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राजनाथ ने स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत पर योगाभ्यास किया

नयी दिल्ली : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर सशस्त्र बलों और तटरक्षक कर्मियों के साथ योगाभ्यास किया तथा लोगों से योग को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण के लिए दिनचर्या में शामिल करने की अपील करते हुए कहा कि इसमें कुछ खर्च नहीं होता और यह शरीद को अत्यधिक फायदा पहुंचाता है।इस मौके पर नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार, उनकी पत्नी और नौसेना कल्याण एवं वेलनेस एसोसिएशन की अध्यक्ष श्रीमती कला हरि कुमार, मुख्य हाइड्रोग्राफर वाइस एडमिरल अधीर अरोड़ा, कार्मिक सेवा नियंत्रक वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन और दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल जे. सिंह तथा 120 अग्निवीरों सहित 800 से अधिक नौसैनिककर्मियों ने योगाभ्यास में हिस्सा लिया।

योगाभ्यास सत्रों के बाद रक्षा मंत्री ने योग प्रशिक्षकों को सम्मानित किया और प्रतिभागियों से बातचीत की। उन्होंने योगाभ्यास के वैश्विक उत्सव को देश के लिए गौरव का क्षण बताया क्योंकि विश्व भारतीय संस्कृति को स्वीकार कर रहा है और अपना रहा है। उन्होंने विश्व भर में योग के प्रसार के लिए सरकार के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि भारत विश्व को यह संदेश देने में सफल रहा है कि यह अभ्यास पूरी मानवता को फायदा पहुंचाता है।श्री सिंह ने जनसमुदाय से योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की अपील की क्योंकि यह मानव को प्रकृति और परमात्मा से जोड़ने के साथ साथ शरीर को मन के साथ जोड़ता है तथा आध्यात्मिक चेतना पाने के मार्ग पर अग्रसर करता है। उन्होंने योग को ‘अमृत’ के बराबर बताया जो शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है और लोगों के जीवन को आरोग्य बनाते हुए मन, शरीर और आत्मा के पोषण के लिए संभावनाओं के द्वार खोलता है।

रक्षा मंत्री ने शरीर की तुलना कंप्यूटर के हार्डवेयर और मस्तिष्क की तुलना सॉफ्टवेयर से की और कहा कि योग कुशल समग्र क्रियाकलाप के लिए दोनों पहलुओं को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा, ‘योग एक शून्य बजट माध्यम है जो शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बाधाओं को नकारता है। इसमें शून्य निवेश शामिल है और यह अविश्वसनीय लाभ प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि योग का महत्व कोविड-19 महामारी के दौरान देखा गया था। उस दौरान जिन लोगों ने योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बना लिया था, वे वायरस से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुए थे। विभिन्न शोधों के अनुसार, योग ने महामारी के दौरान लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।(वार्ता)

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