोगिता में विजय
4. मन की शांति और स्थिरता
5. घर में नकारात्मक ऊर्जा का नाश
6. दीर्घायु और स्वास्थ्य में सुधार

स्कंद पुराण* में लिखा है -“शमी पूजां करोति यः स पापैः प्रमुच्यते ध्रुवम्।” अर्थात — *जो व्यक्ति शमी पूजा करता है, वह पापों से मुक्त हो जाता है।

लोक परंपरा और आधुनिक प्रासंगिकता

आज भी भारत के अनेक भागों में – विशेषकर राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक – दशहरा के दिन शमी पूजा का उत्सव मनाया जाता है। राजस्थान में इसे “शमी मिलन” कहा जाता है, जहाँ ग्रामीण एक-दूसरे को शमी पत्र देकर सफलता और धन की शुभकामना करते हैं।यह परंपरा न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास का प्रतीक है।

जब वृक्ष ने सिखाई विजय की परंपरा

शमी वृक्ष की पूजा केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं है। यह भारतीय संस्कृति की उस भावना का प्रतीक है – जहाँ प्रकृति, धर्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं। अर्जुन ने शमी वृक्ष के नीचे अस्त्र छिपाए, राम ने शमी वृक्ष के सामने विजय का संकल्प लिया, और आज हर दशहरा पर हम उसी वृक्ष को नमन करते हैं – जो हमें सिखाता है कि “विजय केवल शस्त्र से नहीं, आस्था और शांति से मिलती है।”

डिस्क्लेमर:  इस स्टोरी में वर्णित सभी धार्मिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भ वेद, पुराण, महाभारत, रामायण, तथा पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं।यहाँ प्रस्तुत जानकारी का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक जागरूकता और आस्था का सम्मान करना है।यदि किसी तथ्य, नाम या प्रसंग में कोई त्रुटि या जानकारी छूट गई हो,तो कृपया हमें सूचित करें – जानकारी के सत्यापन के बाद आवश्यक संशोधन कर लिया जाएगा।

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