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मोदी की ‘वफादारी’ आजाद का असली चरित्र : कांग्रेस

नयी दिल्ली : कांग्रेस ने पार्टी के पूर्व नेता गुलाम नबी आजाद पर हमला करते हुए उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वफादार बताया और कहा कि यही उनका असली चरित्र है और इसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है।कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को ट्वीट करते हुए श्री आजाद पर हमला किया और कहा “ हर गुजरते दिन के साथ, गुलाम नबी आज़ाद अपने असली चरित्र और श्री मोदी के लिए अपनी वफादारी की नई गहराई तक उतर रहे हैं। हर दिन उनके विश्वासघात की सीमा बढ़ रही है और श्री मोदी के लिए वह वफादारी का प्रदर्शन करने के वास्ते वह निरंतर अपने स्तर से गिराते जा रहे हैं।”

उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर श्री आजाद के हमले को लेकर उनकी तीखी आलोचना करते हुए कहा “कांग्रेस नेतृत्व पर उनके घटिया बयान खबरों में बने रहने की उनकी हताशा और उनका असली चरित्र है। श्री आज़ाद ने कांग्रेस के साथ अपने दशकों के रिश्ते को तोड़ा है और खुद की डेमोक्रेटिक आज़ाद पार्टी-डीएपी बनाई। इसके लिए उनकी जितनी निंदा की जाए कम है।”प्रवक्ता ने कहा “कांग्रेस छोड़ने के बाद से ही वह पार्टी के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं और गांधी परिवार पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस नेतृत्व पर उनके अवमाननापूर्ण बयान प्रासंगिक बने रहने के लिए उनकी हताशा को दर्शाते हैं। मैं केवल इतना कह सकता हूं कि वह दयनीय है।”(वार्ता)

जासूसी के नये उपकरण ‘कॉग्नाइट’ की खरीद में जुटी है सरकार : कांग्रेस

कांग्रेस ने कहा है कि ‘न्यूनतम शासन और अधिकतम सेवा’ की बात करने वाली मोदी सरकार झूठ के सहारे चल रही है और उसकी असलियत सामने नहीं आए इसलिए ‘पेगासस’ की बदनामी के बाद अब जासूसी के लिए करोड़ों रुपए की लागत से ‘कॉग्नाइट’ उपकरण की खरीद कर रही है।कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार को अपने जासूसों पर भरोसा नहीं है इसलिए वह जासूसी संचार उपकरणों पर ज्यादा भरोसा कर रही है। पेगासस को लेकर पोल खुलने के बाद अब वह ‘कॉग्नाइट’ नाम के जिस नये जासूसी उपकरण को खरीद रही है वह पेगासस का विकल्प है और इसकी खरीद पर आम लोगों का 986 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

उन्होंने व्यापार डाटा के विवरणों को आधार बनाते हुए सरकार से सवाल किया है कि क्या यह सच नहीं है कि रक्षा मंत्रालय के माध्यम से पेगासस के विकल्प के रूप से ‘कॉग्नाइट’ से कुछ जासूसी ‘संचार उपकरण’ खरीदे गये हैं। उनका कहना था कि सरकार को बताना चाहिए कि क्या किसी मंत्रालय ने इस जासूसी उपकरण की खरीद के अनुरोध का प्रस्ताव किया है और यदि किया है तो उस मंत्रालय का नाम सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इसमें यह भी खुलासा होना चाहिए कि कॉग्नाइट संचार उपकरण पर कुल कितना खर्च आया है।प्रवक्ता ने उद्योगपति अडानी का नाम लिये बिना कहा कि सरकार शायद अपने ‘परम मित्र’ को बचाने के लिए यह सारे उपाय कर रही है।

पहले कैंब्रिज एनालिटिका-सीए, फिर ‘पेगासस’ और ‘टीम जॉर्ज’ के नेतृत्व में इज़राइली कॉन्ट्रैक्ट हैकर्स का इस्तेमाल किया और अब देश की राजनीतिक व्यवस्था तथा लोकतंत्र में दखल देने के लिये नये जासूसी उपकरण की तलाश की जा रही है। ऐसा लगता है कि ‘मित्र’ को बचाने के लिए सरकारी तंत्र और निधि का इस्तेमाल कर विपक्ष पर तांक-झाँक करना इस सरकार की मजबूरी है और इसीलिए हज़ार करोड़ रुपए ख़र्च कर लोकतंत्र को कुचलने का काम करने का प्रयास किया जा रहा है।(वार्ता)

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