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ई-संजीवनी एप के जरिये मरीजों के घर के पास मिल रहा इलाज

अप्रैल 2020 से 31 जुलाई 2023 तक टेली कन्सल्टेशन के जरिए हो चुका है 55259 मरीजों का इलाज

  • ई-संजीवनी एप के लिए 71 से अधिक एमबीबीएस चिकित्सकों की बन चुकी है आईडी
  • अब सीएचओ भी ईं संजीवनी एप से करा रहे मरीजों का इलाज

महराजगंज। अब ई-संजीवनी एप मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है। अब इसके जरिए अधिक से अधिक मरीज घर के पास स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। इसके लिए व्यवस्था और प्रभावी बनाई गयी है। इस सेवा की शुरुआत से ( अप्रैल 2020 से 31 जुलाई 2023) अब तक टेली कन्संल्टेंसी के जरिए 55259 मरीजों का इलाज हो चुका है।

एसीएमओ आरसीएच डाॅ.राकेश कुमार ने बताया कि 71 से अधिक चिकित्सकों को न केवल इस सेवा का व्यवहारिक ज्ञान दे दिया गया है बल्कि उनकी आईडी भी जनरेट कर दी गयी है। रोस्टर के हिसाब से चिकित्सक प्रति दिन अपने निर्धारित स्वास्थ्य केन्द्र पर सुबह 10 से 12 बजे तक ई-संजीवनी एप के जरिए स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रदान कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ई-संजीवनी एप से मरीज को काफी लाभ रहा है। सुविधा सुदृढ़ हो जाने से गांव के पास इलाज की सुविधा मिल रही है। मरीजों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ता है। गांव के करीब स्वास्थ्य उपकेन्द्र पर जाकर इलाज की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं । उन्हें इलाज के लिए अनावश्यक भाग दौड नहीं करनी पड़ रही है। आने जाने में व्यय होने वाला धन भी बच रहा है। उन्होंने कहा कि अभी जिले में तैनात अन्य एमबीबीएस चिकित्सकों की भी आईडी जनरेट की जाएगी।

डिप्टी सीएमओ डाॅ.वीर विक्रम सिंह ने बताया कि जिले में कुल 199 हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर सक्रिय हैं, जहां पर जाकर तैनात सीएचओ के माध्यम से मरीजों का ई-संजीवनी के जरिए इलाज मुहैया कराया जा रहा है। वह खुद ही टेली कन्संल्टेंसीे के जरिए मरीजों का इलाज करते रहते हैं।

क्या है ई-संजीवनी एप :

डिप्टी सीएमओ डाॅ.वीर विक्रम सिंह ने बताया कि ई-संजीवनी एप एक टेली कन्संल्टेशन एप है, जिसके जरिए मरीज अपने गांव के समीप किसी भी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जाकर बेहतर चिकित्सकीय सेवाएं प्राप्त कर सकता है। एप के माध्यम से चिकित्सकों को सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों से जोड़ दिया गया है। इसमें प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अलावा विशेषज्ञ और मेडिकल काॅलेज के भी चिकित्सक शामिल हैं।

एप पर मरीजों को सलाह और नुस्खा भी पीडीएफ फार्म में प्राप्त होता है, जिसमें चिकित्सक का नाम और पंजीकरण संख्या भी दर्ज होती है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं ईं-संजीवनी एप के जरिए प्रतिदिन अधिक से अधिक मरीजों का इलाज करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पहले जब मरीज इलाज कराने के लिए प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ( पीएचसी और सीएचसी) पर इलाज कराने जाते थे तो आने जाने में धन और समय दोनों व्यय होता था, ईं-संजीवनी से घर के पास ही इलाज मिल जाता है।

ई- संजीवनी एप से मरीजों का इलाज करने वाले टाप तीन के चिकित्सक

डाॅ. संदीप मद्धेशिया- 1368
डिप्टी सीएमओ डाॅ. वीर विक्रम सिंह 1011
डाॅ.कुन्दन कुमार झा- 709

दो सीएचओ को मिला प्रशस्ति पत्र

डिप्टी सीएमओ ने बताया कि जिले में ईं-संजीवनी एप से इलाज कराने में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दो सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) उमाशंकर यादव ( सराय खुटहा सदर) तथा मधुसूदन ( चिउटहा सिसवा) को प्रमुख सचिव ( चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जून 2023 में प्रशस्ति पत्र दिया है। अगर बात करें जुलाई माह में टेली कनसंलटेंशन के माध्यम से के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले तीन सीएचओ की तो कुमारी रानी सिंह बरगदवा माधोपुर ( घुघली) ने टेली कन्संल्टेशन के जरिए 124, नूजहद खां मोहनापुर ( लक्ष्मीपुर) ने 121 तथा पिंकी करमहा ( सदर) 110 मरीजों का इलाज कराया है।

घर के पास मिला इलाज

सदर ब्लाॅक के ग्राम पंचायत खुटहा निवासी सत्यम (23) ने बताया कि उनके सहित परिवार के तीन सदस्य अंतिमा(20) और दीपक ( 18) के आँख में दर्द, पानी गिरने, लाल हो जाने की शिकायत थी। गांव में ही स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर इलाज कराने गए। वहां पर तैनात सीएचओ उमाशंकर यादव ने टेली कन्संल्टेंसी के जरिए चिकित्सक से सलाह लेकर दवा दिया। तीनों लोग ठीक हो गये। इस तरह से घर के पास ही इलाज मिल गया।

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