राहुल की सदस्यता: विपक्ष भड़का, भाजपा ने कहा कानून सबके लिए समान
राहुल की सदस्यता खत्म करने का मुद्दा देशभर में घर-घर तक पहुंचाएगी कांग्रेसः रमेश
नयी दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी को गुजरात की एक अदालत की ओर से मानहानि के मामले में दो साल की सजा दिये जाने के फैसले के एक दिन बाद शुक्रवार को लोकसभा से उनकी सदस्यता रद्द किये जाने पर कांग्रेस समेत प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे संघ परिवार की ओर से देश के लोकतंत्र पर जारी हमले की ताजा कड़ी करार दिया है, जबकि सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस कार्रवाई को न्यायोचित ठहराते हुए कहा है कि कानून सबके लिए एकसमान है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने पार्टी मुख्यालय पर संवाददाताओं से कहा,“ राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक सभा में प्रधानमंत्री के सरनेम (जाति के नाम) के साथ अपशब्द जोड़ा था। जातिवाचक शब्द का प्रयोग करके अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। इस आरोप पर सूरत की एक अदालत ने जो फैसला सुनाया है, उससे साफ है कि भारत की कानून-व्यवस्था और प्रजातांत्रिक पद्धति से ऊपर कोई नहीं है। ” उन्होंने कहा “ आज जो फैसला हुआ है, उन्हीं की सरकार के लाये गये आर्डिनेंस के आधार पर हुआ है। जब राहुल की सदस्यता गयी तो उनकी पार्टी के लोग हाय-तौबा मचा रहे हैं, उनके चाटुकार छाती पीट रहे हैं। ”भाजपा नेता एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, “ अभद्र भाषा का प्रयोग, अपमान करने का काम, अपशब्द बोलना राहुल गांधी की आदत बन गयी थी। उनको लगता था कि कुछ भी कह दो, कर दो, आपको देश में कोई कुछ बोल नहीं सकता। वह अपने आपको सभी चीजों से ऊपर समझते थे। ”
केरल की वायनाड लोकसभा सीट से निर्वाचित श्री गांधी ने लोकसभा से अपनी सदस्यता समाप्त किये जाने के मुद्दे पर कहा कि वह देश की आवाज की लड़ाई लड़ रहे हैं और इसके लिए उन्हें जो भी सजा मिले, उसका सामना करने के लिए तैयार हैं।उन्होंने कहा , “ मैं भारत की आवाज़ के लिए लड़ रहा हूं। मैं हर कीमत चुकाने को तैयार हूं।”कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि श्री गांधी की लोकसभा की सदस्यता सच बोलने के कारण समाप्त की गयी है। उन्होंने कहा, “ हम लोग सदन के अंदर और बाहर तथा आम सभाओं में सच बोलते रहेंगे। लोकतंत्र को बचाने के लिए पार्टी नेताओं को जेल भी जाना पड़े, तो जायेंगे। आज भी 140 लोगों को हिरासत में लिया गया है। अडानी मामले की संयुक्त जांच समिति से जांच की मांग आगे भी बनी रहेगी। ”
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने श्री गांधी के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी (श्री गांधी) आवाज बुलंद है तथा सत्तालोभी और तानाशाह के सामने वह कभी झुकने वाले नहीं है। उन्होंने श्री मोदी को संबोधित करते हुए ट्वीट किया, “ मोदीजी आप मेरे परिवार को परिवारवादी कहते हैं, जान लीजिए, इस परिवार ने भारत के लोकतंत्र को अपने खून से सींचा…जिसे आप ख़त्म करने में लगे हैं। इस परिवार ने भारत की जनता की आवाज़ बुलंद की और पुश्तों से सच्चाई की लड़ाई लड़ी। हमारी रगों में जो खून दौड़ता है, उसकी एक ख़ासियत है, आप जैसे सत्तालोभी तानाशाह के सामने कभी नहीं झुका और कभी नहीं झुकेगा। आप कुछ भी कर लीजिए।”
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने श्री गांधी को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य किया जाना संघ परिवार की ओर से देश के लोकतंत्र पर जारी हमले की ताजा कड़ी है। केंद्रीय मंत्रियों से मिलने दिल्ली के दौरे पर आये श्री विजयन ने अपने बयान में कहा, “ विरोध को दबाने के लिए बल का प्रयोग एक फासीवादी तरीका है।तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने ट्वीट में कहा, “ पीएम मोदी के न्यू इंडिया में विपक्षी नेता भाजपा का मुख्य निशाना बन गए हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि जहां आपराधिक पृष्ठभूमि वाले भाजपा नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया जाता है, वहीं विपक्षी नेताओं को उनके भाषणों के लिए अयोग्य ठहराया जाता है। उन्होंने कहा, “ आज हमने अपने संवैधानिक लोकतंत्र के लिए एक नया निम्न स्तर देखा है।”
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने कहा है कि श्री गांधी की संसद सदस्यता रद्द करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अहंकार और तानाशाही की पराकाष्ठा है। उन्होंने कहा ,“भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में आज का दिन काला दिवस है। श्री गांधी की संसद की सदस्यता से अयोग्य ठहराया जाना बेहद निंदनीय है। मोदी सरकार न केवल संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है, बल्कि अपनी नापाक हरकतों के लिए सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच संसद का भी इस्तेमाल कर रही है।”द्रविड़ मुननेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने श्री गांधी की लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराए जाने को ‘फासीवादी कार्रवाई’ और ‘प्रगतिशील लोकतांत्रिक ताकतों पर हमला’ करार दिया और इस निर्णय को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय पार्टी के नेता और एक सांसद के अपनी राय व्यक्त करने के मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार को दबाने के बराबर है। देश के सभी राजनीतिक दलों को इसका एहसास होना चाहिए और हमें एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए।”
