संस्कृत भारतीय संस्कृति की आत्मा: प्रो हरेराम त्रिपाठी
चार फरवरी तक चलेगा पांच दिवसीय पुस्तक मेला, क्रॉफ्ट प्रदर्शनी
वाराणसी। संस्कृत सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि वह भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यदि भाषाओं में से संस्कृत को विलुप्त कर दिया जाए, तो कोई भी भाषा अपना अस्तित्व नहीं बनाए रख सकती। ‘सत्यमेव जयते’ जो भारत का शासकीय मंत्र है, वह भी संस्कृत से है। उक्त विचार विज्ञान भवन में जी-20 के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये वृहद् पुस्तक मेला, क्रॉफ्ट चित्र प्रदर्शनी के आयोजन में संपूर्णानंद विवि कुलपति प्रो हरेराम त्रिपाठी ने कही।
कुलपति प्रो त्रिपाठी ने कहा कि क्रॉफ्ट और चित्रकारी के माध्यम से लोगों के अंदर के कला-कौशल एवं अन्तर्भाव के ज्ञान-राशि हैं इससे कौशल विकास होगा। कार्यक्रम संयोजक प्रो जितेन्द्र कुमार शाही ने बताया कि आज गौरव के साथ भारत को जी-20 सम्मेलन करने की मेजबानी मिली है इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के दृष्टि में यहां विभिन्न तरह के 09 दिवसीय कार्यक्रम की शृंखला में यह वृहद् पुस्तक प्रदर्शनी/मेला,क्राफ्ट मेला का आयोजन किया गया है। मेला 4 फरवरी तक 45 प्रतिशत छूट के साथ चलेगा। इस दौरान डॉ. पद्माकर मिश्र, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. हीरक कान्त चक्रवर्ती, प्रो रमेश प्रसाद, प्रो महेंद्र पांडेय, प्रो. शैलेश कुमार, प्रो. राजनाथ, प्रो. विधु द्विवेदी,डॉ. विशाखा शुक्ला आदि लोग थे।



