State

मणिपुर :छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन का अंत

इंफाल । केंद्र और राज्य के साथ लंबी चली वार्ता के बाद मणिपुर में एक प्रतिबंधित यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) ने एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक पोस्ट कर खुशी जाहिर की। इससे पहले, मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा था कि एक प्रतिबंधित संगठन के साथ बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि बहुत जल्द एक बड़े भूमिगत संगठन के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर होंगे।

यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) ने केंद्र और मणिपुर सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। छह दशक लंबे सशस्त्र आंदोलन के अंत का प्रतीक माना जा रहा समझौता यूएनएलएफ पाम्बेई समूह के सदस्यों की मौजूदगी में हुआ। समझौते के लिए सभी लोग राष्ट्रीय राजधानी में गृह मंत्रालय पहुंचे।

अमित शाह ने किया पोस्ट

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि ‘एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल हुआ!!! पूर्वोत्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए मोदी सरकार के अथक प्रयासों ने पूर्ति का एक नया अध्याय जोड़ा है क्योंकि यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) ने आज एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। मणिपुर का सबसे पुराना सशस्त्र समूह यूएनएलएफ हिंसा को त्यागने और मुख्यधारा में शामिल होने के लिए सहमत हो गया है। मैं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में उनका स्वागत करता हूं और शांति और प्रगति के पथ पर उनकी यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’

मणिपुर की जनजातीय आबादी

इस साल मैतई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलो में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किए थे, जिसके बाद से राज्य में भड़की हिंसा में 180 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। मैतई राज्य की आबादी का 53 फीसदी हिस्सा हैं और उनमें से अधिकांश इंफाल घाटी में रहते हैं। जबकि नागा और कुकी समेत अन्य आदिवासी आबादी का 40 फीसदी हैं, जो खासतौर पर राज्य के पहाड़ी जिलों में रहते हैं।(वीएनएस)

BABA GANINATH BHAKT MANDAL  BABA GANINATH BHAKT MANDAL

Related Articles

Back to top button