
विचाराधीन कैदियों की दैहिक आजादी बाधित न हो
बोले न्यायमूर्ति कौल ,लंबे समय तक जेल में मात्र इसलिए न बंद रहे कि उसके मामले की अपील न्यायालय में लंबित है.न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने कहा, जेल की स्थिति में सुधार जरूरी.
वाराणसी। हमें न केवल मामलों को जल्दी से निपटाने की जरूरत है बल्कि यह भी देखना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक जेल में मात्र इसलिए न बंद रहे कि उसके मामले का विचारण अथवा अपील न्यायालय में लंबित चल रही है। अपराध के पीड़ितों को समय पर मुआवजा प्रदान किया जाए, साथ ही पुनर्वास की व्यवस्था हो। उक्त बातें राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली की ओर से कैंटोमेंट स्थित एक होटल में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्मि संजय किशन कौल ने कहीं। उन्होंने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनावश्यक प्रशासनिक या कानूनी तकनीक के चलते विचाराधीन कैदियों की दैहिक स्वतंत्रता बाधित न हो। इस सम्मेलन में 11 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के माननीय न्यायमूर्ति और सदस्यों ने प्रतिभाग किया।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने कहा कि विभिन्न राज्यों में जेल की अच्छी स्थिति न होने और उसमें सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने प्रतिनिधियों के रूप में भाग लेने वाले 11 राज्यों के न्यायाधीशों और अन्य प्रतिभागियों से भी जेलों में निरूद्ध बंदियों की संख्या को कम करने के लिए उपयुक्त मामलों में परिवीक्षा प्रदान करने की अपील की। न्यायमूर्ति राजेश बिंदल चीफ जस्टीस हाईकोर्ट इलाहाबाद ने कहा कि विधिक साक्षरता के प्रसार में कानून के छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है। इसके पूर्व न्यायमूर्ति हाईकोर्ट इलाहाबाद प्रीतिंकर दिवाकर ने न्याय के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अधिक प्रयासों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। अंत में न्यायमूर्ति हाईकोर्ट मनोज मिश्रा ने प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया।
इनसाइड पंजाब प्रिजन्स स्टडी शोध का विमोचन
इस दौरान पंजाब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा तैयार की गयी इनसाइड पंजाब प्रिजन्स, स्टडी आॅफ द कंडीशंस आॅफ प्रिजंस इन पंजाब नामक शोध रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया। सम्मेलन में उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, उच्च न्यायालय इलाहाबाद के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति श्री प्रीतिंकर दिवाकर, वरिष्ठ न्यायाधीश उच्च न्यायालय इलाहाबाद मनोज मिश्रा, उच्च न्यायालय इलाहाबाद/अध्यक्ष उच्च न्यायालय विधिक सेवा भी उपस्थित थे।



