Crime

18 लाख की चोरी करने वाले पांच अभियुक्त धराये

वाराणसी। सिगरा थाना क्षेत्र गांधी नगर सोनिया  बीते 31 मार्च को हुई 18 लाख रुपये के गहने की चोरी सिगरा पुलिस ने पांच अभियुक्तों को बरेली से दबोचा। यहां कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर वाराणसी लाया गया। यहां कोर्ट में पेश कर सभी को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेगी। पुलिस ने अभियुक्तों के पास से चोरी के 6.21 लाख नकद, 170 ग्राम पीली धातु और 11 लाख रुपये की 13 ग्राम का चेन मय लॉकेट बरामद की। अभियुक्तों की पहचान वशीम खान, शहकार खान, फरहत यार खान, दुशयंत सिंह और विक्की वर्मा गोपाल के तौर पर हुई, सभी बरेली के रहने वाले हैं। पर्दाफाश एडिशनल सीपी अपराध एवं मुख्यालय संतोष कुमार सिंह ने किया।

सिगरा थाना प्रभारी राजू सिंह ने बताया कि गांधी नगर थाना सिगरा में 18 लाख की चोरी हुई थी। इस मामले में पीड़िता सुचरिता गुप्त ने सिगरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। घटना के दिन वह पास के ही एक निजी स्कूल निकली थी और उनका पति दस मिनट बाद नौकरी के लिए  निकले। स्कूल छोड़ने के कुछ देर बाद जब सुचरिता का ड्राइवर घर पहुंचा तो देखा कि फ्लैट का दरवाजा खुला है। अंदर जाकर देखा तो आलमारी का लॉकर टूटा है। उसने मालकिन को मामले से अवगत कराया। मौके पर पहुंची सुचरिता ने सिगरा थाना में मुकदमा दर्ज कराया। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम चोरी के पर्दाफाश करने में जुटी थी। इस बीच पुलिस के हाथ सुराग हाथ लगा और उक्त आधार पर बरेली पहुंच पांच अभियुक्तों को दबोचा। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि सभी बरेली से कार लिया और 30 मार्च को प्रयागराज पहुंचे। कार पर वाराणसी का नंबर प्लेट लगाया था।

प्रयागराज में भी सभी ने कई मकानों का खंगाला लेकिन सफलता नहीं मिली। 31 को सभी वाराणसी पहुंचे इसके पहले कार का नंबर बदल दिया और लखनऊ का नंबर प्लेट लगाया। कार से बनारस पहुंचने पर यहां बंद पड़े कई फ्लैट का खंगाला लेकिन चोरी में सफल नहीं हुए। इस सभी सिगरा थाना क्षेत्र के गांधी नगर में पहुंचे। यहां सुचरिता गुप्त के फ्लैट का ताला तोड़ने में सफल हो गये और 18 लाख के जेवरात समेत चार हजार नकदी पर हाथ साफ किया। वारदात को अंजाम देकर  बिहार निकल गये और यहां पटना पहुंचकर एक मकान में चोरी की। यहां से सभी झारखंड गये और वहां भी एक मकान को निशाना बनाया और चोरी की। किसी को शक ना हो इसलिए चोरी को अंजाम देने के बाद हर बार कार का नंबर प्लेट बदल देते थे। इसके बाद सभी अपने गृह जनपद बरेली पहुंचे और यहां चोरी के माल को ठिकाने लगाया और बदले में नकदी ली।

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