शिवसेना नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, “ यह लोकतंत्र का सीधा जनसंहार है। सरकारी तंत्र दबाव में हैं। यह तानाशाही के अंत की शुरुआत है। हमारे देश में चोर को चोर कहना अपराध हो गया है। चोर और लुटेरे अभी भी आजाद हैं और श्री गांधी को सजा मिली। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। सभी सरकारी तंत्र दबाव में है। हम कांग्रेस के साथ हैं।” उन्होंने कहा कि श्री गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द करने की कार्रवाई के बाद, पूरे देश में हड़कंप मच गया है। देश भर की विपक्षी दलों के एकजुट होने की संभावना है। महाराष्ट्र में भी इसके कड़े नतीजे आने वाले हैं।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “आप उसे डराना चाहते हैं जो पूरे देश को कह रहा है, डरो मत।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम लिए बगैर उनकी ओर इशारा करते हुए कहा कि तानाशाह का सबसे बड़ा डर होता है कि उससे लोग डरना बंद न कर दें। आप उसे डराना चाहते हैं जो पूरे देश को कह रहा है “डरो मत” । उन्होंने कहा कि इंदिरा जी के साथ भी यही भूल की थी कुछ लोगों ने, बाकी फिर इतिहास है। यहीं मिलेंगे जनता की अदालत में जनता होगी, जननेता होगा..नहीं होगा तो सिर्फ़ डर और तानाशाह।
आम आदमी पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में वक्तव्य के दौरान कहा कि सरकार बुरी तरह से डरी हुई है और संवैधानिक संस्थानों को ध्वस्त करने का प्रयास चल रहा है।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा,“ जैसी भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उम्मीद थी, वैसा ही हुआ। श्री गांधी के चार साल पुराने बयान पर उनकी संसद की सदस्यता समाप्त कर दी। लोकतंत्र के मंदिर में नहीं बोलने दोगे, तो जनता की अदालत में जाएंगे।”शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने कहा कि कांग्रेस नेता श्री गांधी की लोकसभा सदस्यता को मनमाने ढ़ंग से अयोग्य ठहराया जाना स्वस्थ लोकतंत्र के हित में नहीं तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।
श्री गांधी को अयोग्य घोषित करने की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए शिअद प्रवक्ता डॉ दलजीत सिंह चीमा ने अपने बयान में कहा कि अदालत के फैसले के 24 घंटे के भीतर किसी सदस्य को अयोग्य घोषित करना सही नहीं, उस समय जब फैसले के खिलाफ अपील प्रक्रिया में हो तथा अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए उचित समय दिया जाना चाहिए था। लोकसभा अध्यक्ष को इस तरह से अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए था। इससे ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार पक्षपातपूर्ण तथा तानाशाही तरीके से काम कर रही है।
समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, “ भाजपा संविधान का गला घोट रही है। आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सदस्यता गई है, इसके पहले सपा नेता आजम खां और मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खां की सदस्यता छीन ली गई है। कानपुर के सपा विधायक की सदस्यता लेने के लिए अधिकारियों को साजिश और षडयंत्र के तहत लगाया जा रहा है। भाजपा सरकार साजिश और षडयंत्र के तहत अधिकारियों से विपक्ष के नेताओं को ऐसे मुकदमों में फंसाती है, जिससे उनकी सदस्यता चली जाये।”इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी समेत देश के विभिन्न शहरों में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
गौरतलब है कि सूरत की एक अदालत ने मानहानि मामले में गुरुवार को श्री गांधी को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनायी थी। कांग्रेस नेता को कर्नाटक में एक सभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जाति को लेकर की गयी एक टिप्पणी के आधार पर आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत के फैसले के परिप्रेक्ष्य में उन्हें लोकसभा सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया।
राहुल की सदस्यता खत्म करने का मुद्दा देशभर में घर-घर तक पहुंचाएगी कांग्रेसः रमेश
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द करने के मामले को पार्टी देशभर में ले जाएगी और उसके कार्यकर्ता इस प्रकरण पर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी करेंगे।कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में तथा कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी की मौजूदगी में आज शाम प्रदेश अध्यक्षों, विधायक दल के नेताओं एवं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई, जिसमे इस मुद्दे को देशभर में घर घर पहुंचाने का निर्णय लिया गया।उन्होंने कहा कि श्री गांधी की संसद सदस्यता जानबूझकर खत्म की गई है।
