भुवनेश्वर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ ही बुजुर्गों और बीमारों की सेवा को मानव धर्म बताते हुए लोगों से इसे अपने जीवन का संकल्प बनाने का आग्रह किया।सुश्री मुर्मू यहां ज्ञानप्रभा मिशन के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा, “ हमारे संतों ने शिक्षा दी कि हमें माता-पिता, गुरु और अतिथि को भगवान मानना चाहिए , लेकिन क्या हम इसे अपने जीवन में अपनाते हैं? यह एक बड़ा सवाल है। क्या बच्चे अपने माता-पिता की उचित देखभाल कर रहे हैं? अक्सर अखबारों में बुजुर्ग मां-बाप की दुखभरी कहानियां छपती हैं।”
राष्ट्रपति ने कहा कि केवल माता-पिता को भगवान कहना और उनके चित्रों की पूजा करना अध्यात्म नहीं है बल्कि माता-पिता का ख्याल रखना तथा उनका सम्मान करना जरुरी है। उन्होंने कहा कि वह ज्ञानप्रभा मिशन के स्थापना दिवस समारोह का हिस्सा बनकर खुश हैं, जिसे मां की शक्ति और क्षमता को जगाने और एक स्वस्थ मानव समाज के निर्माण के उद्देश्य से स्थापित किया गया है तथा यह बड़े गर्व की बात है कि इस मिशन का नाम परमहंस योगानंद जी की मां के नाम पर रखा गया है जो उनकी प्रेरणा थीं।उन्होंने योग के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा किया जिसने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल दिया।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब उन्होंने सारी उम्मीद खो दी थी, लेकिन उसी दौरान वह योग को अपनाया , जिससे उन्हें जीवन में विश्वास हासिल करने में मदद मिली।उन्होंने कहा , “ हमारी भौतिकवादी अपेक्षाएं और आकांक्षाएं बढ़ रही हैं, लेकिन हम धीरे-धीरे अपने जीवन के आध्यात्मिक पक्ष से दूर होते जा रहे हैं।”उन्होंने कहा कि पृथ्वी के संसाधन सीमित हैं, लेकिन मनुष्य की इच्छाएं असीमित हैं। वर्तमान विश्व प्रकृति के असामान्य व्यवहार को देख रहा है जो जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के तापमान में वृद्धि में परिलक्षित होता है।
उन्होंने कहा,“हमारी अगली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने के लिए प्रकृति के अनुकूल जीवन शैली जरुरी है। हमने विज्ञान में चाहे कितनी भी तरक्की कर ली हो, हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हमें प्रकृति का आभारी होना चाहिए और प्रकृति के अनुरूप जीवन शैली अपनानी चाहिए।” (वार्ता)
LIVE: President Droupadi Murmu addresses the second convocation of Rama Devi Women’s University, Bhubaneswar https://t.co/Lc3u0mXCNK
— President of India (@rashtrapatibhvn) February 10, 2023



