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कोविड-19-दो लाख से अधिक हुए स्वास्थ्य , ठीक होने का दर बढ़ा

भारत में कोविड-19 सहयोग के लिए भारत सरकार और एआईआईबी ने 750 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किये

नई दिल्ली । पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के 10,386 रोगियों के ठीक होने की पुष्टि के साथ अब तक कोविड-19 से ठीक होने वाले मरीजों की कुल संख्या 2,04,710 हो गई है। इसकी वजह से रोगियों के ठीक होने (रिकवरी) की दर बढ़कर 53.79 प्रतिशत हो गई है। वर्तमान में 1,63,248 सक्रिय मामले चिकित्सीय देख-रेख में हैं। दैनिक आंकड़ों का रुझान बढ़ती रिकवरी दर और सक्रिय एवं ठीक हुए मामलों के बीच बढ़ते अंतर को बताता है। ठीक होने के मामलों के अनुपात में वृद्धि, भारत की कोविड-19 के लिए समयबद्ध प्रबंधन की रणनीति को दर्शाता है।

राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के साथ तालमेल कर भारत सरकार द्वारा कोविड-19 को लेकर उचित व्यवहार के बारे में लोगों को जागरूक करने, लॉकडाउन के कार्यान्वयन जैसे सक्रिय उपायों ने इस वायरस के प्रसार को काफी सीमित कर दिया। लॉकडाउन ने सरकार को परीक्षण सुविधाओं और स्वास्थ्य के ढांचे को बेहतर बनने के लिए समय दिया जिससे समय पर रोगियों का पता लगाने और कोविड-19 के मामलों के चिकित्सीय प्रबंधन के जरिए रिकवरी दर को सुधारना सुनिश्चित हुआ। इस प्रकार यह बढ़ता हुआ अंतर कोविड-19 को नियंत्रित करने की दिशा में सरकार के समयबद्ध, वर्गीकृत एवं अग्र-सक्रिय दृष्टिकोण और इस पर अनगिनत फ्रंटलाइन वर्कर्स के जरिए अमल का ही परिणाम है।सरकारी प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाकर 703 और निजी प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ाकर 257 (कुल 960) कर दी गई है।

भारत में कोविड-19 सहयोग के लिए भारत सरकार और एआईआईबी ने 750 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किये

भारत सरकार और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) ने आज, गरीब व कमजोर परिवारों पर कोविड-19 महामारी के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने तथा प्रतिक्रिया को मजबूती देने हेतु भारत को सहायता प्रदान करने के लिए 750 मिलियन डॉलर के “कोविड-19 सक्रिय प्रतिक्रिया और व्यय सहायता कार्यक्रम” पर हस्ताक्षर किए। यह एआईआईबी की ओर से भारत के लिए पहला बजटीय समर्थन कार्यक्रम है। भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के अपर सचिव श्री समीर कुमार खरे एवं एआईआईबी की ओर से महानिदेशक (कार्यकारी) श्री राज मिश्रा ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।

श्री खरे ने कहा, “हम संगठित और अनौपचारिक दोनों क्षेत्रों में कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के उपायों को मज़बूत करने तथा महिलाओं समेत कमजोर वर्गों के आर्थिक नुकसान की भरपाई करने के लिए सामाजिक सहायता प्रदान करने हेतु सरकार की तत्काल प्रतिक्रिया के लिए एआईआईबी की सहायता का धन्यवाद करते हैं। एआईआईबी की समय पर की गयी वित्तीय सहायता, सरकार के कोविड-19 आपातकालीन प्रतिक्रिया कार्यक्रम के प्रभावी कार्यान्वयन में योगदान देगी।

यह कार्यक्रम कोविड-19 के गंभीर व प्रतिकूल सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को कम करने के लिए भारत सरकार को बजट समर्थन प्रदान करेगा। वर्तमान ऋण, कोविड-19 संकट रिकवरी सुविधा के तहत एआईआईबी की तरफ से भारत के लिए दूसरा ऋण होगा। यह कोविड-19 आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली तैयारी परियोजना के लिए पहले से स्वीकृत 500 मिलियन डॉलर के ऋण के अतिरिक्त है।

कार्यक्रम के प्राथमिक लाभार्थी गरीबी रेखा के नीचे वाले परिवार, किसान, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, महिलाएं, महिला स्व-सहायता समूह, विधवा, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक, कम वेतन पाने वाले लोग, विनिर्माण श्रमिक और अन्य कमजोर समूह होंगे। एआईआईबी के उपाध्यक्ष (निवेश परिचालन) श्री डी जे पांडियन ने कहा कि भारत को एआईआईबी के समर्थन का लक्ष्य, भारतीय अर्थव्यवस्था की मानव संसाधन समेत उत्पादक क्षमता को दीर्घकालिक नुकसान को रोकने के लिए आर्थिक सहनशीलता सुनिश्चित करना है।

परियोजना को एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) द्वारा 2.250 बिलियन डॉलर की राशि में वित्तपोषित किया जा रहा है। इसमें 750 मिलियन डॉलर एआईआईबी द्वारा और 1.5 बिलियन डॉलर एडीबी द्वारा प्रदान किया जायेगा। विभिन्न मंत्रालयों के सहयोग से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा इस परियोजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) एक बहुपक्षीय विकास बैंक है, जिसका मिशन एशिया में सामाजिक और आर्थिक परिणामों को बेहतर बनाना है। बैंक का परिचालन जनवरी 2016 में शुरू हुआ। एआईआईबी के अब दुनिया भर में 102 स्वीकृत सदस्य हैं।

 घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने के लिए  कर्नाटक सरकार की सराहना की

केंद्र सरकार ने कोविड -19 प्रबंधन के लिए कर्नाटक सरकार के प्रयासों की सराहना की है। इन प्रयासों में कोविड -19 पॉजिटिव मामलों के संपर्कों का व्यापक स्तर पर पता लगानाऔर घर-घर जाकर / फोन-आधारित घरेलू सर्वेक्षण करना शामिल है। इसके अंतर्गत 1.5 करोड़ से अधिक परिवारों को कवर किया गया है। इन दो पहलों को राज्य सरकार के ‘सम्पूर्ण दृष्टिकोण’ के रूप में विकसित किया गया है। इसके लिए बहु-क्षेत्रीय एजेंसियों की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों और तरीकों का उपयोग किया जा रहा है। प्रत्येक मामले का प्रभावी तरीके सेपता लगाया जा रहा है और उसकी निगरानी की जा रही है। इस प्रकार महामारी को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जा रहा है। महामारी की रोकथाम में संपर्क का पता लगाना महत्वपूर्ण है और इससे  स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक बोझ न पड़ने में भी मदद मिलती है। कर्नाटक ने भारत सरकार द्वारा परिभाषित उच्च जोखिम और कम जोखिम वाले संपर्कों को शामिल करने के लिए ’संपर्क’ की परिभाषा में विस्तार किया है। कर्नाटक में प्राथमिक और द्वितीयक संपर्कों का सावधानीपूर्वक पता लगाया गया और उन्हें कठोर क्वारंटाइन में रखा गया।

राज्य द्वारा तैयार किए गए एसओपी विवरण के अनुसार,10,000 से अधिक प्रशिक्षित फील्ड स्टाफ,संपर्कों का पता लगाने की विशिष्ट जिम्मेदारीनिभाते हैं।एसओपी में प्रत्येक प्रशिक्षित कर्मी द्वारा विभिन्न चरणों में किये जाने वाले कार्यों का उल्लेख है। कार्य की विशालता को देखते हुए संपर्कों का पता लगाने तथा पॉजिटिवमरीजों की वास्तविक विस्मृतिव विभिन्न कारणों से तथ्यों को छिपाने जैसी चुनौती से निपटने के लिए मोबाइल ऐप और वेब एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है। केंद्र ने अन्य राज्यों से इन सर्वोत्तम प्रथाओं को अपने स्थानीय जरूरत के अनुरूपबदलाव करने और उन्हें कोविड -19 महामारी के बेहतर प्रबंधन के लिए अपनाने का अनुरोध किया है।

राज्य बड़े निगम क्षेत्रों में स्थितस्लम में संक्रमण के प्रसार को कम करने में सक्षम रहा है। इसके लिए स्लम या इस तरह के क्षेत्रों में रहने वाले संपर्कों का अनिवार्य संस्थागत क्वारंटाइनकिया गया है। कर्नाटक आने वाले सभी लोगों  / यात्रियों के लिए “सेवा सिंधु” पोर्टल पर पंजीकरण करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। जब इनलोगों को घर / संस्थागत क्वारंटाइन में रखा जाता है तो पोर्टल के जरिये राज्य,अगले कुछ दिनों इनपर निगरानी रख सकता है।’क्वारंटाइन वाच ऐप’ का उपयोग क्वारंटाइन को लागू करने में क्षेत्र के कर्मियों की सहायता करता है। राज्य ने सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से घरेलू क्वारंटाइन के लिए मोबाइल स्क्वॉड का भी गठन किया है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा क्वारंटाइन उल्लंघन के बारे में पड़ोसी या अन्य से जानकारी प्राप्त होती  है, तो उस व्यक्ति को संस्थागत क्वारंटाइन में स्थानांतरित कर दिया जाता है। बुजुर्गों, सह-रुग्णता वाले लोगों, गर्भवती महिलाओं और इंफ़्लुएंज़ा (आई एल आई ) / गंभीर श्वसन बीमारी (एसएआरआई) से पीड़ित व्यक्तियों जैसे उच्च जोखिम वाली आबादी की पहचान, रक्षा और उपचार के उद्देश्य सेकर्नाटक ने घर-घर जाकर  / फोन आधारित घरेलू सर्वेक्षणकिया है।

सर्वेक्षण, मई 2020 के दौरान पूरा किया गया था और इसमें कुल 168 लाख घरों में से 153 लाख घरों को कवर किया गया। पोलिंग बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) को हेल्थ सर्वे ऐप तथा वेब एप्लिकेशन का उपयोग करके आवश्यक जानकारी एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गयी थी। सर्वेक्षण के माध्यम से एकत्र किए गए डेटा को स्वास्थ्य विभाग के पास पहले से उपलब्ध गर्भवतीमहिलाओं  और टीबी / एचआईवी / डायलिसिस / कैंसर के रोगियों की जानकारी से संपूरित किया गया।नैसकॉमके सहयोगसे राज्य सरकार द्वारा स्थापित अपतामित्र टेली-परामर्श हेल्पलाइन (कॉल नंबर 14410) के माध्यम से एक आउटरीच अभियान का संचालन किया जा रहा है। इसका उपयोग इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) और आउटबाउंड कॉल के माध्यम से जोखिम वाले घरों तक पहुंचने के लिए किया जाता है। यदि कोई परिवार कोविड  -19 जैसे लक्षणों की सूचना देता है तो उन्हें टेलीमेडिसिन चिकित्सक द्वारा सलाह दी जाती है। फील्ड स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) उन घरों में जाते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आवश्यक स्वास्थ्य सेवा प्रदान की गई है।

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