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60 साल में पहली बार नाहल नदी से 75 किमी क्षेत्र में आई हरियाली

रामपुर की 09 लुप्तप्राय नदियों को मिला पुनर्जीवन, 100 से अधिक ग्राम पंचायतों के लाखों किसान बन रहे हरियाली के गवाह.रामपुर में 09 नदियों- हतियारी, सैजनी, नाहल, नीली, आरिल, नईया, रेवती नदी, बैगुल और चौगजा नदी का पुनरुद्धार.सीएम योगी के निर्देश पर राज्य स्वच्छ गंगा मिशन और मनरेगा से छोटी नदियों का कायाकल्प बना प्रदेश की हरियाली का स्रोत.

  • उप-सतही बांध तकनीक का पहली बार यूपी के रामपुर में किया गया सफल प्रयोग
  • बिलासपुर, चमरौआ, मिलक, सैदनगर, शाहबाद और स्वार विकासखंडों में लौटी हरियाली

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की लुप्तप्राय नदियों को पुनर्जीवित करने का जो अभियान चल रहा है, वह अब हरियाली और समृद्धि का पर्याय बनता जा रहा है। इसी क्रम में रामपुर जनपद की 09 छोटी नदियों का पुनरुद्धार कर उन्हें जीवनदान दिया गया है। इनमें नाहल, हतियारी, सैजनी, नीली, आरिल, नईया, रेवती, बैगुल और चौगजा जैसी नदियों के पुनर्जीवन से 100 से अधिक ग्राम पंचायतों के लाखों किसान लाभान्वित हो रहे हैं। बिलासपुर, चमरौआ, मिलक, सैदनगर, शाहाबाद और स्वार विकासखंडों में अब हरियाली लौट रही है और खेतों में फिर से फसलें लहलहाने लगी हैं।

ऐतिहासिक है नाहल नदी का पुनरुद्धार

नाहल नदी का पुनरुद्धार रामपुर के लिए ऐतिहासिक साबित हो रहा है। 75 किलोमीटर लंबी यह नदी विकासखंड मिलक, चमरौआ और सैदनगर के 43 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरती है। मुख्य विकास अधिकारी नंद किशोर कलाल ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर नाहल नदी का जीर्णोद्धार किया गया है। 60 वर्षों से इस नदी का जल प्रवाह बाधित था। अब पहली बार स्थानीय किसानों ने इसे बहते हुए देखा है। इस नदी को पुनर्जीवित करने में मनरेगा के अंतर्गत कराए गए कार्यों से डेढ़ लाख मानव दिवस सृजित हुए और 2,500 से अधिक परिवारों को रोजगार भी मिला है।

60 साल में पहली बार नाहल नदी से 75 किमी क्षेत्र में आई हरियाली

रामपुर में उप-सतही बांध का पहला सफल प्रयोग

मुख्य विकास अधिकारी नंद किशोर कलाल ने बताया कि रामपुर में नदी पुनर्जीवन को सफल बनाने के लिए पहली उप-सतही बांध तकनीक का उपयोग किया गया। यह तकनीक सैनानी नदी पर प्रयोग की गई, जिससे भूमिगत जल सतह पर आकर नदी प्रवाह को पुनर्जीवित करता है। इसका नतीजा है कि जल प्रवाह फिर से शुरू हुआ और आसपास की भूमि फिर से उपजाऊ बन गई। अबतक ये तकनीक दक्षिण भारत की नदियों के लिए प्रयोग की गई है।

नईया, आरिल, नीली और रेवती नदियों का पुनरुद्धार, हजारों को मिला रोजगार

नईया नदी : विकासखंड स्वार में स्थित 14 किमी लंबी नदी को पुनर्जीवित कर 42,648 मानव दिवस सृजित किए गए और 465 परिवारों को रोजगार मिला। यह नदी हसनपुर उत्तरी, लाडपुर सेमरा, खुशहालपुर, धर्मपुर उत्तरी, मानपुर उत्तरी और शिवनगर लौहारी से होकर बहती है।

आरिल नदी : शाहबाद विकासखंड की 15 किमी लंबी आरिल नदी को पुनर्जीवन देने में 4,260 मानव दिवस सृजित हुए। यह नदी नादरगंज, खंजीपुरा, भगवतीपुर, ढकिया, करैथी और खंदेली ग्राम पंचायतों से होकर बहती है।

नीली नदी : चमरौआ विकासखंड की 12 किमी लंबी इस नदी को पुनर्जीवित कर 36,000 मानव दिवस सृजित किए गए और 620 परिवारों को रोजगार प्राप्त हुआ।

रेवती नदी : चमरौआ विकासखंड की 12 किमी लंबी रेवती नदी 7 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरती है। इसके कायाकल्प में 27,000 मानव दिवस सृजित हुए और 545 परिवारों को रोजगार मिला।

स्वच्छ गंगा मिशन से मिल रही ताकत, नदियों से प्रवाहित हो रही समृद्धि

छोटी नदियों के पुनरुद्धार के पीछे राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की बड़ी भूमिका है। युद्धस्तर पर किए जा रहे प्रयासों से सूखी नदियां फिर से जीवंत हो रही हैं और किसानों के जीवन में हरियाली लौट रही है।

रामपुर की नदियों के पुनर्जीवन से सिंचाई की सुविधा के साथ रोजगार भी खूब मिला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप अब यह कहावत साकार हो रही है कि ‘जहां बहती है नदी, वहीं लौटती है समृद्धि’। रामपुर की नदियों के पुनर्जीवन से न सिर्फ जल स्तर सुधरा है बल्कि किसानों को सिंचाई सुविधा और रोजगार भी मिला है। यह प्रयास न सिर्फ पारिस्थितिक संतुलन के लिए लाभकारी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।

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