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फाइनेंशियल टाइम्स दुष्प्रचार की बेशर्मी पर उतरा: अडानी समूह

अहमदाबाद : अडानी समूह ने सोमवार को कहा कि ब्रिटेन का अखबार फाइनेंशियल टाइम्स और उसके लिए काम करने वाले वैश्विक स्तर पर समूह की प्रतिष्ठा मलिन करने का एक नया प्रयास करने में लगा है और इसके लिए अपनी एक प्रस्तावित रिपोर्ट में पुराने तथा निराधार आरोपों को दोहराने की बेशर्मी पर उतर रहा है।अडानी समूह ने कहा है कि कोयला आयात का मूल्य ऊंचा दिखाने के मामले में समूह के खिलाफ अखबर की एक प्रस्तावित रिपोर्ट में पुराने और निराधार आरोपों को नए और आधे-अधूरे भ्रामक रूप में परोसने की चतुराई करने की कोशिश की जा रही है।

समूह ने एक विज्ञप्ति में कहा कि अखबार का यह प्रयास जनहित की आड़ में निहित स्वार्थों को आगे बढ़ाने के उनके बड़े अभियान का हिस्सा है।समूह ने यहां जारी विज्ञपति में कहा कि अब फाइनेंशियल टाइम्स में लिखने वाला डैन मैक्रम को आगे किया गया है। इसी व्यक्ति ने संगठित अपराध और भ्रष्टाचार पर रिपोर्ट की परियोजना (ओसीसीआरपी) के साथ मिलकर 31 अगस्त 2023 को अडानी समूह के खिलाफ एक झूठी कहानी पेश की थी।विज्ञप्ति में कहा गया है कि ओसीसीआरपी को अमेरिकी उद्यमी जॉर्ज सोरोस से धन मिलता है जो अडानी समूह के खिलाफ अपनी शत्रुता का भाव पहले प्रकट कर चुका है ।

आडानी समूह की विज्ञप्ति में कहा गया है कि फाइनेंशियल टाइम्स पहली इस तरह के अपने प्रयास में पहले विफल हो चुका है। वह एक बार फिर कोयले के आयात का मूल्य ऊंचा दिखाने के पुराने और निराधार आरोप को उछाल कर समूह को वित्तीय रूप से अस्थिर करने का नया प्रयास कर रहा है।बयान में कहा गया है कि एफटी की ताजा रिपोर्ट में राजस्व खुफिया विभाग (डीआरआई) के 30 मार्च 2016 के जिस सर्कुलर को आधार बनाया गया है वह इस अखबार के बेशर्म एजेंडा को उजागर करता है। समूह का कहना है कि उस सर्कुलर में भारत के वित्त मंत्रालय की इस एजेंसी ने कोयला आयात करने वाली भारत की बड़ी बड़ी 40 कंपनियों का उल्लेख है पर अखबर की रिपोर्ट में केवल अडानी समूह की कंपनी का नाम लिया गया है।

विज्ञप्ति के अनुसार इस सूची में न केवल भारत के कुछ प्रमुख निजी बिजली उत्पादक रिलायंस इंफ्रा, जेएसडब्ल्यू स्टील्स और एस्सार शामिल हैं, बल्कि कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु आदि की राज्य बिजली उत्पादक कंपनियां और एनटीपीसी और एमएसटीसी भी शामिल हैं।अडानी समूह ने उल्लेख किया है कि इन 40 आयातकों में से एक, नॉलेज इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में डीआरआई के कारण बताओ नोटिस को अपीलीय न्यायाधिकरण (सेसटैट) द्वारा रद्द कर दिया गया था। यही नहीं डीआरआई की अपील को उच्चतम न्यायालय ने वापस ली गयी अपील के रूप में 24 जनवरी 2023 को खारिज कर दिया था और कहा था “हम व्यर्थ की मुकदमेबाजी में न पड़ने के सरकार के रुख की सराहना करते हैं।

”समूह ने कहा कि अखबार की प्रस्तावित कहानी में इस तथ्य को भी नजरअंदाज करता है कि भारत में दीर्घकालिक आपूर्ति के आधार पर कोयले की खरीद एक खुली, पारदर्शी, वैश्विक बोली प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है जिससे मूल्य में हेरफेर की कोई भी संभावना समाप्त हो जाती है। इसी तरह केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) द्वारा बिजली दर का निर्धारण एक खुली, पारदर्शी, स्वतंत्र प्रक्रिया के तहत होता है।समूह ने कहा, “यह केवल संयोग नहीं है कि ऐसी रिपोर्टें भारत की अदालतों में महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की तारीखों से ठीक पहले सामने प्रकट होने की अद्भुत क्षमता रखती है।” अडानी समूह ने ऐसे सभी आरोपों को झूठी और निराधार बताते हुए खारिज किया है। (वार्ता)

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