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81 परियोजनाओं के लिए 8767 करोड़ रुपये मंजूर,60,000 घरों का निर्माण कार्य पूरा करना संभव हो पाएगा

वित्त मंत्री ने रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने हेतु ‘संकटग्रस्त आवासीय परियोजनाओं के लिए स्पेशल विंडो’ पर समीक्षा बैठक की

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्रालय के सचिवों और भारतीय स्टेट बैंक, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड तथा एसबीआई कैप्‍स वेंचर्स लिमिटेड (एसवीएल) की वरिष्ठ प्रबंधन टीम के साथ किफायती एवं मध्‍यम आय आवास के लिए स्‍पेशल विंडो (एसडब्‍ल्‍यूएएमआईएच) के कार्य-प्रदर्शन की समीक्षा की। फंड ने अब तक 8767 करोड़ रुपये के निवेश वाली 81 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

‘एसडब्‍ल्‍यूएएमआईएच निवेश कोष I’ ने एक नीतिगत घोषणा से लेकर जमीनी स्‍तर पर परिचालन संबंधी पहल तक अपनी प्रगति सुनिश्चित कर ली है । इसने 81 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है, जिससे पूरे भारत में लगभग 60,000 घरों का निर्माण कार्य पूरा करना संभव हो पाएगा। ये परियोजनाएं बड़े शहरों सहित कई बाजारों जैसे कि एनसीआर, एमएमआर, बेंगलुरू, चेन्नई एवं पुणे और इसके साथ ही टि‍यर-2 स्थानों जैसे कि करनाल, पानीपत, लखनऊ, सूरत, देहरादून, कोटा, नागपुर, जयपुर, नासिक, विजाग, चंडीगढ़ इत्‍यादि में फैली हुई हैं । इन परियोजनाओं में से 18 परियोजनाओं में निवेश को अंतिम मंजूरी दे दी गई है और 7 आवासीय परियोजनाओं में वितरण विभिन्न चरणों में है ।

सहायता के प्रावधान या व्‍यवस्‍था के लिए 353 संकटग्रस्त (स्ट्रेस्ड) परियोजनाओं के आवेदनों पर गौर किया जा रहा है। इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि स्‍पेशल विंडो द्वारा इन निर्माण स्थलों पर सक्रियता सुनिश्चित करने से विभिन्न कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, यह फंड लंबे समय से अटकी पड़ी उन परियोजनाओं के 15,000 घर खरीदारों को राहत देने के लिए विभिन्‍न विकल्पों का सक्रियतापूर्वक आकलन कर रहा है, जो समस्‍या समाधान के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं।

वित्त मंत्री ने स्‍पेशल विंडो के कार्य-प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। पूंजी की लागत को घटाकर 12% करने के लिए फंड द्वारा हाल ही में की गई पहल के परिणामस्वरूप स्‍पेशल विंडो के तहत निर्धारित वित्‍तपोषण मानदंडों को पूरा करने वाली परियोजनाओं की संख्या बढ़ गई है। मौजूदा कर्जदाताओं की ओर से भागीदारी में तेजी लाने के लिए स्‍पेशल विंडो द्वारा उठाए गए कदमों को सराहते हुए श्रीमती सीतारमण ने सुझाव दिया कि निजी और सार्वजनिक दोनों ही बैंकों, एनबीएफसी एवं एचएफसी को स्‍पेशल विंडो को एक हितधारक के रूप में देखना चाहिए और संकटग्रस्त परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने में अपने सहयोग को बढ़ाना चाहिए। टीम ने वित्त मंत्री को फंड द्वारा तैयार की जा रही नियंत्रण व्‍यवस्‍थाओं के बारे में भी बताया, जिनका उद्देश्‍य परियोजना की प्रगति की निगरानी करना और परियोजना की प्रगति के अनुरूप ही निवेश में उपयुक्‍त फेरबदल करके विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। इन कदमों से परियोजना संबंधी नकदी के प्रवाह की जवाबदेही और फंड के अन्‍यत्र उपयोग की प्रवृत्ति की समाप्ति‍ की दृष्टि से इस सेक्‍टर में अधिक पारदर्शिता भी आएगी।