उनका कहना था कि श्री गांधी ने मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई इसलिए उनकी आवाज दबाने के लिए यह उन्होंने कहा कि श्री गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की सफलता से भाजपा घबराई हुई है और अब वह अडानी घोटाले पर लगातार बोल रहे हैं इसलिए यह सब हुआ।प्रवक्ता ने कहा कि यह काम सोच समझकर और क्रमवार किया गया। पहले 07 फरवरी को श्री गांधी ने मोदी-अडानी पर लोकसभा में भाषण दिया और 16 फरवरी को शिकायतकर्ता ने गुजरात न्यायालय से खुद का ही लिया स्टे वापस ले लिया। फिर 27 फरवरी को मामले की सुनवाई शुरु हुई और 17 मार्च को निर्णय रिजर्व कर लिया गया और 23 मार्च को फैसला आ गया। इससे साफ है कि सोच समझकर यह काम किया गया है।
राहुल गांधी की सदस्यता समाप्ति पर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग बात
वायनाड सीट (केरल) से निर्वाचित श्री राहुल गांधी को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिए जाने की अधिसूचना पर कानूनी पंडितों की अलग-अलग व्याख्या देखने को मिली है।कांग्रेस से लंबे समय तक जुड़े रहने के बाद, समाजवादी पार्टी के सहयोग से राज्य सभा सदस्य बने कपिल सिब्बल ने कहा कि कानून में लिखा है, “यदि आप किसी आपराधिक मामले में दोषी करार दिए जाते हो और आपको कम से कम दो साल की सजा सुनायी जाती है, तो आपकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है, लेकिन उन्होंने सूरत की अदालत द्वारा राहुल गांधी को मानहानि का दोषी करार दिए जाने के फैसले को, ‘अजीबो-गरीबो’ करार दिया है। ”उनका कहना है, “ कानून कहता है कि यदि किसी जुर्म में आपको दोषी करार दिया जाता है और आपको दो साल की सजा हो जाती है, तो आपकी सीट रिक्त हो जाती है। अध्यक्ष कानून के अऩुसार ही इस संबंध में कदम उठाते हैं। ”
कांग्रेस नेता और कानून के विशेषज्ञ पी चिदंबरम ने शुक्रवार को श्री गांधी को लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिए जाने की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद, ट्वीट किया,“ निर्णय 23 मार्च, अयोग्यता 24 मार्च। व्यवस्था ने जिस गति से काम किया है, वह चौंकाने वाला है। सोच-विचार और समझने या कानूनी समीक्षा पर जरा सा भी समय नहीं लगाया गया। ”कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने भी ट्वीट किया, “ कार्रवाई की रफ्तार से मैं चकित हूं, अदालत के निर्णय के 24 घंटे के अंदर (कार्रवाई) कर दी गयी, जबकि यह पता था कि (निर्णय के खिलाफ) अपील की जाएगी। यह बेदर्दी भरी राजनीति है और यह हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है। ”विभिन्न कानूनी विशेषज्ञों ने फैसला आने के बाद ही कहा था कि राहुल गांधी को लोकसभा सदस्यता से अयोग्य करार दिए जाने का प्रावधान तत्काल प्रभाव से स्वतः लागू हो गया है। भले ही न्यायालय ने उनकी जमानत मंजूर कर ली है।
वर्ष 2013 से लागू कानूनी संसोधनों के बाद ऐसी स्थितियों में बिहार के नेता लालू प्रसाद यादव, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता, राज्यसभा सदस्य रशीद मसूद और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और विधायक आजम खान सहित कई नेताओं की सदस्यता उनकी सजा घोषित होने से तत्काल बाद स्वतः समाप्त हो चुकी है।लोकसभा सचिवालय द्वारा श्री गांधी की सदस्यता समाप्त होने के संबंध में शुक्रवार को जारी अधिसूचना में यह स्पष्ट है कि कानून के अऩुसार, वायनाड से निर्वाचित इस सांसद की सदस्यता सूरत की अदालत का फैसला आने के साथ ही समाप्त हो गयी है।
अधिसूचना में कहा गया है, “ केरल के वायनाड संसदीय निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले लोकसभा सदस्य श्री राहुल गांधी को सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा अपराधिक वाद सीसी/18712/2019 मामले में दोषी घोषित किये जाने के परिणामस्वरूप उन्हें दोषी करार दिये जाने की तिथि अर्थात 23 मार्च 2023 से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 102 (1)(ई) के अनुसार तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1991 की धारा 8 के दृष्टिगत लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य करार दिया जाता है। ”श्री सिब्बल ने फैसले के बाद एक टीवी चैनल से कहा था कि श्री गांधी को सजा निलंबित किए जाने से कोई राहत नहीं मिलने वाली। उन्होंने कहा था कि यदि उनको दोषी करार दिए जाने के निर्णय पर रोक लगती है, तभी उनकी सदस्यता बच सकती है।
कांग्रेस ने श्री गांधी की सदस्यता समाप्त किए जाने पर कहा कि भाजपा सच बोलने वालों की आवाज बंद करना चाहती है।भाजपा ने श्री गांधी को अदालत में दोषी करार दिए जाने पर कहा है कि कोई भारत में कानून के सामने सभी बराबर हैं।(वार्ता)



