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बिहार में नई शिक्षक नियमावली पर सियासत तेज

पटना । बिहार में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नई नियमावली बनाई गई है। नई नियमावली के लागू होते ही प्रदेश में सियासत तेज हो गई। प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ सरकार को समर्थन दे रही भाकपा (माले) ने भी नियमावली का जमकर विरोध किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने शिक्षकों की नई नियुक्ति नियमावली को धोखा करार दिया है। शिक्षक अभ्यर्थियों को फिर एक बार ठगा जा रहा है। इधर, भाकपा माले ने भी नई शिक्षक नियमावली सातवें चरण शिक्षक अभ्यर्थियों और वर्षों से कार्यरत नियोजित शिक्षकों के लिए निराशाजनक बताया है।

इतना भद्दा मजाक मत कीजिए, पूर्व उप मुख्यमंत्री का सरकार से आग्रह

भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा कि वर्ष 2019 में टीईटी और एसटीईटी उत्तीर्ण छात्रों को एक और परीक्षा देनी पड़ेगी। नियोजित शिक्षकों को सरकारी कर्मी बनने के लिए भी पुन: परीक्षा देनी पड़ेगी। अब प्रत्येक विद्यालय में पुराने वेतनमान, नियोजित शिक्षक और नई नियमावली के तहत बहाल सरकारी शिक्षक यानी कुल 3 प्रकार के शिक्षक होंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि, इतना भद्दा मजाक शिक्षक अभ्यर्थियों के साथ कृपया मत कीजिए। बिहार मंत्रिमंडल ने सोमवार को राज्य विद्यालय अध्यापक (नियुक्ति, स्थानांतरण, अनुशासनिक कार्यवाही एवं सेवा शर्त) नियमावली 2023 को स्वीकृति दी। इसके तहत राज्य सरकार सीधे शिक्षकों की नियुक्ति करेगी। शिक्षक अब राज्यकर्मी होंगे।

अभ्यर्थियों से विश्वासघात, भाकपा-माले का विरोध

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि, सातवें चरण के शिक्षक अभ्यर्थियों को इस प्रक्रिया से मुक्त रखा जाना चाहिए और उन्हें पुराने तरीके से नियोजित किया जाना चाहिए। सातवें चरण के शिक्षक अभ्यर्थी तो उम्मीद कर रहे थे कि सरकार उनके लिए नोटिफिकेशन जारी करेगी, लेकिन अब वह एक और परीक्षा की बात कर रही है। यह उन अभ्यर्थियों से विश्वासघात है।(वीएनएस)

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