समीक्षा बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने आर्थिक कार्य विभाग से ‘एसडब्‍ल्‍यूएएमआईएच निवेश कोष I’ के कार्य-प्रदर्शन की बारीकी से निगरानी करने को कहा, ताकि फंड द्वारा जुटाई गई पूंजी से संकटग्रस्त परियोजनाओं का त्‍वरित कार्यान्‍वयन और इस प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाली किसी भी बाधा को दूर करना सुनिश्चित किया जा सके। श्रीमती सीतारमण ने यह इच्‍छा भी जताई कि परियोजनाओं के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए तेजी से प्रयास किए जाएं, जिसके लिए अंतिम छोर तक वित्तपोषण को मंजूरी दे दी गई है। इस फंड में विशेष अधिदेश द्वारा प्रदान किए गए अवसर और मौजूदा परियोजना फाइनेंसरों की ओर से सक्रिय सहयोग को घर खरीदारों को तत्काल राहत प्रदान करने के इस उद्देश्य की पूर्ति की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि यह स्‍पेशल विंडो एक अभूतपूर्व पहल है जिसने रियल एस्टेट सेक्‍टर को असाधारण सहायता प्रदान की है और भारी उथल-पुथल वाली आर्थिक परेशानियों के बावजूद इसे व्‍यापक सकारात्‍मक बदलाव के मुकाम पर ला दिया है।

वित्त मंत्री ने सीपीएसई के पूंजी व्यय पर की दूसरी समीक्षा बैठक

केन्द्रीय वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस वित्त वर्ष (एफवाई) में पूंजी व्यय की समीक्षा के लिए आज नागर विमान और इस्पात मंत्रालयों के सचिवों, चेयरमैन रेलवे बोर्ड (सीआरबी) के साथ ही इन मंत्रालयों से संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के केन्द्रीय उपक्रमों (सीपीएसई) के सीएमडी के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक की। यह समीक्षा बैठकों की श्रृंखला की दूसरी बैठक थी, जो वित्त मंत्री कोविड-19 महामारी की पृष्ठभूमि में आर्थिक विकास को गति देने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ कर रही हैं।

वित्त वर्ष 2020-21 के लिए इन सीपीएसई का कुल पूंजी व्यय लक्ष्य 24,663 करोड़ रुपये है। वित्त वर्ष 2019-20 में इन 7 सीपीएसई के लिए 30,420 करोड़ रुपये के लक्ष्य की तुलना में 25,974 करोड़ रुपये पूंजी व्यय (कैपेक्स) हुआ, जो लक्ष्य की तुलना में 85 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही के दौरान कैपेक्स 3,878 करोड़ रुपये (13 प्रतिशत) था और 2020-21 की पहली तिमाही में यह 3,557 करोड़ रुपये (14 प्रतिशत) रहा । भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने में सीपीएसई की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बेहतर प्रदर्शन सीपीएसई को प्रोत्साहित किया और वित्त वर्ष 2020-21 के लिए उपलब्ध कराए गए पूंजी परिव्यय का उचित तथा समयबद्ध तरीके से व्यय सुनिश्चित करने के लिए कहा। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि सीपीएसई के बेहतर प्रदर्शन से अर्थव्यवस्था को कोविड-19 के प्रभाव से व्यापक स्तर पर उबारने में सहायता मिल सकती है ।

वित्त मंत्री ने संबंधित सचिवों और चेयरमैन रेलवे बोर्ड से वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही के अंत तक पूंजी परिव्यय का 50 प्रतिशत पूंजी व्यय सुनिश्चित करने के क्रम में सीपीएसई के प्रदर्शन पर नजर रखने और इसके लिए उपयुक्त योजना बनाने के लिए कहा। श्रीमती सीतारमण ने कहा कि लंबित मुद्दों को तत्काल डीईए/डीपीई/डीआईपीएएम के सामने उठाया जाना चाहिए, जिससे उनका समाधान निकाला जा सके। वित्त मंत्री ने कहा कि वह हर महीने सीपीएसई के कैपेक्स के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए बैठक करेंगी । सीपीएसई ने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के कारण उनके सामने आ रहीं बाधाओं पर विचार विमर्श किया। वित्त मंत्री ने कहा कि असाधारण परिस्थितियों में सामूहिक प्रयासों के साथ असाधारण प्रयास करने होते हैं और हमें न सिर्फ बेहतर प्रदर्शन करना है, बल्कि बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की सहायता भी करनी है ।

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