
नयी दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को काँग्रेस नेता राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हैं, उन्हें सीखना चाहिए कि मराठा शासक महादजी सिंधिया ने कैसे एक पैर पर खड़े होकर भारत को एकजुट किया था।
श्री सिंधिया ने यहां महाराष्ट्र सदन में दिल्ली में मराठा हिन्दवी स्वराज की स्थापना की 252 वर्षगांठ एवं मराठा शासक महादजी सिंधिया की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम दिल्ली विजयोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद सुधांशु त्रिवेदी, पूर्व सूचना आयुक्त उदय माहूरकर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत कार्यवाह भारत भूषण एवं दिल्ली मराठी प्रतिष्ठान के वैभव डांगे मौजूद थे।कार्यक्रम के मुख्य उद्बोधन में श्री सिंधिया ने कहा कि 10 फरवरी 1771 का दिन भारत के इतिहास, वर्तमान और भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक एवं गौरव के दिवस के रूप में सदैव प्रेरणादायी रहेगा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के लाल किले की एक एक ईंट का लाल रंग देशभक्त बलिदानियों के खून से रंग कर आया है।उन्होंने 1758 के बाद की ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया जिनमें 1761 की पानीपत की तीसरी लड़ाई और 1771 में महादजी सिंधिया की दिल्ली विजय एवं 1803 तक के शासन, उनके शासन काल में दिल्ली के व्यापक विकास का कार्य शामिल है।उन्होंने कहा कि पानीपत की तीसरी लड़ाई में सिंधिया राजवंश के 16 दीप बुझ गए थे। महादजी सिंधिया का एक पैर कट गया था। उन्होंने एक पैर होने के बावजूद फ्रांस, पुर्तगाल की मदद से सेना का आधुनिकीकरण किया। बंदूक एवं तोपों वाली फौज तैयार की। आगरा में तोप का कारखाना स्थापित किया और 10 साल बाद 1771 में लालकिले को जीत लिया। इतना ही नहीं 1782 में बडगाम में अंग्रेज़ों को करारी शिकस्त दी थी। जिसके कारण अंग्रेज़ों को माधवराव पेशवा को मान्यता देने के लिए बाध्य होना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि आज जो भारत जोड़ो अभियान चला रहे हैं उन्हें इतिहास के पन्नों को पढ़ कर सीखना चाहिए कि पाटिल महादजी सिंधिया ने एक पैर से हिमालय से अरब सागर, अटक से कटक तक भारत को एक किया। उन्होंने ना केवल सैन्य शक्ति एवं कौशल बल्कि सांस्कृतिक एवं सामाजिक दृष्टि से भी भारत को जोड़ने का महती कार्य किया। आत्मनिर्भर भारत और एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को क्रियान्वित किया था।श्री सिंधिया ने कहा कि एशिया के जननायकों में महादजी सिंधिया की बराबरी में कोई नहीं है। आजादी के अमृत काल में इतिहास के पन्नों में लुप्त काल को उजागर करने का काम आवश्यक है।
इस मौके पर श्री सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इतिहासकारों ने देश के इतिहास के हिन्दू स्वाभिमान, गौरव एवं विजय के अध्यायों को जानबूझकर छिपाया। यह कहीं नहीं बताया गया कि मुगल बादशाह शाह आलम महादजी सिंधिया के मातहत था। बप्पा रावल ने तुर्की तक साम्राज्य स्थापित किया था।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को देशवासियों का अमृत काल में गुलामी के चिह्नों से मुक्त होने का आह्वान किया है। भारतीय नौसेना के ध्वज एवं निशान में परिवर्तन इसीलिए किया गया और उसमें छत्रपति शिवाजी की नौसेना का निशान शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि इतिहासकारों ने मुगलों, अफगानों एवं अंग्रेज़ों आदि आक्रमणकारियों को महिमामंडित किया और भारत के समाज को जाति धर्म आदि में बंटा हुआ समाज बताया और उसे विविधता कहा।कार्यक्रम में मराठी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं।(वार्ता)



