
अगरतला : त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को हुआ मतदान कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर शांतिपूर्ण रहा और 85 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।चुनाव और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस पूर्वोत्तर राज्य में मतदान के दौरान किसी बड़ी वारदात की सूचना नहीं मिली।चुनाव आयाेग के एक अधिकारी ने कहा, “ राज्य में 85 प्रतिशत मतदाताओं ने शाम चार बजे तक अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर लिया था। कई मतदान केन्द्रों के बाहर मतदाताओं की लंबी कतारें लगी होने के कारण मतदान प्रतिशत बढ़ने की संभावना है।”पिछले 2018 के विधानसभा चुनाव में 89 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले थे।अगरतला और अन्य जगहों पर अधिकतर मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिली।
मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ था। शुरुआत में कुछ मतदान केन्द्रों पर इलेक्ट्रािनिक वोटिंग मशीनों के खराब होने के कारण मतदान धीमा रहा। कुछ मतदान केन्द्रों पर पहली बार मतदान ड्यूटी पर लगाये गये कर्मचारियों को मतदान प्रक्रिया को समझने में कुछ समय लगा।अगरतला सहित ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला तथा बुजुर्ग मतदाताओं के समूह मतदान शुरू होने से एक घंटे पहले ही मतदान केन्द्रों पर समूहों में खड़े दिखाई दिये। पहले तो सुरक्षा कर्मियों ने इन मतदाताओं को मतदान केन्द्र परिसर में आने से रोका लेकिन जब भीड़ रास्तों और सड़कों पर जमा होने लगी तो उन्हें अंदर आने दिया गया।मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता डॉ मानिक साहा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुदिप रॉयबर्मन क्रमश: बारदोवली और अगरतला विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं।
श्री साहा ने उज्जयंता पैलेस के सामने महारानी तुलसीवती एचएस स्कूल में बने मतदान केन्द्र में वोट डाला। वोट डालने के बाद श्री साहा ने कहा कि वह न केवल बारदोवाली सीट से बड़े अंतर से चुनाव जीतेंगे बल्कि भाजपा भी आराम से बहुमत से चुनाव जीतेगी। उन्होंने कहा कि लोगों ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)-कांग्रेस गठबंधन को चुनाव में नकार दिया है।मुख्यमंत्री ने कहा, “ मैं प्रशासन के संपर्क में हूं, किसी भी जगह से कोई समस्या होने की सूचना नहीं है। ”विपक्षी वाम मोर्चा-कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों को वोट देने से रोका गया और उनके उम्मीदवारों के चुनावी एजेंटों को रामनगर, खायेरपुर, मोहनपुर, धानपुर और संतिरबाजार विधानसभा क्षेत्रों में कुछ मतदान केन्द्रों से बाहर कर दिया गया।वाम मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन ने आरोप लगाया कि दक्षिण त्रिपुरा और सिपाहीजला जिले के कुछ इलाकों में विपक्षी मतदाताओं को उनके रहवास में ही बंद कर दिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के नेता माणिक सरकार ने आरोप लगाया कि केन्द्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक और शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ के इशारे पर सत्तारूढ़ दलों के कार्यकर्ताओं ने हिंसा फैलायी और धानपुर तथा मोहनपुर में मतदाताओं को मतदान करने से रोका गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर चुनाव अधिकारियों-कर्मचारियों का उत्तर ‘संतोषजनक’ नहीं था।भाजपा और वामदल-कांग्रेस गठबंधन के बीच कड़े मुकाबले के दरम्यान आज अगरतला के अभयनगर क्षेत्र में उस समय सुखद अनुभूति हुई जब कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपने बूथ एकसाथ बनाये और मुस्कुराते हुए एक-दूसरे को स्नैक का आदान-प्रदान किया।सत्तारूढ़ भाजपा राज्य की 60 सीटों में से 55 पर चुनाव लड़ रही जबकि उसकी सहयोगी इन्डिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) छह सीटों पर चुनाव लड़ रही हैक्योंकि वे एम्पीनगर सीट पर तालमेल नहीं कर पाये।भगवा दल को चुनाैती पेश करते हुए कभी एक-दूसरे के विरोधी रहे वाम दल और कांग्रेस ने इस चुनाव में हाथ मिला लिया है।
वाम मोर्चे के मुख्य घटक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) ने 43 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, फारवर्ड ब्लॉक और रिवाेल्यूशनरी पार्टी एक-एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस को 13 सीटें मिली हैं।रामनगर सीट पर लेफ्ट मोर्चा और कांग्रेस एक निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दे रहे हैं। यहां से प्रख्यात वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता पुरुषोत्तम रॉयबर्मन चुनाव लड़ रहेहैं।राजघराने की लोकप्रिय हस्ती प्रद्योत किशोर देववर्मन ने आदिवासियों का एक दल तिपरा मोथा बनाया है, जो 42 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। तृणमूल कांग्रेस 28 सीटें पर चुनाव लड़ रही है।इस चुनाव में 58 निर्दलीय अपना भाग्य आजमा रहे हैं। बीस महिला उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं।मतगणना दो मार्च को की जायेगी।(वार्ता)



